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21-May-2026


तेल बिगाड़ देगा भारत का गणित, जून में 160 डॉलर तक पहुंच सकता है क्रूड ऑयल भारत में महंगाई से साथ गरीबी बढ़ेगी! नई दिल्ली(ईएमएस)। अमेरिका-ईरान युद्ध से चरम पर पहुंची मिडिल ईस्ट टेंशन दुनिया के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। दुनिया की तेल जरूरतों को पूरा करने में अहम रोल निभाने वाला होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से तेल-गैस का संकट इन देशों की इकोनॉमी को नुकसान पहुंचा रहा है। पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका से लेकर ब्रिटेन और भारत तक में ईंधन की कीमतें बढ़ाई गई हैं। भारत में भी एक ही हफ्ते में दो बार पेट्रोल-डीजल के दामों में बढ़ोतरी का बम फूट चुका है। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल के बाद अब अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की ओर से भी भारत के लिए अलर्ट आया है। आईएमएफ ने कहा है कि कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी ऐसे ही जारी रही, तो ये भारत में बड़े वित्तीय जोखिमों का कारण बन सकता है। अगर ईरान से जुड़ा संकट जल्द खत्म नहीं हुआ, तो जून के आखिर तक कच्चे तेल की कीमतें 140 से 160 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं। इस कारण भारत में महंगाई के साथ गरीबी भी बढ़ेगी। दरअसल, ईरान और पश्चिमी देशों के बीच बढ़ते तनाव की वजह से तेल सप्लाई को लेकर डर बना हुआ है। दुनिया के बड़े हिस्से का तेल सप्लाई रूट स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरता है। अगर वहां सप्लाई थोड़ी सी भी प्रभावित होती है, तो पूरी दुनिया में तेल की कमी हो सकती है। अगर ये संकट एक महीने और जारी रहता है, तो तेल बाजार में बड़ा झटका लग सकता है। उन्होंने साफ कहा है कि 140 से 160 डॉलर प्रति बैरल वाला तेल दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए काफी बड़ा खतरा होगा। तेल आयात पर ज्यादा निर्भर देशों में की मुसीबतें बढ़ती जा रही हैं। भारत की बात करें, तो देश में तेल संकट के बुरे असर को लेकर लगातार वॉर्निंग मिल रही हैं। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के मुताबिक, वैश्विक ऊर्जा संकट को देखते हुए पॉलिसी मेकर्स को अब महंगाई कंट्रोल करने के साथ ही राजकोषीय और राजनीतिक दबाव के मद्देनजर पहले से कहीं अधिक सावधानी से संतुलन बनाना पड़ सकता है। आईएमएफ ने अपने नोट में सलाह दी है कि सरकार को कमजोर परिवारों और छोटे व्यवसायों को अस्थायी समर्थन देना चाहिए। आईएमएफ ने व्यापक ईंधन राहत के बजाय मौजूदा कल्याणकारी योजनाओं के जरिए अस्थायी समर्थन की सिफारिश की है। भारत पर सबसे ज्यादा असर भारत पर इस संकट का ज्यादा असर इसलिए भी हो रहा है क्योंकि भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है। ऐसे में जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होता है, तो भारत में भी पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढऩे लगती हैं। अगर क्रूड ऑयल 160 डॉलर तक पहुंचता है, तो पेट्रोल और डीजल के दामों में बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है। एक्सपट्र्स की मानें तो इससे ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ेगा और डेली इस्तेमाल की चीजें भी महंगी हो जाएंगी। सिर्फ पेट्रोल नहीं, हर चीज होगी महंगी तेल की कीमत बढऩे का असर सिर्फ ट्रक, कार या स्कूटी चला रहे लोगों को परेशान नहीं करती हैं। ट्रक और ट्रांसपोर्ट महंगा होने से सब्जियां, राशन, दूध और दूसरी जरूरी चीजों की कीमतें भी बढ़ जाती हैं। इसके अलावा फ्लाइट टिकट, ऑनलाइन डिलीवरी भी महंगी हो सकती हैं। यानी इससे आम आदमी की जेब पर सीधा असर पड़ेगा। वैश्विक निकाय ने कहा कि तेल का लगातार महंगा होना भारत के लिए वित्तीय जोखिमों की वजह साबित हो सकता है। न सिर्फ भारत बल्कि ये अन्य ऐसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए विशेष रूप से खतरा है, जहां ईंधन की महंगाई का परिवहन, रसद, खाद्य पदार्थों की कीमतों और घरेलू उपभोग पर बड़ा प्रभाव पड़ता है। तो लोग गरीबी में चले जाएंगे... आईएमएफ की यह चेतावनी भारत के लिए एक नाजुक समय में आई है, जबकि मिडिल ईस्ट संकट का गहरा प्रभाव देखने को मिल रहा है। दरअसल, अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का 80 फीसदी से ज्यादा क्रूड आयल भारत आयात करता है। ईरान और होर्मुज के आसपास सप्लाई में रुकावट की आशंकाएं गहराने से वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। इकोनॉमिस्ट इससे भारत के चालू खाता घाटे, महंगाई की स्थिति और रुपया पर पडऩे वाले प्रभाव को लेकर चिंतित हैं। आईएमएफ ने चेतावनी दी है कि ऊर्जा की कीमतों में उतार-चढ़ाव से भारतीय परिवारों के खर्च करने की क्षमता को बड़े स्तर पर कम कर सकती है। अगर समय रहते इन समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो और भी लोग गरीबी की ओर धकेल दिए जा सकते हैं। इस बीच आईएमएफ ने आगाह किया कि खराब ढंग से तैयार सहायता उपाय वित्तीय रूप से महंगे और मुश्किल भरे साबित हो सकते हैं और महंगाई के साथ ही सार्वजनिक कर्ज का बोझ बढ़ा सकते हैं और लंबे समय के लिए राजकोषीय दबाव पैदा कर सकते हैं। विनोद उपाध्याय / 2026