मुम्बई (ईएमएस)। मुंबई से सटे कल्याण स्थित ऐतिहासिक दुर्गाडी किले को लेकर इस समय जबरदस्त सियासी और सामाजिक विवाद खड़ा हो गया है। विवाद किले परिसर में मौजूद दुर्गा मंदिर और ईदगाह को लेकर है, जहां हर साल बकरीद के मौके पर विशेष सुरक्षा व्यवस्था लागू की जाती है। प्रशासन की ओर से नमाज के दौरान करीब 30 मिनट तक हिंदू श्रद्धालुओं के मंदिर प्रवेश पर रोक लगाई जाती रही है, ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे। लेकिन इस बार यह व्यवस्था बड़े राजनीतिक टकराव का कारण बन गई है। पिछले करीब 40 वर्षों से यहां शिवसेना की ओर से ‘घंटानाद आंदोलन’ किया जाता रहा है। इस आंदोलन के तहत कार्यकर्ता मंदिर में घंटियां बजाकर विरोध दर्ज कराते हैं। हालांकि इस बार मामला ज्यादा संवेदनशील हो गया है, क्योंकि बीजेपी और कई दक्षिणपंथी संगठनों ने भी खुलकर इस मुद्दे में एंट्री कर ली है। बीजेपी और शिवसेना (यूबीटी) नेताओं ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि अगर नमाज के दौरान हिंदुओं को मंदिर जाने से रोका गया, तो वे किले के अंदर हनुमान चालीसा और दुर्गा स्तोत्र का सामूहिक पाठ करेंगे। राजनीतिक बयानबाजी के बाद इलाके का माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया है। प्रशासन को आशंका है कि छोटी सी चूक भी कानून-व्यवस्था की बड़ी समस्या बन सकती है। इसी को देखते हुए कल्याण पुलिस और ठाणे जिला प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। पूरे दुर्गाडी किला परिसर और आसपास के इलाकों को पुलिस छावनी में तब्दील किया जा रहा है। अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किए गए हैं और संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी गई है। दुर्गाडी किला कल्याण का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व रखने वाला स्थल है, जहां एक ओर प्राचीन दुर्गा देवी मंदिर स्थित है तो दूसरी ओर ईदगाह भी मौजूद है। हर साल बकरीद पर मुस्लिम समाज यहां बड़ी संख्या में सामूहिक नमाज अदा करता है। प्रशासन का कहना है कि सुरक्षा और शांति बनाए रखने के लिए अस्थायी व्यवस्था लागू की जाती है, लेकिन इस बार इस फैसले ने राजनीतिक रंग ले लिया है। अब सभी की नजर प्रशासन और विभिन्न संगठनों के अगले कदम पर टिकी हुई है। ईएमएस / चन्द्रबली / 27/05/2026