ज़रा हटके
28-May-2026
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तेहरान (ईएमएस)। तनावग्रस्त देश ईरान के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में स्थित तफ्तान ज्वालामुखी पिछले दस महीनों के दौरान ज्वालामुखी की चोटी करीब नौ सेंटीमीटर तक ऊपर उठ गई है। भू-वैज्ञानिकों के अनुसार यह धरती के भीतर बढ़ते दबाव और संभावित ज्वालामुखीय गतिविधि का गंभीर संकेत हो सकता है। यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के सेंटिनल-1 सैटेलाइट्स ने अत्याधुनिक इन्सार तकनीक के जरिए इस क्षेत्र की जमीनी हलचल को रिकॉर्ड किया है। यह तकनीक बादलों और अंधेरे के बीच भी धरती की सतह में होने वाले सूक्ष्म बदलावों का पता लगाने में सक्षम है। वैज्ञानिकों ने पाया कि तफ्तान ज्वालामुखी की चोटी के नीचे लगातार दबाव बन रहा है और अब तक इसके कम होने के संकेत नहीं मिले हैं। स्पेनिश नेशनल रिसर्च काउंसिल के वरिष्ठ वैज्ञानिक पाब्लो जे. गोंजालेज के नेतृत्व में की गई इस रिसर्च के अनुसार दबाव का मुख्य स्रोत जमीन की सतह से मात्र 490 से 630 मीटर की गहराई पर स्थित है। विशेषज्ञों के मुताबिक इतनी कम गहराई पर बनने वाला दबाव भविष्य में खतरनाक गतिविधियों को जन्म दे सकता है। हालांकि फिलहाल ताजा मैग्मा सतह की ओर बढ़ता नहीं दिख रहा, लेकिन वैज्ञानिकों का मानना है कि गर्म गैसें और हाइड्रोथर्मल सिस्टम के भीतर मौजूद द्रव चट्टानों को लगातार ऊपर की ओर धकेल रहे हैं। अध्ययन में यह भी सामने आया कि शुरुआत में जमीन का उभार तेजी से बढ़ा, लेकिन बाद में इसकी गति कुछ धीमी हो गई। वैज्ञानिक इसे इस बात का संकेत मान रहे हैं कि कुछ गैसें अब नए रास्ते तलाश रही हैं, हालांकि ज्वालामुखी के भीतर दबाव अब भी बना हुआ है। करीब 3940 मीटर ऊंचा तफ्तान एक स्ट्रैटो ज्वालामुखी है। मानव इतिहास में इसके विस्फोट का कोई स्पष्ट रिकॉर्ड नहीं मिला है, जिसके कारण लंबे समय तक इसे निष्क्रिय माना जाता रहा। बावजूद इसके, इसकी चोटी से लगातार निकलने वाली गर्म गैसें और धुएं जैसी गतिविधियां संकेत देती हैं कि ज्वालामुखी पूरी तरह शांत नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि ज्वालामुखी सैकड़ों वर्षों तक शांत रह सकते हैं और फिर अचानक सक्रिय हो सकते हैं। तफ्तान का इलाका बेहद दूरस्थ होने के कारण वहां लगातार निगरानी के पर्याप्त उपकरण मौजूद नहीं हैं। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि यदि अंदर बन रहा दबाव अचानक बाहर निकलने लगा तो स्थिति गंभीर हो सकती है। सुदामा/ईएमएस 28 मई 2026