राज्य
21-May-2026


* गुजरात की पहली ‘बायोडायवर्सिटी हेरिटेज साइट’ बनेगी वैश्विक जैव संरक्षण का प्रेरणास्थल अहमदाबाद (ईएमएस)| गुजरात सहित पूरे विश्व में हर वर्ष 22 मई को ‘अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस’ मनाया जाता है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की प्रेरणा तथा वन एवं पर्यावरण मंत्री अर्जुन मोढवाडिया और राज्य मंत्री प्रवीण माली के मार्गदर्शन में गुजरात बायोडायवर्सिटी बोर्ड द्वारा 22 मई 2026 को कच्छ जिले में ‘अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस-2026’ का आयोजन किया जाएगा। इस वर्ष आयोजन के लिए कच्छ जिले के लखपत तालुका के गुनेरी गांव के निकट स्थित गुजरात की पहली ‘बायोडायवर्सिटी हेरिटेज साइट’ – इनलैंड मैंग्रोव इकोसिस्टम को विशेष रूप से चुना गया है। अपनी अनूठी पर्यावरणीय विशेषताओं के कारण यह स्थल न केवल गुजरात बल्कि वैश्विक स्तर पर भी जैव विविधता संरक्षण के लिए प्रेरणास्रोत माना जा रहा है। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य स्थानीय नागरिकों की भागीदारी से जैव विविधता का संरक्षण तथा प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग को सुनिश्चित करना है। आयोजन के दौरान जैव विविधता संरक्षण विषयक विशेष व्याख्यान, प्रदर्शनी, वृक्षारोपण, जागरूकता गतिविधियां तथा स्थानीय जैव विविधता प्रबंधन समितियों (BMC) के सदस्यों के साथ संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसमें ग्रामीण जैव विविधता प्रबंधन समितियों के सदस्य, महिलाएं, विद्यार्थी, युवा, पारंपरिक ज्ञान रखने वाले वैद्य तथा स्थानीय नागरिक बड़ी संख्या में भाग लेंगे। वर्ष 2026 की थीम “स्थानीय स्तर पर कार्य – वैश्विक स्तर पर प्रभाव” यह संदेश देती है कि जैव विविधता संरक्षण केवल सरकारों या अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि गांवों, शहरों और स्थानीय समुदायों द्वारा किए गए छोटे-छोटे प्रयास भी वैश्विक स्तर पर सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं। जल, जंगल, जमीन, वन्यजीव तथा पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण से ही भविष्य की पीढ़ियों के लिए स्वस्थ और संतुलित पर्यावरण का निर्माण संभव होगा। गांधीनगर स्थित गुजरात बायोडायवर्सिटी बोर्ड जैव विविधता अधिनियम-2002 के तहत राज्यभर में स्थानीय स्वराज संस्थाओं में जैव विविधता प्रबंधन समितियों (बीएमसी) का गठन कर रहा है। इन समितियों के माध्यम से ‘पीपल्स बायोडायवर्सिटी रजिस्टर’ (पीबीआर) तैयार किए जाते हैं, जिनमें स्थानीय जैव विविधता, पारंपरिक ज्ञान तथा प्राकृतिक संसाधनों का दस्तावेजीकरण किया जाता है। साथ ही लाभों की प्राप्ति और साझेदारी (एबीएस) व्यवस्था के जरिए स्थानीय समुदायों को जैव विविधता संरक्षण के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। इसी क्रम में वर्ष 2025 में कच्छ जिले के गुनेरी स्थित इनलैंड मैंग्रोव क्षेत्र को गुजरात की पहली ‘बायोडायवर्सिटी हेरिटेज साइट’ घोषित किया गया था। वहीं डांग जिले के चिंचली गांव स्थित ‘नेचुरल मैंगो फॉरेस्ट’ को भी बायोडायवर्सिटी हेरिटेज साइट घोषित करने की प्रक्रिया जारी है। गुजरात बायोडायवर्सिटी बोर्ड द्वारा राज्यभर में जैव विविधता जागरूकता के लिए कार्यशालाएं, प्रशिक्षण कार्यक्रम, रेडियो कार्यक्रम, विद्यालय स्तरीय प्रतियोगिताएं, प्रदर्शनियां तथा विशेष दिवसों का आयोजन किया जाता है। इन गतिविधियों के माध्यम से लोगों में जैव विविधता संरक्षण के प्रति जागरूकता और सहभागिता बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि जैव विविधता संरक्षण के लिए वर्ष 1992 में ब्राजील के रियो डी जेनेरो में आयोजित ‘अर्थ समिट’ के दौरान “कन्वेंशन ऑन बायोलॉजिकल डायवर्सिटी (सीबीडी)” अस्तित्व में आया था, जो 29 दिसंबर 1993 से लागू हुआ। भारत सहित 190 से अधिक देशों ने इस समझौते को स्वीकार किया है। इसके तीन प्रमुख उद्देश्य हैं— जैव विविधता का संरक्षण, उसके घटकों का सतत उपयोग तथा उससे प्राप्त लाभों का न्यायसंगत और समान वितरण। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 22 मई को ‘अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस’ घोषित किया था। यह तिथि 22 मई 1992 को नैरोबी फाइनल एक्ट के तहत जैव विविधता संबंधी दस्तावेज को अपनाए जाने की स्मृति में चुनी गई। इस दिवस का मुख्य उद्देश्य लोगों को जैव विविधता के महत्व से अवगत कराना, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की आवश्यकता समझाना तथा समाज के विभिन्न वर्गों को जैव संरक्षण के लिए प्रेरित करना है। कच्छ जिला अपनी विशिष्ट पर्यावरणीय संरचना, सांस्कृतिक विरासत और समृद्ध जैव विविधता के कारण राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान रखता है। कच्छ का विशाल भूभाग यूनेस्को से मान्यता प्राप्त बायोस्फियर रिजर्व क्षेत्र से जुड़ा हुआ है, जो यहां की प्राकृतिक संपदा और विविध पारिस्थितिकी तंत्र को दर्शाता है। 29 जनवरी 2025 को गुजरात की पहली ‘बायोडायवर्सिटी हेरिटेज साइट’ घोषित किया गया गुनेरी का इनलैंड मैंग्रोव इकोसिस्टम विश्व के अत्यंत दुर्लभ मैंग्रोव पारितंत्रों में से एक माना जाता है। दुनिया में गिनी-चुनी जगहों पर पाए जाने वाले ऐसे इनलैंड मैंग्रोव का गुजरात के कच्छ जिले में होना राज्य के लिए गौरव का विषय है। सतीश/21 मई