:: धूमधाम से मनाया गोवर्धन उत्सव: खजराना गणेश मंदिर परिसर में भागवत कथा, आज रचाया जाएगा रुक्मणी विवाह :: इंदौर (ईएमएस)। हमारी जितनी कामनाएं बढ़ेंगी, उतना ही दुख भी बढ़ेगा। सुख और दुख तो जीवन के क्रम हैं जिनसे कोई भी बच नहीं सकता। संसार को दुखों का महासागर कहा गया है, लेकिन भगवान की सभी लीलाएं समाज के कल्याण के लिए होती हैं। इन लीलाओं में अनेक गूढ़ संदेश छिपे हैं जिन्हें समझने के लिए अंतर्मन की दृष्टि चाहिए। भगवान ने गोवर्धन पर्वत उठाकर न केवल ब्रज को इंद्र के कोप से बचाया, बल्कि बाल ग्वालों को साथ जोड़कर यह संदेश भी दिया कि पहाड़ जैसी विपत्ति का सामना भी सब मिलकर कर सकते हैं। अहंकार ही मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है। यह ऐसा घुसपैठिया है जो कभी भी, कहीं से भी प्रवेश कर हमारे चरित्र, स्वभाव और स्वाभिमान को खोखला बना सकता है। पतन से बचने के लिए इससे दूरी जरूरी है। यह दिव्य विचार भागवताचार्य पं. पुष्पानंदन पवन तिवारी ने व्यक्त किए। वे सप्तऋषि भागवत मंडल के तत्वावधान में पुरुषोत्तम मास के उपलक्ष्य में खजराना गणेश मंदिर स्थित सत्संग सभागृह में चल रहे भागवत ज्ञान यज्ञ में बोल रहे थे। गुरुवार शाम को कथा के दौरान गोवर्धन पूजा, छप्पन भोग एवं भगवान की बाल लीलाओं के प्रसंगों की सुंदर व्याख्या की गई। इस दौरान श्रद्धालुओं ने उत्साह के साथ गोवर्धन पूजा का उत्सव मनाया। कथा शुभारंभ के पूर्व मुख्य यजमान अशोक-आरती खंडेलवाल, हितेंद्र-वन्दना ग्रोवर, आशीष-खनक शर्मा एवं स्वप्न-स्वाति खंडेलवाल ने व्यास पीठ का पूजन किया। कथा में विद्वान वक्ता की अगवानी महेंद्र-दिव्या मानधन्या, रामचंद्र-उषा पितलिया एवं लक्ष्मण-चंद्रकांता कानूनगो ने की। मंदिर परिसर में यह कथा प्रतिदिन दोपहर 3:30 से शाम 7 बजे तक आयोजित की जा रही है। :: रुक्मणी विवाह आज, सुदामा चरित्र कल :: सप्त ऋषि भागवत मंडल के अशोक खंडेलवाल ने बताया कि कथा में शुक्रवार 22 मई को रुक्मणी विवाह का प्रसंग सुनाया जाएगा और धूमधाम से विवाह उत्सव मनाया जाएगा। इस विशेष प्रसंग के लिए कथा स्थल को विशेष रूप से सजाया गया है, जिसमें श्रद्धालु आकर्षक परिधानों में सज-धजकर शामिल होंगे। वहीं, समापन दिवस पर शनिवार 23 मई को सुदामा चरित्र, परीक्षित मोक्ष एवं कथा विश्राम के प्रसंग होंगे। इस दौरान श्रद्धालु लाल रंग के परिधान पहनकर कथा का पुण्य लाभ लेंगे। प्रकाश/21 मई 2026