मुंबई, (ईएमएस)। मुंबई महानगरपालिका में इस बार पहली बार भाजपा ने बहुमत हासिल कर सत्ता स्थापित की है। इसके बाद से महानगरपालिका में भाजपा और महायुति के फैसलों का प्रभाव साफ दिखाई दे रहा है। हालांकि, अब शिवसेना (ठाकरे गुट) के नेता आदित्य ठाकरे के आक्रामक रुख के बाद मनपा के चार महत्वपूर्ण और विवादित प्रस्तावों को फिलहाल पुनर्विचार के लिए प्रशासन के पास वापस भेज दिया गया है। बताया जा रहा है कि इन प्रस्तावों को लेकर आदित्य ठाकरे ने कड़ा विरोध दर्ज कराया था। इसके बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने खुद इस मामले में हस्तक्षेप किया। शिवसेना (ठाकरे गुट) के नेता मिलिंद नार्वेकर ने दावा किया कि आदित्य ठाकरे ने सीधे मुख्यमंत्री फडणवीस से फोन पर बातचीत की थी और प्रस्तावों में मौजूद त्रुटियों की जानकारी दी थी। - कौन-कौन से प्रस्ताव स्थगित हुए? मुंबई महानगरपालिका की सुधार समिति में जिन चार प्रस्तावों को रोककर पुनर्विचार के लिए भेजा गया, उनमें शामिल हैं- * सेवनहिल्स अस्पताल का पीपीपी मॉडल के जरिए निजीकरण * पांच उपनगरीय अस्पतालों की ब्लड बैंक सेवाओं का पीपीपी प्रस्ताव * बांद्रा रिक्लेमेशन क्षेत्र में एग्जिबिशन सेंटर परियोजना * मलबार हिल के ग्रीन जोन में बदलाव का प्रस्ताव इन सभी प्रस्तावों का शिवसेना (ठाकरे गुट) ने जोरदार विरोध किया था। कुछ प्रस्तावों पर चर्चा किए बिना ही उन्हें रोक दिया गया, जबकि कुछ को समिति अध्यक्ष ने दोबारा समीक्षा के लिए प्रशासन के पास भेज दिया। - “मुंबई की जमीन हड़पने की कोशिश”-आदित्य ठाकरे आदित्य ठाकरे ने हाल ही में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आरोप लगाया था कि “मुंबई की जमीन हड़पने के लिए शिंदे गुट ये प्रस्ताव ला रहा है।” उनके इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया था। सूत्रों के मुताबिक, इसी मुद्दे पर ‘मातोश्री’ से देर रात मुख्यमंत्री फडणवीस को फोन भी किया गया। - आधी रात को फडणवीस ने मांगी रिपोर्ट मिलिंद नार्वेकर के अनुसार, आदित्य ठाकरे की आपत्तियों के बाद उन्होंने देर रात मुख्यमंत्री फडणवीस को फोन कर प्रस्तावों की विस्तृत जानकारी दी। इसके बाद मुख्यमंत्री ने भाजपा नगरसेवकों से तत्काल रिपोर्ट मांगी और कथित तौर पर प्रस्तावों को मंजूरी न देने के निर्देश दिए। - शिंदे गुट को बड़ा राजनीतिक झटका? इन प्रस्तावों के स्थगित होने के बाद मुंबई की राजनीति में नए समीकरणों की चर्चा शुरू हो गई है। माना जा रहा है कि फडणवीस और ‘मातोश्री’ के बीच बढ़ते संवाद से शिंदे गुट को राजनीतिक झटका लगा है। फिलहाल सत्ताधारी और विपक्ष के बीच टकराव टल गया है, लेकिन आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीति और तेज होने की संभावना जताई जा रही है। - २७ मई/२०२६/ईएमएस