ज़रा हटके
28-May-2026
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प्योंगयांग(ईएमएस)। उत्तर कोरिया ने एक बार फिर अत्याधुनिक हथियारों का सफल परीक्षण कर वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। आधिकारिक जानकारियों के अनुसार, सर्वोच्च नेता किम जोंग उन की देखरेख में परमाणु क्षमता से लैस क्रूज मिसाइल, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस संचालित मिसाइल और नई वॉरहेड वाली बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया गया। इसमें नेविगेशन प्रणाली से लैस 240 मिलीमीटर रॉकेट आर्टिलरी भी शामिल थी। किम जोंग उन ने इन मिसाइलों के प्रदर्शन पर पूर्ण संतोष व्यक्त करते हुए इन्हें दक्षिण कोरियाई सीमा के पास अग्रिम मोर्चों पर तैनात करने के निर्देश दिए हैं, ताकि देश की सैन्य शक्ति को अभेद्य बनाया जा सके। दूसरी तरफ, दक्षिण कोरियाई सेना ने भी पुष्टि की है कि उत्तर कोरिया द्वारा दागी गई कम दूरी की मिसाइलों ने करीब 80 किलोमीटर की दूरी तय की है। वर्ष 2019 में अमेरिका के साथ कूटनीतिक वार्ता विफल होने के बाद से उत्तर कोरिया ने अपने परमाणु कार्यक्रमों को अत्यंत तीव्र गति दी है। ऐसे में यह बड़ा सवाल उठता है कि कड़े अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का सामना कर रहे एक छोटे देश के पास इतने उन्नत हथियार बनाने की तकनीक और पैसा कहां से आ रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, उत्तर कोरिया के पास परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों के लिए समर्पित हजारों कुशल वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की एक बड़ी टीम है। इनमें से कई वैज्ञानिकों ने पूर्व सोवियत संघ और चीन से उच्च स्तरीय प्रशिक्षण प्राप्त किया है। देश के भीतर मुन्सु नामक एक अत्यंत गोपनीय और विशिष्ट संस्थान में इन घातक परमाणु हथियारों पर निरंतर शोध और विकास कार्य किया जाता है। आर्थिक मोर्चे पर भारी वैश्विक प्रतिबंधों के बावजूद उत्तर कोरिया अपने सैन्य कार्यक्रमों पर अरबों डॉलर खर्च कर रहा है, जिसके पीछे कई गुप्त और रणनीतिक स्रोत हैं। वर्तमान में रूस के साथ बढ़ते संबंध इसके लिए अहम हैं, यूक्रेन युद्ध के मद्देनजर उत्तर कोरिया ने रूस को भारी मात्रा में हथियार और सैनिक उपलब्ध कराए हैं, जिसके बदले में उसे ईंधन, उन्नत सैन्य तकनीक और आर्थिक सहायता मिल रही है। इसके अतिरिक्त, चीन इसका सबसे बड़ा आर्थिक साझेदार है जो अनौपचारिक रूप से आवश्यक सामानों की आपूर्ति करता रहता है। साइबर हमलों के जरिए विदेशी मुद्रा की चोरी, अवैध कोयला निर्यात और देश की आम जनता पर भारी दबाव डालकर संसाधनों को सैन्य क्षेत्र में झोंकना भी इस फंडिंग का मुख्य हिस्सा है। इधर, अमेरिकी नेतृत्व द्वारा वार्ता की इच्छा जताने के बावजूद उत्तर कोरिया ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक परमाणु हथियार छोड़ने की पूर्व शर्त नहीं हटाई जाती, तब तक कोई द्विपक्षीय बातचीत संभव नहीं है। पूर्वी एशिया में इन घातक परीक्षणों और परमाणु मिसाइलों की फ्रंटलाइन तैनाती से दक्षिण कोरिया और अमेरिका की चिंताएं चरम पर हैं, जिसके जवाब में उन्होंने इस क्षेत्र में अपने संयुक्त सैन्य अभ्यासों को और अधिक बढ़ा दिया है। वीरेंद्र/ईएमएस 28 मई 2026