* हिन्दी में मौलिक लेखन और अनुवाद को मिलेगा प्रोत्साहन, विभिन्न विषयों पर आमंत्रित की गई प्रविष्टियाँ गांधीनगर (ईएमएस)| भारत सरकार के गृह मंत्रालय के राजभाषा विभाग द्वारा सरकारी कामकाज में हिंदी भाषा के प्रयोग को बढ़ावा देने तथा ज्ञान-विज्ञान के विविध विषयों पर हिंदी में मौलिक लेखन को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से वर्ष 2025-26 से संशोधित “राजभाषा गौरव पुरस्कार योजना” लागू की गई है। इस योजना के अंतर्गत भारत के नागरिकों से विभिन्न विषयों पर हिंदी में लिखी गई मौलिक पुस्तकों तथा अन्य भारतीय भाषाओं एवं अंग्रेजी से हिंदी में किए गए उत्कृष्ट अनुवादों की प्रविष्टियां आमंत्रित की गई हैं। हिंदी साहित्य को समृद्ध बनाने की पहल केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों, विभागों और बैंकों आदि में तकनीकी, विज्ञान, कानून, संस्कृति एवं विरासत जैसे विषयों पर हिंदी पुस्तकों की उपलब्धता बढ़ाने तथा हिंदी साहित्य को समृद्ध बनाने के उद्देश्य से यह योजना प्रारंभ की गई है। योजना का उद्देश्य विशेष रूप से गैर-हिंदी भाषी क्षेत्रों के लेखकों को प्रोत्साहित करना तथा भारतीय भाषाओं के बीच समन्वय को बढ़ावा देना है। पांच प्रमुख श्रेणियों में दिए जाएंगे पुरस्कार योजना के अंतर्गत निम्नलिखित पांच श्रेणियों में पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे - 1. विज्ञान एवं तकनीकी क्षेत्र (श्रेणी ‘क’) इस श्रेणी में इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, कंप्यूटर विज्ञान, भौतिकी, जीवविज्ञान, ऊर्जा, अंतरिक्ष विज्ञान, चिकित्सा विज्ञान, रसायन विज्ञान, सूचना प्रौद्योगिकी, प्रबंधन, मनोविज्ञान तथा समकालीन विषय जैसे उदारीकरण, वैश्वीकरण, उपभोक्तावाद, मानवाधिकार, प्रदूषण एवं पर्यावरण आदि विषय शामिल किए गए हैं। 2. कानून एवं सुरक्षा क्षेत्र (श्रेणी ‘ख’) इसमें कानून, पुलिस अनुसंधान, फॉरेंसिक साइंस, अपराधशास्त्र तथा पुलिस प्रशासन से संबंधित पुस्तकों को शामिल किया गया है। 3. संस्कृति एवं कला क्षेत्र (श्रेणी ‘ग’) इस श्रेणी में संस्कृति, धर्म, कला तथा विरासत विषयों पर आधारित पुस्तकों को पुरस्कृत किया जाएगा। साथ ही इस क्षेत्र के लेखकों के लिए विशेष पुरस्कार की भी व्यवस्था की गई है। 4. गैर-हिंदी भाषी राज्यों के लेखकों हेतु विशेष श्रेणी (श्रेणी ‘घ’) पूर्वोत्तर के आठ राज्यों तथा गुजरात को छोड़कर दक्षिण और अन्य गैर-हिंदी भाषी राज्यों जैसे केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, गोवा, जम्मू-कश्मीर, ओडिशा और पश्चिम बंगाल आदि क्षेत्रों के ऐसे लेखक, जिनकी मातृभाषा हिंदी नहीं है, इस श्रेणी में भाग ले सकेंगे। 5. अनुवादित पुस्तकों के लिए पुरस्कार (श्रेणी ‘ङ’) अंग्रेजी अथवा अन्य मान्यता प्राप्त भारतीय भाषाओं से हिंदी में अनूदित कालजयी साहित्य, संस्कृति, कला एवं विरासत से संबंधित उत्कृष्ट पुस्तकों को इस श्रेणी में सम्मानित किया जाएगा। पुरस्कार राशि और सम्मान श्रेणी ‘क’ के लिए प्रथम पुरस्कार – रु. 2,00,000 द्वितीय पुरस्कार – रु. 1,25,000 तृतीय पुरस्कार – रु. 75,000 तीन प्रोत्साहन पुरस्कार – प्रत्येक रु. 40,000 श्रेणी ‘ख’, ‘ग’, ‘घ’ और ‘ङ’ के लिए प्रथम पुरस्कार – रु. 1,50,000 द्वितीय पुरस्कार – रु. 1,00,000 दो प्रोत्साहन पुरस्कार – प्रत्येक रु. 40,000 सभी पुरस्कारों के साथ प्रमाणपत्र और स्मृति चिह्न भी प्रदान किए जाएंगे। पात्रता की प्रमुख शर्तें योजना का लाभ लेने के लिए लेखक, सह-लेखक या अनुवादक का भारतीय नागरिक होना अनिवार्य है। पुस्तक संबंधित वर्ष के दौरान 1 जनवरी से 31 दिसंबर के बीच प्रकाशित होनी चाहिए तथा उसमें कम से कम 100 पृष्ठ होने आवश्यक हैं। पुस्तक का आईएसबीएन होना भी अनिवार्य किया गया है। पुस्तक की विषयवस्तु विश्लेषणात्मक और समीक्षात्मक होनी चाहिए। हालांकि पीएचडी शोधप्रबंध, कविता, उपन्यास, कहानी, नाटक, आत्मकथा तथा पाठ्यपुस्तकों को इस योजना के लिए पात्र नहीं माना जाएगा। इसके अतिरिक्त, पहले से किसी सरकारी संस्था द्वारा पुरस्कृत पुस्तकें भी इस योजना में शामिल नहीं हो सकेंगी। आवेदन प्रक्रिया इच्छुक लेखक और अनुवादक राजभाषा विभाग द्वारा निर्धारित आवेदन पत्र भरकर पुस्तक की चार प्रतियों के साथ निर्धारित समयसीमा में राजभाषा विभाग को भेज सकेंगे। एक लेखक अथवा अनुवादक केवल एक ही प्रविष्टि भेज सकता है। योजना से संबंधित विस्तृत जानकारी और आवेदन पत्र राजभाषा विभाग की आधिकारिक वेबसाइट से प्राप्त किए जा सकते हैं। सतीश/23 मई