नईदिल्ली (ईएमएस)। केंद्र सरकार द्वारा गरीबों तक सरकारी योजनाओं का लाभ उन तक पहुंचे इसके लिए करोड़ों लोगों के जनधन खाते सरकार ने बैंकों में खुलवाए थे. वित्तीय लेनदेन के उद्देश्य से शुरू की गई प्रधानमंत्री जनधन योजना के बैंक खातों में बड़ी संख्या में खाता धारकों को मिनिमम बैलेंस शुल्क की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े आंकड़ों के अनुसार लगभग 62 प्रतिशत जनधन खातों में एक हजार रुपये से कम राशि जमा रहती है। ऐसे में जब सरकारी योजनाओं की सहायता राशि इन खातों में आती है. कई बैंक न्यूनतम बैलेंस एवं अन्य सेवा शुल्क के नाम पर जनधन खाते से शुल्क काट लेते हैं। सामाजिक संगठनों का आरोप है, इससे गरीब परिवारों को मिलने वाली सरकारी सहायता का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि जनधन योजना का मूल उद्देश्य गरीबों को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ना और सरकारी योजनाओं का पूरा प्रत्यक्ष लाभ पहुंचाना था. सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक को बैंकों द्वारा न्यूनतम बैलेंस और सेवा शुल्क संबंधी नियमों की समीक्षा कर गरीब खाताधारकों को राहत देने पर विचार करना चाहिए। जिस तरह से महंगाई और बेरोजगारी बढ़ रही है ऐसी स्थिति में सरकार को गरीबों को राहत देने के लिए आगे आना चाहिए। एसजे/ईएमएस/21/05/2026