-चीन को छोड़ भारत को दे रहे प्राथमिकता नई दिल्ली,(ईएमएस)। मिन आंग ह्याइंग म्यांमार के राष्ट्रपति बनने के बाद अपनी पहली विदेश यात्रा पर भारत आने वाले हैं। रविवार को नई दिल्ली पहुंचने वाले मिन आंग ह्लाइंग की यह यात्रा रणनीतिक और सुरक्षा दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। खास बात यह है कि चीन के साथ करीबी संबंधों के बावजूद उन्होंने अपनी पहली आधिकारिक विदेश यात्रा के लिए भारत को चुना है, जिसे बदलते क्षेत्रीय भू-राजनीतिक समीकरणों में अहम संकेत माना जा रहा है। यहां बताते चलें, कि मिन आंग ह्लाइंग ने 10 अप्रैल 2026 को म्यांमार के राष्ट्रपति का कार्यभार संभाला था। इससे पहले वह सैन्य जुंटा के प्रमुख के रूप में देश का नेतृत्व कर रहे थे। भारत और म्यांमार के बीच 1,600 किलोमीटर से अधिक लंबी सीमा है, जो पूर्वोत्तर भारत की सुरक्षा और उग्रवाद से जुड़ी चुनौतियों के कारण हमेशा संवेदनशील रही है। भारत सरकार की ओर से राष्ट्रपति के शपथ ग्रहण समारोह में विदेश राज्यमंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने हिस्सा लिया था और उसी दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से उन्हें भारत आने का निमंत्रण दिया गया था। बताया जा रहा है कि इस यात्रा में दोनों देशों के बीच सुरक्षा, व्यापार, विकास और कनेक्टिविटी जैसे कई अहम मुद्दों पर चर्चा होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि केंद्र सरकार के ‘मिशन 2029’ में म्यांमार की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी। इस मिशन का उद्देश्य पूर्वोत्तर भारत से उग्रवाद का पूरी तरह खात्मा करना है। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार कई उग्रवादी संगठन वर्षों से म्यांमार के सीमावर्ती क्षेत्रों में पनाह लेते रहे हैं। इनमें एनएससीएन, उल्फा और कई मणिपुरी उग्रवादी समूह शामिल हैं। भारत और म्यांमार के बीच बेहतर तालमेल से सीमा पार हथियारों की तस्करी, नार्को-टेररिज्म और उग्रवाद पर प्रभावी नियंत्रण संभव माना जा रहा है। इससे पहले भारतीय सुरक्षा बल म्यांमार में उग्रवादी ठिकानों के खिलाफ कार्रवाई भी कर चुके हैं। हाल ही में तत्कालीन नौसेना प्रमुख दिनेश कुमार त्रिपाठी की म्यांमार यात्रा भी द्विपक्षीय सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी गई थी। हिदायत/ईएमएस 29 मई 2026