व्यापार
23-May-2026
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- अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की तेजी से कंपनियां दाम बढ़ाने को मजबूर नई दिल्ली (ईएमएस)। आम आदमी की जेब पर महंगाई का बोझ एक बार फिर बढ़ गया है। सरकारी तेल कंपनियों ने शनिवार को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में फिर बढ़ोतरी कर दी, जो पिछले आठ दिनों में तीसरा इजाफा है। इस नई बढ़ोतरी के बाद देश की राजधानी दिल्ली में पेट्रोल 99.51 रुपये प्रति लीटर और डीजल 92.49 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया है। पेट्रोल अब 100 रुपये के मनोवैज्ञानिक आंकड़े से चंद पैसे दूर है, जिससे उपभोक्ताओं में चिंता बढ़ गई है। दिल्ली में पेट्रोल 87 पैसे प्रति लीटर और डीजल 91 पैसे प्रति लीटर महंगा हो गया है। इस बढ़ोतरी के साथ ही पिछले आठ दिनों के भीतर ईंधन की कीमतों में यह तीसरा इजाफा है। 15 मई को करीब चार साल बाद कीमतों में बदलाव करते हुए 3 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी, जिसके बाद मंगलवार को 90 पैसे और अब शनिवार को यह तीसरी वृद्धि हुई है। पिछले आठ दिनों में 15 मई को शुरू हुई मूल्य वृद्धि के बाद से दिल्ली में पेट्रोल 4.77 रुपये और डीजल 4.81 रुपये प्रति लीटर महंगा हो चुका है। इन लगातार वृद्धियों के पीछे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगी आग है। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और होर्मुज स्ट्रेट के संभावित बंद होने के खतरे ने वैश्विक कच्चे तेल के दाम 50 फीसदी से अधिक बढ़ा दिए हैं। पिछले साल औसतन 70 डॉलर प्रति बैरल रहने वाली भारतीय क्रूड बास्केट अब अप्रैल में 114 डॉलर और मई में 108 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रही है। सरकार और तेल कंपनियों ने जनता को एकमुश्त बड़े झटके से बचाने के लिए किश्तों में दाम बढ़ाने की रणनीति अपनाई है। हालांकि, इन बढ़ोतरी से तेल कंपनियों को आंशिक राहत मिली है, जहां उनका दैनिक घाटा 1000 करोड़ रुपये से घटकर 750 करोड़ रुपये प्रतिदिन पर आ गया है। लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि खुदरा कीमतों और बाजार की वास्तविक कीमतों में अब भी बड़ा अंतर है। ईंधन की इस बढ़ोतरी का सीधा असर खुदरा महंगाई दर पर पड़ेगा। आर्थिक जानकारों के अनुसार, पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 3 से 5 फीसदी की वृद्धि से मुख्य महंगाई दर में 15 से 25 बेसिस पॉइंट का इजाफा हो सकता है। इससे माल ढुलाई महंगी होगी और रोजमर्रा की जरूरत की चीजें जैसे सब्जी और राशन भी महंगे हो जाएंगे। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है, ऐसे में आने वाले दिनों में भी छोटे-छोटे बदलाव देखने को मिल सकते हैं। सतीश मोरे/23मई ---