चेन्नई (ईएमएस)। तमिलनाडु की राजनीति में मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने बड़ा राजनीतिक प्रयोग करते हुए करीब 50 साल पुरानी परंपराओं को बदल दिया है। 2026 चुनाव के बाद गठित नई सरकार को अब “कैबिनेट ऑफ फर्स्ट्स” कहा जा रहा है, क्योंकि इसमें गठबंधन राजनीति, युवाओं की भागीदारी और सामाजिक संतुलन का बिल्कुल नया मॉडल देखने को मिला है। तमिलनाडु की राजनीति लंबे समय तक डीएमके और एआईएडीएमके के एकदलीय शासन के इर्द-गिर्द घूमती रही। लेकिन विजय सरकार ने पहली बार औपचारिक गठबंधन कैबिनेट बनाकर इस परंपरा को तोड़ दिया है। राजनीतिक जानकार इसे राज्य की बदलती राजनीति का बड़ा संकेत मान रहे हैं। नई सरकार की सबसे बड़ी पहचान उसका युवा चेहरा है। कुल 33 मंत्रियों में से 11 मंत्री 40 वर्ष से कम उम्र के हैं। खास बात यह है कि लगभग पूरा मंत्रिमंडल नए चेहरों से भरा हुआ है और सिर्फ एक मंत्री के पास पहले का प्रशासनिक अनुभव है। इससे साफ है कि मुख्यमंत्री विजय ने अनुभव से ज्यादा नई सोच, ऊर्जा और युवा नेतृत्व पर भरोसा जताया है। सामाजिक प्रतिनिधित्व के स्तर पर भी यह कैबिनेट अलग नजर आ रही है। सरकार में 7 दलित मंत्रियों को जगह दी गई है, जो राज्य की राजनीति में अब तक का बड़ा प्रतिनिधित्व माना जा रहा है। सहयोगी दलों के शामिल होने के बाद यह संख्या और बढ़ सकती है। इसे सोशल जस्टिस की नई राजनीति के तौर पर देखा जा रहा है। सबसे बड़ा वैचारिक बदलाव ब्राह्मण समुदाय के प्रतिनिधित्व को लेकर देखने को मिला। विजय सरकार ने दो ब्राह्मण मंत्रियों को कैबिनेट में शामिल किया है, जबकि द्रविड़ राजनीति में लंबे समय से इस समुदाय को मंत्रिमंडल से दूरी पर रखा जाता रहा था। इसके अलावा छोटे और पिछड़े समुदायों को भी प्रतिनिधित्व देकर सामाजिक संतुलन साधने की कोशिश की गई है। हालांकि इस नए प्रयोग के साथ चुनौतियां भी जुड़ी हैं। कैबिनेट में अनुभव की कमी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या यह युवा और विविध टीम प्रशासनिक मोर्चे पर भी उतनी ही सफल साबित होगी, जितनी राजनीतिक रूप से दिखाई दे रही है। चन्द्रबली सिंह / 21/05/2026