क्षेत्रीय
20-May-2026
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ईंटखेड़ी(ईएमएस)। विधानसभा की कृषि विकास समिति ने मंगलवार दिनांक 19.05.2026 को राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विष्वविद्यालय ग्वालियर के अंतर्गत संचालित फल अनुसंधान केंद्र, ईंटखेड़ी का भ्रमण किया। 21.9 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित फल अनुसंधान केंद्र का निरीक्षण करते हुए समिति सदस्यों ने केंद्र द्वारा किए जा रहे अनुसंधान कार्यों की सराहना की। इस दौरान समिति ने किसानों से प्रत्यक्ष संवाद भी किया। भ्रमण के दौरान समिति ने फल अनुसंधान केंद्र के प्रक्षेत्र में स्थापित आम की (लगभग 50) उन्नत किस्मों जैसे लंगड़ा, दशहरी, बॉम्बे येलो आदि का अवलोकन किया। आम के पेड़ों में आई बहार और लगे हुए फलों को देखकर समिति ने प्रसन्नता व्यक्त की तथा कृषक भाइयों को आम की उन्नत किस्मों को लगाकर उत्पादन एवं आय बढाने की सलाह दी। समिति को नींबू, अमरूद एवं अन्य फल फसलों की पौध उत्पादन तकनीकों की जानकारी भी दी गई। इस दौरान आर.ए.के कृषि महाविद्यालय, सीहोर एवं केन्द्र के वैज्ञानिकों द्वारा ग्राफ्टिंग, पौध संवर्धन एवं खाद्य प्रसंस्करण प्रक्रियाओं का प्रदर्शन किया गया। समिति के सभापति मा. ठाकुरदास नागवंशी व सदस्य गण मा. शिवनारायण सिंह, मा. श्रीकांत चतुर्वेदी, मा. जितेंद्र पंड्या ने अपर सचिव उमेश शर्मा, सूचना अधिकारी महावीर सिंह एवं अन्य अधिकारियों के साथ फल अनुसंधान केंद्र ईंटखेड़ी का भ्रमण किया। आर.ए.के. कृषि महाविद्यालय सीहोर के अधिष्ठाता एवं फल अनुसंधान केंद्र, ईंटखेड़ी के प्रभारी डॉ. आई.एस. तोमर ने समिति के सदस्यों का स्वागत किया और केंद्र की गतिविधियों एवं उपलब्धियों की जानकारी दी। समिति सदस्यों ने केंद्र के विभिन्न नेट हाउस और बगीचे का निरीक्षण भी किया। इस दौरान विभिन्न स्थानों से आए किसान भी मौजूद थे। समिति के सदस्यों ने किसानों से परिचर्चा भी की। दरअसल समिति के भ्रमण का उद्देष्य किसानों से प्रत्यक्ष संवाद था ताकि धरातल पर मौजूद चुनौतियों और समस्याओं को जाना जा सके और उसे शासन की नीति और योजनाओं के माध्यम से दूर किया जा सके। समिति के सभापति मा. ठाकुरदास नागवंशी ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि नरवाई (पराली ) जलाने के मामले में मध्यप्रदेश में विदिशा टॉप पर है इसके अलावा अन्य जिलों में भी नरवाई जलाने की समस्या बढ़ रही है। यह पर्यावरण के साथ ही मृदा स्वास्थ्य के लिए चिंतनीय हैं। उन्होंने किसानों से नरवाई न जलाने और प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने के सुझाव मांगे। ग्राम मुंगालिया हाट के प्रगतिषील किसान गीताप्रसाद पाटीदार ने कहा कि नरवाई जलाने से पर्यावरण को नुकसान होता है। इससे बचना चाहिए। सरकार को नरवाई न जलाने के लिए जागरूकता बढ़ानी चाहिए। लांबाखेड़ा के किसान सुभाष गौर ने कहा कि पराली प्रबंधन में आने वाले खर्च को बचाने के लिए किसान उसे जला देते हैं। महोड़िया गांव के महेंद्र सिंह ने समिति को सुझाव दिया कि पराली को न जलाकर रोटावेटर चलाने और उसके बाद बक्खर चलाने पर खर्चा बढ़ जाता है। अगर सरकार रोटावेटर, सुपर सीडर व अन्य पराली प्रबंधन यंत्रों पर सब्सिडी बढ़ा दे तो किसान को फायदा होगा और पराली जलाने की समस्या में कमी आएगी। लांबाखेड़ा के किसान किशन ने कहा कि पराली जलाने की समस्या में कमी लाने के लिए क्रॉप डायवर्सिफिकेशन तकनीक को अपनाना होगा। परवलिया सड़क के किसान मनोहर पाटीदार ने कहा कि मूंग बोने के लिए किसान पराली को जलाकर खेत को जल्दी साफ कर देते हैं। अगर पराली प्रबंधन के लिए उपयोग में आने वाले यंत्रों पर अनुदान बढ़ा दिया जाए और उन्हें छोटे किसानों तक आसानी से उपलब्ध कराया जाए तो यह समस्या कम हो सकती है। राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. अजय कौशल ने सुझाव दिया कि छोटे किसानों को इनसेंटिव देकर और बॉयोचार के एप्लीकेशन को बढ़ावा देकर पराली जलाने की समस्या को कम किया जा सकता है। कार्यक्रम का संचालन डॉ. पूजा सिंह ने किया। कार्यक्रम के सफल आयोजन हेतु महाविद्यालय द्वारा गठित विभिन्न समिति के पदाधिकारी डॉं. एस.पी. दत्ता, डॉं. आई.एस. नारूका, डॉ. जी.एस. गाठिए, डॉ. अशोक चौधरी, डॉं. ए.एन. भानू, फल अनुसंधान केन्द्र के डॉ. प्रवीण बर्डे एवं सोनिका सिंह तथा समिति सदस्य डॉं. जी.एस. गाठिये डॉ. प्रियदर्शिनी खंबालकर, डॉं राकेश, डॉं. वर्षा धुर्वे, इंजी. महेन्द्र जोशी, डॉ. अमित कुमार, डॉ. पवन देवेश, डॉं. भरत लाल, डॉ. लालू प्रसाद, डी.सी नारनोरे, ए.के. विश्वकर्मा आदि उपस्थित थे। हरि प्रसाद पाल / 20 मई, 2026