जयपुर (ईएमएस)। एसआईआर मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद देश की राजनीति गरमा गई है। कोर्ट ने विपक्षी दलों द्वारा दायर सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया है, जिसके बाद बीजेपी ने फैसले का स्वागत किया है, जबकि विपक्षी पार्टियों ने नाराजगी जताई है। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने एक बार फिर आरोप लगाया कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान कई मतदाताओं के नाम गलत तरीके से वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया पारदर्शी नहीं रही और आम मतदाताओं को परेशान किया गया। गहलोत के आरोपों पर राजस्थान बीजेपी अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद मदन राठौर ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि केवल अनुपस्थिति के आधार पर किसी भी नागरिक का नाम मतदाता सूची से नहीं काटा जा सकता। राठौड़ के मुताबिक SIR प्रक्रिया में यह स्पष्ट किया गया है कि जिन लोगों का नाम 2001 की वोटर लिस्ट में था, उनका नाम आगे भी सुरक्षित रहेगा। उन्होंने कहा कि अगर किसी व्यक्ति का नाम सीधे सूची में नहीं है तो उसके पिता या दादा का नाम पुरानी सूची में होना चाहिए, जिससे उसकी नागरिकता और पहचान साबित हो सके। मदन राठौड़ ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति दूसरे राज्य में जाकर बस गया है, तब भी उसके मूल स्थान की वोटर लिस्ट के आधार पर नाम जोड़ा जा सकता है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने यह निर्णय पूरी सोच-समझ के बाद लिया था। राठौड़ ने दावा किया कि देश में कई बांग्लादेशी घुसपैठियों ने फर्जी तरीके से वोटर लिस्ट में नाम जुड़वा लिए थे और कुछ राजनीतिक दलों ने उन्हें वोट बैंक की तरह इस्तेमाल किया। उन्होंने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ पार्टियों ने राजनीतिक लाभ के लिए घुसपैठियों को संरक्षण दिया, जो लोकतंत्र के लिए सही नहीं है। राठौड़ ने कहा कि केवल भारत के नागरिकों को ही यह अधिकार होना चाहिए कि वे तय करें कि देश में सरकार किसकी बनेगी। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद एसआईआर को लेकर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है। ईएमएस / चन्द्रबली / 27/05/2026