राज्य
25-May-2026
...


कोरबा (ईएमएस) कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) देश में गैस सप्लाई की अनिश्चितता को देखते हुए सिंथेटिक गैस परियोजना पर काम शुरू कर रही है। इससे ऊर्जा क्षेत्र में कोल इंडिया की भूमिका और बढ़ सकती है। सीआईएल-पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण गैस आपूर्ति में आ रही बाधाओं के बीच कोयले से सिनगैस उत्पादन इकाइयां स्थापित करने की तैयारी कर रही है। हालांकि यह गैस घरेलू इस्तेमाल के लिए नहीं, बल्कि इंडस्ट्रीज के लिए होगी। सिनगैस मुख्यतः कार्बन मोनोऑक्साइड और हाइड्रोजन का मिश्रण होता है। इसे कोयला, प्राकृतिक गैस या बायोमास से बनाया जाता है और इसका उपयोग बिजली, उर्वरक व ईंधन बनाने में होता है। बताया गया है कि कोल इंडिया द्वारा इन संयंत्रों को या तो कोयला खदानों के पास (पिटहेड) लगाया जाएगा या फिर उर्वरक संयंत्रों, गैस आधारित बिजलीघरों तथा डायरेक्ट-रिड्यूस्ड आयरन (डीआरआई) इकाइयों जैसे औद्योगिक उपभोक्ताओं के आसपास स्थापना की जाएगी। कोल इंडिया ने इस दिशा में शुरुआती कदम भी उठा दिए हैं। यह पहल राष्ट्रीय कोयला गैसीकरण मिशन और रसायन तथा कच्चे माल की सुरक्षा को मजबूत करने की सरकारी रणनीति के अनुरूप मानी जा रही है। कोल इंडिया ने संभावित बोलीदाताओं की पहचान के लिए रुचि पत्र (ईओआई) भी जारी किए हैं। इसके तहत कंपनी ने दो मॉडल प्रस्तावित किए हैं। पहले मॉडल के अंतर्गत कोल इंडिया की खदानों के क्षेत्रों में सिनगैस उत्पादन इकाइयां स्थापित की जाएंगी, जहां से आसपास के औद्योगिक संकुलों को पाइपलाइन नेटवर्क के जरिये गैस की आपूर्ति होगी। इसका उद्देश्य कोयले के परिवहन पर आने वाली लागत को कम करना और उद्योगों को सस्ती दर पर सिनगैस उपलब्ध कराना है। दूसरे मॉडल में सिनगैस उत्पादन इकाइयों को किसी गैस आधारित बिजलीघर, डीआरआई संयंत्र, उर्वरक इकाई या बड़े औद्योगिक उपभोक्ता के ठीक पास स्थापित किया जाएगा। इससे संचालन दक्षता और आपूर्ति की विश्वसनीयता बढ़ाने में मदद मिलेगी। कंपनी का मानना है कि इस व्यवस्था से अंतिम उपभोक्ता को निर्बाध सिनगैस आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी। कोल इंडिया संभावित औद्योगिक ग्राहकों की भी तलाश कर रही है, जो दीर्घकालिक समझौतों के तहत सिनगैस को ईंधन या कच्चे माल के रूप में उपयोग कर सकें। इसके लिए कंपनी ने बाजार की रुचि, आपूर्ति मॉडल और व्यावसायिक अपेक्षाओं का आकलन करने को अलग से ईओआई जारी किया है। 25 मई / मित्तल