➡️ *सिंघोला-खुर्सीपार सड़क से लेकर सिंगारपुर-मेंढा रोड तक बदहाल व्यवस्था, अधिकारियों की गैरमौजूदगी और अधूरे कार्यों पर ग्रामीणों में भारी नाराजगी* *➡️ ब्लॉक मुख्यालयों में होता समाधान तो शिविर की आवश्यकता ही नहीं पड़ती* *➡️ छोटे कर्मचारियो के भरोसे सुशासन तिहार* राजनांदगांव (ईएमएस)। सोनेसरार ग्राम पंचायत में आयोजित सुशासन तिहार शिविर में सड़क, पेयजल और अधूरे निर्माण कार्यों को लेकर जिला पंचायत सदस्य श्रीमती विभा साहू का आक्रोश खुलकर सामने आया। शिविर में उपस्थित श्रीमती विभा साहू ने प्रधानमंत्री सड़क, मुख्यमंत्री सड़क, लोक निर्माण विभाग (PWD) तथा पीएचई विभाग के अधिकारियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि कार्यो की स्वीकृति होने व टेंडर होने के बाद भी सिंघोला खुर्सीपार सड़क कार्य शुरू नहीं हो पाया है। श्रीमती साहू ने कहा सिंघोला से खुर्सीपार तक 17 किलोमीटर सड़क निर्माण की घोषणा वर्ष 2025 में भानेश्वरी जयंती कार्यक्रम के दौरान छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री अरुण साव द्वारा की गई थी। उस समय संबंधित विभागीय अधिकारी भी मौजूद थे, लेकिन घोषणा के एक वर्ष बाद भी सड़क निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है। जिले के लोक निर्माण विभाग द्वारा इस सड़क को पेच का कार्य, मरम्मत कार्य व कहीं चौड़ीकरण के लिए भाग- भाग में बजट में शामिल करवाया जा रहा है। सड़क की जर्जर हालत से जनता बेहद परेशान है और लगातार नाराजगी बढ़ती जा रही है । सुशासन तिहार में मौजूद पीडब्ल्यूडी विभाग के अधिकारियों से श्रीमती साहू ने तीखे सवाल पूछे। विभाग के ईई चौरसिया जी और एसडीओ जैसे जिम्मेदार अधिकारी शिविर से नदारद रहे, जबकि सब इंजीनियर उपस्थित थे। उन्होंने आरोप लगाया कि जिला स्तर पर सुशासन तिहार आयोजित करने का कोई औचित्य नहीं है। सुशासन तिहार में प्राप्त आवेदनों का निराकरण अधिकारियो द्वारा केवल जवाब देकर किया जाता है लेकिन धरातल पर कोई निराकरण नहीं होता है। क्योंकि वास्तविक कार्य ब्लॉक स्तर के अधिकारियों को करना होता तो इतनी बड़ी संख्या में लोग आवेदन नहीं देते। सिंगारपुर-मेंढा रोड निर्माण को लेकर भी गंभीर लापरवाही सामने आई। यह सड़क पहले ठेकेदार संजय सिंग्गी को दी गई थी, लेकिन वह निर्माण पूरा नहीं कर पाए। इसके बावजूद पीडब्ल्यूडी विभाग ने दोबारा उसी ठेकेदार को कार्य सौंप दिया। 18 फरवरी 2026 को सिंघोला-खुर्सीपार रोड का फिर से टेंडर जारी किया गया, लेकिन तीन महीने बीत जाने के बाद भी 0.60 किलोमीटर और 17 वॉं 1 किलोमीटर सड़क में कोई कार्य शुरू नहीं हुआ है इस लापरवाही पर श्रीमती विभा साहू ने कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने बताया कि सिंगारपुर-मेंढा रोड की स्थिति को लेकर एक माह पूर्व कलेक्टर एवं मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा गया था, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।मेंढा-सोनेसरार मार्ग पर सेतु निगम द्वारा बनाए गए पुल का एप्रोच रोड पूरी तरह गड्ढों में तब्दील हो चुका है। स्थिति इतनी खराब है कि वहां मोटरसाइकिल चलाना तो दूर, पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि पुल निर्माण के बाद आज तक वहां किसी प्रकार का मरम्मत कार्य नहीं कराया गया। जब इस संबंध में अधिकारियों से सवाल किया गया तो उन्होंने सिर्फ देख लेते हैं कहकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया। इस पर श्रीमती साहू ने नाराजगी जताते हुए कहा कि जब अधिकारी इसी ब्लॉक के जिम्मेदार हैं तो उन्हें यह तक जानकारी नहीं कि क्षेत्र में कितनी प्रधानमंत्री सड़कें और मुख्यमंत्री सड़कें हैं, कौन-कौन सी सड़कें जर्जर हो चुकी हैं और किन्हें मरम्मत एवं नवीनीकरण की जरूरत है। सुशासन तिहार में पीएचई विभाग के अधिकारियों से श्रीमती साहू ने कहा कि पिछले चार बार से पीएचई अधिकारी नवीन गजभिए को बुलाकर सोनेसरार के पाइप के बारे में पूछा गया लेकिन हर बार पाइप आ रही कहकर मामला टाल दिया गया। आज स्थिति यह है कि गांव में पेयजल संकट गहराता जा रहा है मोहभट्टा के ग्रामीणजन एक ही हैंडपंप से पानी पीने को मजबूर हैं। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि पुराने टेंडर निरस्त कर दिए गए हैं और नए टेंडर सोमवार को जारी किए जाएंगे। इस पर श्रीमति साहू ने सवाल उठाया कि पूरी गर्मी बीत जाने के बाद अब टेंडर निकालने का क्या औचित्य है, जब लोग महीनों से पानी के लिए भटक रहे हैं। क्षेत्र के कई गांवों में पानी टंकियां तो बना दी गईं, लेकिन पाइपलाइन विस्तार नहीं होने के कारण वे आज भी बंद पड़ी हैं। कई टंकियां जर्जर हालत में पहुंच चुकी हैं और ग्रामीणों को पानी के लिए भटकना पड़ रहा है। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद योजनाओं का लाभ जनता तक नहीं पहुंच पा रहा है।श्रीमति साहू ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में किसान नामान्तर, खाता विभाजन, बटांकन, सीमांकन आदि के लिए पटवारी के चक्करलगते रहते है। सड़क, पानी और मूलभूत सुविधाओं की स्थिति बेहद खराब है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी और विभागीय अमला अपनी जिम्मेदारियों से बचते नजर आ रहे हैं। जनता अब जवाब चाहती है और आने वाले समय में आंदोलन के लिए भी मजबूर हो सकती है। ईएमएस/मोहने/ 26 मई 2026