राष्ट्रीय
26-May-2026
...


नई दिल्ली (ईएमएस)। भारतीय योग परंपरा में ‘मलासन’ एक महत्वपूर्ण योगासन है। इस आसन को शरीर के निचले हिस्से को मजबूत बनाने और पाचन तंत्र को सक्रिय करने वाला बेहद लाभकारी आसन माना जाता है। यह आसन सांसों और शरीर के बीच तालमेल स्थापित करने में भी मदद करता है। नियमित रूप से मलासन का अभ्यास करने से शरीर में लचीलापन बढ़ता है, रीढ़ की हड्डी मजबूत होती है। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने भी मलासन के महत्व और इसके सही अभ्यास को लेकर जानकारी साझा की है। मंत्रालय के अनुसार यह एक स्क्वाट मुद्रा वाला योगासन है, जिसमें व्यक्ति घुटनों को मोड़कर और कूल्हों को नीचे की ओर लाकर बैठता है। इस आसन को करने के लिए सबसे पहले पैरों को कंधों की चौड़ाई तक फैलाया जाता है और फिर धीरे-धीरे स्क्वाट की स्थिति में आना होता है। शरीर को संतुलित रखते हुए इस मुद्रा में कुछ समय तक स्थिर रहना चाहिए। विशेषज्ञों के मुताबिक मलासन का अभ्यास सुबह खाली पेट करना सबसे अधिक फायदेमंद माना जाता है, क्योंकि इससे पाचन तंत्र सक्रिय होता है और शरीर में ऊर्जा का प्रवाह बेहतर होता है। योग विशेषज्ञों का मानना है कि मलासन केवल शारीरिक लाभ ही नहीं देता, बल्कि मानसिक रूप से भी व्यक्ति को स्थिर और एकाग्र बनाता है। यह आसन मूलाधार चक्र को सक्रिय करने में सहायक माना जाता है, जिससे मन में सुरक्षा, संतुलन और जागरूकता की भावना विकसित होती है। लंबे समय तक बैठकर काम करने वाले लोगों के लिए यह आसन विशेष रूप से लाभकारी बताया जाता है, क्योंकि यह शरीर में होने वाली जकड़न और अकड़न को कम करने में मदद करता है। शारीरिक दृष्टि से देखें तो मलासन नितंब, जांघ, पिंडलियों और कूल्हों की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है। इसके साथ ही यह कमर, पीठ के निचले हिस्से और टखनों में खिंचाव लाकर लचीलापन बढ़ाता है। गर्भवती महिलाओं के लिए भी इसे पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों को मजबूत करने वाला उपयोगी योगासन माना गया है। हालांकि विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि गर्भावस्था के दौरान इसका अभ्यास डॉक्टर की सलाह के बाद ही करना चाहिए। हालांकि कुछ लोगों को इस आसन से बचने की भी सलाह दी जाती है। जिन लोगों को घुटनों, टखनों या पीठ के निचले हिस्से में गंभीर दर्द की समस्या हो, उन्हें यह आसन नहीं करना चाहिए। सुदामा/ईएमएस 26 मई 2026