23-May-2026
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- तेज रफ्तार, हेलमेट न पहनना, ओवरलोडिंग बनी वजह भोपाल (ईएमएस)। मध्य प्रदेश की सडक़ें अब हादसों के लिए कुख्यात होती जा रही हैं। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो की 2024 की रिपोर्ट के मुताबिक, सडक़ दुर्घटनाओं के मामलों में मध्य प्रदेश पूरे देश में दूसरे स्थान पर पहुंच गया है। प्रदेश में पूरे वर्ष 55,711 सडक़ दुर्घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें 16,831 लोगों ने अपनी जान गंवाई। तेज रफ्तार, हेलमेट न पहनना, ओवरलोडिंग और ट्रैफिक नियमों की धज्जियां उड़ाना इन हादसों की मुख्य वजह बन गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि सख्त चालान, नियमित जागरूकता अभियान, बेहतर रोड इंजीनियरिंग और कैमरा निगरानी बढ़ाने से हादसों में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है। एडिशनल डीसीपी ट्रैफिक बसंत कौल के अनुसार, ओवरस्पीडिंग सबसे बड़ी वजह है, जिससे 31,554 दुर्घटनाएं हुईं और 8,429 लोगों की मौत हुई। यह आंकड़े चेतावनी देते हैं कि अगर समय रहते जागरूकता और सख्ती नहीं बरती गई तो सडक़ें और खतरनाक होती जाएंगी। राष्ट्रीय राजमार्गों पर 4,711 मौतें हुईं। तेज रफ्तार के साथ ड्रंक ड्राइविंग और मोबाइल फोन पर बात करना भी बड़ी वजह है। आम नागरिकों को भी नियमों का पालन करना चाहिए, क्योंकि एक छोटी लापरवाही पूरे परिवार को तबाह कर सकती है। ब्लैक स्पॉट्स पर रोजाना हादसे राजधानी भोपाल समेत पूरे प्रदेश में ब्लैक स्पॉट्स पर रोजाना हादसे हो रहे हैं, लेकिन जागरूकता और सख्ती दोनों का अभाव साफ नजर आ रहा है। एनसीआरबी रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि दोपहिया वाहन चालकों की मौत के 75 प्रतिशत मामलों में पीडि़तों ने हेलमेट नहीं पहना था। यानी हर चार में से तीन मौतें सिर्फ एक साधारण सी लापरवाही की वजह से हो रही हैं। ये आंकड़े सिर्फ संख्या नहीं, बल्कि परिवारों के टूटने की कहानियां हैं। हर दिन सडक़ों पर लापरवाही करते युवा, परिवार और मजदूर अपनी और दूसरों की जिंदगी दांव पर लगा रहे हैं। भोपाल जैसे शहरों में 20 प्रतिशत बढ़े हादसों ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। 16 ब्लैक स्पॉट चिन्हित किए गए हैं, जहां खराब रोड इंजीनियरिंग, तेज रफ्तार और नियमों की अनदेखी हादसों को न्योता दे रही है। सडक़ हादसों की मुख्य वजहें हैं - तेज रफ्तार, हेलमेट न लगाना, ओवरलोडिंग, खराब सडक़ें और जागरूकता की कमी इसे और खतरनाक कर रही है। भोपाल की स्थिति चिंताजनक एनसीआरबी के अनुसार वर्ष 2024 में मध्य प्रदेश में 55,711 सडक़ दुर्घटनाएं हुईं, जबकि मौत के मामलों में 16,831 लोगों ने जान गवाई। तमिलनाडु के बाद एमपी दुर्घटनाओं में दूसरे स्थान पर है। दोपहिया वाहन चालकों की मौत के 75 प्रतिशत मामलों में हेलमेट नहीं था। राजधानी भोपाल में 2024 में सडक़ हादसों में मौत के मामलों में करीब 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। मिसरोद, करोंद चौराहा, प्रभात चौराहा और खजूरी जैसे 16 ब्लैक स्पॉट चिन्हित किए गए हैं। खराब रोड डिजाइन और ट्रैफिक मैनेजमेंट की कमी यहां हादसों को बढ़ावा दे रही है। विनोद/ 23 मई /2026