अलीगढ़ (ईएमएस) । उत्तर प्रदेश शासन के उच्च शिक्षा विभाग के सचिव अमृत त्रिपाठी ने सोमवार को राजा महेंद्र प्रताप सिंह विश्वविद्यालय परिसर का विस्तृत निरीक्षण किया। इस दौरान जिलाधिकारी अविनाश कुमार भी उनके साथ मौजूद रहे। निरीक्षण के समय कुलपति नरेंद्र बहादुर सिंह, मुख्य विकास अधिकारी योगेंद्र कुमार, रजिस्ट्रार प्रबुद्ध सिंह, मुख्य अभियंता भवन निर्माण सीपी गुप्ता, मुख्य अभियंता पीएमजीएसवाई लालजी यादव, अधीक्षण अभियंता पीएमजीएसवाई हरित, अधीक्षण अभियंता लोनिवि प्रभात कुमार चैधरी, अधिशासी अभियंता निर्माण खण्ड ए0के0 राही, परीक्षा नियंत्रक डॉ. धीरेंद्र कुमार, मुख्य अग्निशमन अधिकारी मुकेश कुमार सहित लोक निर्माण विभाग एवं कार्यदायी संस्था के अधिकारी उपस्थित रहे। सचिव उच्च शिक्षा एवं जिलाधिकारी ने विश्वविद्यालय परिसर, प्रशासनिक भवन, पुस्तकालय, शैक्षणिक ब्लॉक, छात्रावास, सुविधा केंद्र, विद्युत उपकेंद्र, आंतरिक सड़कों एवं अन्य अधोसंरचनात्मक व्यवस्थाओं का बड़ी बारीकी से निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, फिनिशिंग, विद्युत एवं जल निकासी व्यवस्था, फायर सेफ्टी सिस्टम, साफ-सफाई, साइनेजिंग एवं अन्य व्यवस्थाओं की गहन समीक्षा की। निरीक्षण के दौरान कुलपति नरेंद्र बहादुर सिंह द्वारा विश्वविद्यालय संचालन से संबंधित आवश्यकताओं एवं कुछ शेष कमियों की जानकारी भी दी गई। सचिव उच्च शिक्षा एवं जिलाधिकारी ने मौके पर कई तकनीकी एवं व्यवस्थागत कमियों को चिन्हित करते हुए संबंधित अधिकारियों एवं कार्यदायी संस्था को निर्देश दिए कि बताए गए सभी कार्य निर्धारित समयावधि में मानकों के अनुरूप एवं गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूर्ण कराए जाएं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसी भी स्तर पर गुणवत्ता से समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा और विश्वविद्यालय संचालन से पूर्व सभी व्यवस्थाएं पूरी तरह सुव्यवस्थित होनी चाहिए। बैठक के दौरान मुख्य अभियंता भवन निर्माण सीपी गुप्ता ने परियोजना की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि विश्वविद्यालय का निर्माण कार्य प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में शामिल है। लगभग 100.351 एकड़ क्षेत्रफल में विकसित इस परिसर में प्रशासनिक एवं पुस्तकालय भवन, दो शैक्षणिक भवन, छात्र एवं छात्रा छात्रावास, सुविधा केंद्र, कुलपति आवास, आवासीय परिसर, स्वास्थ्य केंद्र, बैंकिंग सुविधा, कैफेटेरिया, जिम्नेजियम एवं पुलिस चैकी जैसी आधुनिक सुविधाएं विकसित की गई हैं। उन्होंने बताया कि परियोजना की संशोधित लागत लगभग 106.59 करोड़ रुपये है और वर्तमान में भौतिक प्रगति 100 प्रतिशत एवं वित्तीय प्रगति लगभग 99.86 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। परिसर में लगभग 20 आधुनिक कक्षाओं की व्यवस्था की गई है, जिनकी क्षमता करीब 1360 विद्यार्थियों की है। इसके अतिरिक्त प्रयोगशालाएं, सेमिनार हॉल एवं विभागीय पुस्तकालय भी विकसित किए गए हैं। ईएमएस / 25/05/2026