राज्य
30-May-2026


- मानसून में बढ़ सकती है समस्या, दिसंबर 2028 तक काम होना मुश्किल भोपाल (ईएमएस)। शहर को आधुनिक यातायात व्यवस्था से जोडऩे की तैयारी की जा रही है। इसके लिए मेट्रो की ब्लू लाइन का काम भदभदा से रत्नागिरी के बीच तेजी से चल रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर कुछ ऐसी बड़ी अड़चनें सामने आने लगी हैं, जो इसकी रफ्तार को धीमा कर सकती हैं। दरअसल, अधिकारियों ने पहले इस लाइन को ऑरेंज लाइन से पहले पूरा करने के संकेत दिए थे, लेकिन मौजूदा चुनौतियों को देखते हुए दिसंबर 2028 तक की डेडलाइन में काम होना असंभव लग रहा है। जमीन के नीचे पाइप लाइन शिफ्टिंग बनी बाधा बता दें कि मेट्रो रूट के निर्माण में इस समय सबसे बड़ी चुनौती जमीन के नीचे मौजूद इंफ्रास्ट्रक्चर है। ऐसे में यहां मौजूद अंडरग्राउंड पाइपलाइनों और अन्य यूटीलिटी नेटवर्क को शिफ्ट करने में काफी समय लग रहा है। इस शिफ्टिंग प्रक्रिया के चलते शहर के कई इलाकों में इंटरनेट और ब्राडबैंड सेवाएं भी प्रभावित हो रही हैं, जिससे आमजनता को रोजमर्रा के जीवन में चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। सकरी सडक़ें और लंबा जाम, व्यापारियों की बढ़ी चिंता न्यूमार्केट व्यापारी संघ के सदस्यों ने बताया कि भदभदा और जवाहर चौक जैसे बेहद व्यस्त इलाकों में सकरी सडक़ों के कारण ट्रैफिक को डायवर्ट करना पड़ रहा है, जिससे रोजाना लंबा जाम लग रहा है। न्यू मार्केट समेत कई कारोबारी इलाकों के व्यापारियों को अब यह डर सताने लगा है कि यदि निर्माण कार्य लंबा खिंचा तो उनका कारोबार बुरी तरह प्रभावित होगा। बता दें कि ऑरेंज लाइन के प्रायोरिटी कॉरिडोर को बनने में ही पांच साल से ज्यादा का समय लग चुका है और पूरी लाइन अब तक तैयार नहीं हो पाई है। मानसून में बढ़ सकती है स्थानीय लोगों की मुसीबत अशोका गार्डन में रहने वाले अरविंद शाक्य का कहना है कि आने वाले बारिश के मौसम में स्थानीय लोगों की मुश्किलें और ज्यादा बढ़ सकती हैं। निर्माण स्थलों के आसपास वर्तमान में उड़ती धूल और बढ़ते ध्वनि प्रदूषण ने सुरक्षा और स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं बढ़ा दी हैं। मानसून के दौरान यही धूल कीचड़ में बदल जाएगी, जिससे संकरी सडक़ों पर जलजमाव और दुर्घटनाओं का खतरा कई गुना बढ़ जाएगा। प्रबंधन का दावा, आज परेशानी, कल फायदा इन तमाम चुनौतियों के बीच एमपीएमआरसीएल के अधिकारियों का कहना है कि मेट्रो परियोजना सिर्फ तेज सफर के लिए नहीं, बल्कि शहर की ट्रैफिक व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए तैयार की जा रही है। जहां भी एलिवेटेड कॉरिडोर बन रहे हैं, वहां नीचे की सडक़ों को 2 से 3 मीटर तक चौड़ा किया जा रहा है, ताकि भविष्य में ट्रैफिक का दबाव स्थाई रूप से कम हो सके और वाहन चालकों को सुगम रास्ता मिल सके। विनोद / 30 मई 26