:: अतिक्रमणकारियों पर गिरेगी गाज : तालाबों की चैनल लाइनों से हर हाल में हटेंगे अवरोध; प्रशासन का अल्टीमेटम– मानसून से पहले साफ हों पानी के सभी रास्ते, ताकि शहर में बढ़े वाटर लेवल :: इंदौर (ईएमएस)। इंदौर के पारंपरिक जलस्रोतों को पुनर्जीवित करने और इस मानसून में शहर की प्यास बुझाने वाले तालाबों को लबालब भरने के लिए जिला और निगम प्रशासन ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। प्रदेशव्यापी जल गंगा संवर्धन अभियान को गति देने के लिए खुद कलेक्टर शिवम वर्मा और नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल ने कमान संभाल ली है। दोनों शीर्ष अधिकारियों ने संयुक्त रूप से ऐतिहासिक सिरपुर और लिंबोदी तालाबों का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने जल संरक्षण और तालाबों के जीर्णोद्धार के लिए चल रहे कार्यों की जमीनी हकीकत देखी और दोटूक शब्दों में कहा कि तैयारियों में किसी भी स्तर पर कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। निरीक्षण के दौरान कलेक्टर एवं कमिश्नर ने तालाबों में पानी लाने वाले मुख्य रास्तों (कैचमेंट एरिया) और फीडर चैनल लाइनों का बारीकी से मुआयना किया। उन्होंने मैदानी अमले को कड़े लहजे में निर्देश दिए कि जल आवक मार्ग में आने वाले सभी तरह के अवरोधों, झाड़ियों और मलबे को तत्काल साफ किया जाए। इसके साथ ही कलेक्टर और कमिश्नर ने भू-माफियाओं और अतिक्रमणकारियों को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि तालाब की जमीन या फीडर चैनलों पर किए गए किसी भी तरह के अवैध निर्माण को चिन्हित कर तत्काल बुलडोजर चलाने की कार्रवाई की जाए, ताकि वर्षा जल बिना किसी रुकावट के सीधे तालाबों तक पहुंच सके। :: पांच तालाबों की चैनल साफ, बाकी पर काम युद्धस्तर पर :: नगर निगम प्रशासन ने इस महाअभियान के तहत अब तक की अपनी बड़ी कामयाबी साझा करते हुए बताया कि शहर के केलोद करताल, मोरोद माचला, निपानिया, भंवरासाला और रेवती रेंज तालाबों की फीडर चैनलों की सफाई का काम सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। वर्तमान में सिरपुर, बिलावली और लिंबोदी तालाब सहित अन्य प्रमुख जलस्रोतों की इनलेट चैनलों पर गाद निकालने और सुधार का कार्य चौबीसों घंटे युद्धस्तर पर जारी है। :: पहली फुहार से पहले मुकम्मल हों तैयारियां :: जिला और निगम प्रशासन का संयुक्त लक्ष्य है कि आगामी वर्षा ऋतु की पहली फुहार से पहले शहर के सभी मुख्य चैनलों को पूरी तरह साफ और अवरोध मुक्त कर दिया जाए, जिससे इस साल इंदौर के तालाबों में रिकॉर्ड जल संग्रहण सुनिश्चित किया जा सके और तेजी से गिरते भूजल स्तर को सुधारा जा सके। प्रकाश/26 मई 2026