श्रीमद्भागवत कथा का पूर्णाहुति के साथ हुआ भाव-विभोर विश्राम श्रीकृष्ण सुदामा का हुआ चित्रण। शाजापुर (ईएमएस)। संसार की सबसे पवित्र और पावन मित्रता भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की थी। मित्रता की मर्यादा में सुदामा ने कभी कुछ मांगा नहीं और श्रीकृष्ण ने बिना मांगे अपने मित्र को ऐसा यशस्वी बना दिया, जिसका दूसरा उदाहरण आज भी संसार में मिलना मुश्किल है। आज भी जब हम सुदामा की तरह निश्छल होकर करुण पुकार लगाते हैं तो श्रीकृष्ण दौड़े चले आते हैं। उक्त आशीर्वचन महंत 1008 अनुजदास महाराज ने सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव के विश्राम दिवस पर उपस्थित जनों को प्रदान किए। उल्लेखनीय है कि श्री नित्येश्वर महादेव भागवत कथा समिति एवं सूर्या ग्रूप के तत्वावधान में आयोजित सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव की पूर्णाहुति गुरुवार को श्रीकृष्ण-सुदामा प्रसंग के साथ हुई। इस अवसर पर महंत श्री द्वारा मित्रता की अत्यंत सुंदर व्याख्या की वहीं श्रीकृष्ण और सुदामा के पात्र बने कलाकारों ने जीवंत झांकी का प्रदर्शन करते हुए उक्त प्रसंग को अविस्मरणीय बना दिया, जिसे देखकर उपस्थितजन भी भाव-विभोर हुए बिना नहीं रह पाए। पूर्णाहुति के पश्चात विशाल भंडारे का आयोजन कथा परिसर में किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में मातृशक्ति एवं नगरवासी उपस्थित रहे। ईएमएस/राजेश कलजोरिया/ 23 मई 2026