क्षेत्रीय
27-May-2026
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- गिनती की रह गईं मेट्रो बसें, महंगा पेट्रोल फूंकना लोगों की मजबूरी जबलपुर (ईएमएस)। अमेरिका और ईरान युद्ध के बाद से पेट्रोलियम पदार्थ में लगी आग के चलते हाल ही में प्रधानमंत्री ने लोगों से अधिकाधिक सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने की गुजा‎रिश की है । प्रदेश के अन्य दो बडे शहर भोपाल और इंदौर तो इस मामले में धनी हैं जहां नगर बस सेवा शहर के लगभग हर इलाके के लिए उपलब्ध है और पर्याप्त संख्या में उपलब्ध हैं। यही नहीं अब इन दोनों शहरों में मेट्रो ट्रेनें भी चल पडी हैं। इसलिए पीएम की अपील पर उक्त शहर के नागरिक तो सौ फीसद अमल कर सकते हैं परंतु जबलपुर शहर इन सेवाओं के मामले में अब त‎क दरिद्र है। यहां अब भी लोग मंहगे होते पेट्रोल की मार झेलने मजबूर हैं। वैसे तो इस शहर में मेट्रो बसें निम्न और मध्यम आय वर्गीय परिवारों के लिए बड़ा सहारा हैं। खासकर बुजुर्ग, छात्र और महिलाएं इस पर ज्यादा आश्रित हैं, लेकिन हकीकत यह है कि इस समय शहर के कई अंदरूनी मार्गो पर मेट्रो बसें चल ही नहीं रही हैं। जिन प्रमुख मार्गो पर चल रही हैं तो वहां भी गिनती की। शहर के नागरिकों के मुताबिक मदन महल-दमोहनाका फ्लाईओवर के निर्माण की आड़ में कई मेट्रो बसें बंद कर दी गई जो अब तक दोबारा आरंभ नहीं हो सकीं। जनता की मांग पर जेसीटीएसएल के अफसरों ने वादा किया था कि इन बसों को जल्द शुरू किया जाएगा, लेकिन जनता के हाथ अभी भी खाली हैं। हालांकि पिछले लगभग चार साल से ‎जिम्मेदारों द्वारा जब तब शहर में ई-बसें चलाए जाने का सब्जबाग ‎दिखाया जाता रहा है परंतु अब तक एक भी ई बस यहां नहीं उतर सकी। अब एक बार पुन: इनके जुलाई के प्रथम सप्ताह से संचालन की बात की जा रही है। गौरतलब हो कि फ्लाईओवर बनने के डेढ़ साल बाद भी कई स्थानों पर बसें शुरू नहीं हो पाई हैं। इससे सबसे ज्यादा बुजुर्ग और महिलाएं प्रभावित हैं। उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। धूप और गर्मी के बीच उन्हें ज्यादा और मनमाना किराया चुकाकर ई-रिक्शों और ऑटो आदि में सफर करना पड़ रहा है। प्रबुद्ध नागरिकों का कहना है कि खाली रूटों पर बंद की गई बसों को जल्द प्रारंभ किया जाना चाहिए। सूत्रों के मुताबिक जबलपुर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेज लिमिटेड के माध्यम से पूर्व में शहर में 55 बड़ी और 60 छोटी मेट्रो बसों का संचालन किया जाता था। इनमें छोटी मेट्रो बसें कॉलोनियों के अंदरूनी मुख्य मार्गों पर भी चलती थीं, जो निम्न व मध्यम आय वर्ग के परिवारों के लिए आवागमन का बहुत बड़ा सहारा थीं। एक जानकारी के अनुसार शहर की सड़कों पर वर्तमान में कुल 45 मेट्रो बसों का संचालन किया जा रहा है और इनमें से भी कई जर्जर हालत में चल रही हैं। ऐसे में शहर के कई रूट मेट्रो सेवा से वंचित हैं, जिसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। जुलाई के पहले सप्ताह से चल पडेंगी ई-बसें .................... वैसे हाल ही में एक बार पुन: जबलपुर सिटी ट्रांसपोर्ट के सचिव सचिन विश्वकर्मा ने आगामी जुलाई माह के पहले ही सप्ताह से शहर में 40 ई-बसों के संचालन का भरोसा दिया है। उन्होंने बताया कि पीएम ई-बस योजना के तहत जबलपुर को पहली खेप में 40 बसें जून माह में ही मिल रहीं हैं। इसके बाद द्वितीय चरण में 35 और तृतीय चरण में 25 बसें शहर पहुंचेंगी। ये बसें न केवल आधुनिक तकनीकी सुविधाओं से लैस होंगी। इन रूटों पर मेट्रो बसों का संचालन वर्तमान में शहर के मात्र 9 रूटों पर ही यात्रियों को मेट्रो बस सेवा का लाभ मिल पा रहा है, जिनमें, तीन पत्ती से रांझी, रेलवे स्टेशन से पनागर, रेलवे स्टेशन से भेड़ाघाट, दीनदयाल चौक से बरेला, दमोहनाका से भेड़ाघाट, रेलवे स्टेशन से बरगी, रेलवे स्टेशन से शहपुरा, रेलवे स्टेशन से पाटन व दीनदयाल चौक आईएसबीटी से एयरपोर्ट शामिल हैं। विश्वकर्मा के अनुसार जिन रूटों पर अभी ये बसें नहीं चल रही हैं। ई-बसें मिलने के बाद उन मार्गों को भी बस सेवा से जोड़ दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि इन इलेक्ट्रिक बसों का किराया सामान्य शहर बसों जैसा होगा, जिससे यात्रियों को अधिक भार नहीं पड़ेगा। ई- बसों के आ जाने के बाद जबलपुर में परिवहन व्यवस्था को अधिक स्मार्ट और पर्यावरण के अनुकूल बनाने में मदद मिलेगी। - 27 मई 2026/ 02.52