नई दिल्ली (ईएमएस)। आज की तेज रफ्तार और तनावभरी जिंदगी में योग केवल शारीरिक फिटनेस का माध्यम नहीं, बल्कि मानसिक शांति, भावनात्मक संतुलन और आत्मिक स्थिरता का भी महत्वपूर्ण साधन बन चुका है। अगले महीने 21 जून को मनाए जाने वाले अंतरराष्ट्रीय योग दिवस से पहले मंत्रालय लगातार लोगों को योग के महत्व के प्रति जागरूक कर रहा है। आयुष मंत्रालय के अनुसार, आधुनिक जीवनशैली में मानसिक तनाव, भागदौड़ और लगातार बढ़ते दबाव के कारण लोगों के लिए संतुलित जीवन जीना कठिन होता जा रहा है। ऐसे समय में योग व्यक्ति को भीतर से शांत रहने और जीवन को बेहतर ढंग से समझने की शक्ति देता है। मंत्रालय ने कहा कि योग केवल शरीर की गतिविधियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मन को शांत करता है, सोच को सकारात्मक बनाता है और व्यक्ति के भीतर करुणा तथा आत्मविश्वास विकसित करता है। योग के नियमित अभ्यास से व्यक्ति अपने जीवन में स्थिरता और संतुलन महसूस करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब व्यक्ति अपने भीतर शांति महसूस करता है, तभी वह अपने आसपास भी सकारात्मक वातावरण बना पाता है। आज की दुनिया शोर, तनाव और त्वरित प्रतिक्रियाओं से भरी हुई है, जहां योग व्यक्ति को ठहरकर सोचने और संयमित रहने की सीख देता है। हर गहरी और सचेत सांस व्यक्ति को मानसिक रूप से मजबूत बनाती है तथा सामूहिक भलाई की दिशा में प्रेरित करती है। योग विशेषज्ञों ने लोगों से आग्रह किया है कि वे रोजमर्रा की जिंदगी में छोटे-छोटे योग अभ्यास शामिल करें। चाहे सूर्य नमस्कार हो, प्राणायाम हो या ध्यान, नियमित अभ्यास शरीर और मन दोनों को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करता है। योग से न केवल शारीरिक क्षमता बेहतर होती है, बल्कि मानसिक तनाव कम होता है और भावनात्मक संतुलन भी मजबूत होता है। मंत्रालय का कहना है कि योग व्यक्ति को अपनी भावनाओं और प्रतिक्रियाओं पर नियंत्रण रखना सिखाता है। शांत मन से लिए गए फैसले अधिक प्रभावी होते हैं और व्यक्ति दूसरों के प्रति ज्यादा संवेदनशील बनता है। यही वजह है कि योग दिवस केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि रोजाना शांति और संतुलन को अपनाने का संदेश भी है। विशेषज्ञों के मुताबिक, योग की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे किसी भी उम्र का व्यक्ति कहीं भी आसानी से कर सकता है। सुदामा/ईएमएस 26 मई 2026