राष्ट्रीय
30-May-2026


दो महीने में रोजमर्रा के सामान की कीमतों में 3 से 7 फीसदी से ज्यादा का इजाफा, आम लोगों के सामने रोजी-रोटी की समस्या हुई खड़ी महंगाई की मार...रसोई से बाजार तक हाहाकार! नई दिल्ली(ईएमएस)। पश्चिम एशिया में जारी ईरान युद्ध का असर अब भारत के आम नागरिकों की रसोई और जेब तक पहुंच चुका है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों, गैस आपूर्ति पर दबाव और कच्चे माल की लागत में उछाल ने महंगाई को नई रफ्तार दे दी है। नतीजतन पेट्रोल-डीजल, दूध, सीएनजी, बिजली और दैनिक उपयोग की वस्तुओं के दाम लगातार बढ़ रहे हैं, जिससे आम परिवारों का मासिक बजट पूरी तरह से गड़बड़ा गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव जल्द समाप्त नहीं हुआ तो आने वाले महीनों में महंगाई का दबाव और बढ़ सकता है। इसका सीधा असर मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग पर पड़ेगा, जिनकी आय स्थिर है लेकिन खर्च लगातार बढ़ रहे हैं। ईरान युद्ध भले ही हजारों किलोमीटर दूर लड़ा जा रहा हो, लेकिन उसकी आर्थिक आंच भारत के आम परिवारों तक पहुंच चुकी है। बढ़ती महंगाई ने रसोई से लेकर यात्रा और बिजली तक हर खर्च को प्रभावित किया है। यदि वैश्विक हालात जल्द नहीं सुधरे, तो आने वाले महीनों में महंगाई का यह बोझ और भारी पड़ सकता है। ईंधन महंगा, हर चीज महंगी महंगाई की सबसे बड़ी वजह ईंधन कीमतों में आई तेजी है। पिछले कुछ सप्ताहों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगभग 8 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई है। तेल कंपनियों द्वारा कई चरणों में की गई बढ़ोतरी के बाद पेट्रोल और डीजल दोनों के दाम 7 रुपये प्रति लीटर से अधिक बढ़ चुके हैं। पेट्रोलियम उत्पादों की कीमत बढऩे का असर केवल वाहनों तक सीमित नहीं रहता। परिवहन लागत बढऩे से सब्जियों, अनाज, दूध और अन्य उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों पर भी दबाव बढ़ जाता है। यही कारण है कि बाजार में अधिकांश वस्तुएं महंगी होती जा रही हैं। दूध ने भी बढ़ाया घरेलू बजट का बोझ घरेलू खर्चों में सबसे महत्वपूर्ण स्थान रखने वाले दूध की कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई है। देश की प्रमुख डेयरी कंपनियों अमूल और मदर डेयरी ने दूध के दाम बढ़ाए, जिसके बाद कई क्षेत्रीय डेयरियों ने भी अपने उत्पाद महंगे कर दिए। दूध के दाम बढऩे का असर सीधे तौर पर चाय, कॉफी, दही, पनीर और अन्य डेयरी उत्पादों पर पड़ता है। बच्चों वाले परिवारों के लिए यह अतिरिक्त खर्च और अधिक चुनौतीपूर्ण बन गया है। सीएनजी और पीएनजी ने बढ़ाई चिंता पेट्रोल और डीजल के साथ-साथ सीएनजी की कीमतों में भी लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। कई शहरों में सीएनजी के दाम रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए हैं। सार्वजनिक परिवहन और टैक्सी सेवाओं पर इसका सीधा प्रभाव पड़ रहा है। हालांकि घरेलू पीएनजी और एलपीजी में अभी अपेक्षाकृत सीमित बढ़ोतरी हुई है, लेकिन विशेषज्ञ संकेत दे रहे हैं कि आने वाले समय में इनकी कीमतों पर भी दबाव बढ़ सकता है। मुंबई में पीएनजी दरों में हालिया बढ़ोतरी को इसी दिशा में संकेत माना जा रहा है। बिजली बिल ने बढ़ाई मुश्किल महंगाई का एक और बड़ा झटका बिजली उपभोक्ताओं को लग रहा है। कई राज्यों में फ्यूल सरचार्ज और बिजली खरीद लागत के नाम पर अतिरिक्त शुल्क वसूला जा रहा है। इससे बिजली बिलों में 10 प्रतिशत तक अतिरिक्त बोझ देखने को मिल रहा है। ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि बिजली उत्पादन और ईंधन लागत बढऩे से वितरण कंपनियों पर दबाव है, जिसका भार अंतत: उपभोक्ताओं पर डाला जा रहा है। एफएमसीजी कंपनियों ने बढ़ाए दाम रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले साबुन, तेल, डिटर्जेंट, शैम्पू, पैकेज्ड फूड और अन्य उपभोक्ता उत्पादों की कीमतों में भी बढ़ोतरी शुरू हो गई है। कई कंपनियों ने सीधे दाम बढ़ाने के बजाय पैकेट का वजन कम कर दिया है, जिसे बाजार की भाषा में श्रिंकफ्लेशन कहा जाता है। उद्योग रिपोर्टों के अनुसार पिछले दो महीनों में कई उत्पाद श्रेणियों में 3 से 7 प्रतिशत तक मूल्य वृद्धि देखी गई है। खाद्य तेल, पैकेजिंग सामग्री और पेट्रोलियम आधारित कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी इसका प्रमुख कारण है। कच्चे माल की बढ़ी लागत विश्लेषकों के मुताबिक पश्चिम एशिया में तनाव के कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल, पाम ऑयल और पेट्रोकेमिकल उत्पादों की कीमतें बढ़ी हैं। पैकेजिंग उद्योग में इस्तेमाल होने वाली हाई-डेंसिटी पॉलीइथाइलीन (एचडीपीई) जैसी सामग्री की लागत में भी भारी उछाल आया है। इन सामग्रियों का उपयोग खाद्य पदार्थों, पेय पदार्थों, शैम्पू, डिटर्जेंट और घरेलू उत्पादों की पैकेजिंग में किया जाता है। लागत बढऩे पर कंपनियां इसका भार उपभोक्ताओं पर डाल रही हैं। आगे और बढ़ सकती है महंगाई अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यदि ईरान युद्ध लंबा खिंचता है तो कच्चे तेल और गैस की वैश्विक आपूर्ति पर दबाव और बढ़ सकता है। इससे परिवहन, बिजली उत्पादन और विनिर्माण क्षेत्र की लागत बढ़ेगी, जिसका असर आम उपभोक्ताओं तक पहुंचेगा। विशेषज्ञों के अनुसार अगले कुछ महीनों में खाद्य पदार्थों, ऊर्जा और दैनिक उपयोग की वस्तुओं की कीमतों में और वृद्धि देखने को मिल सकती है। ऐसे में सरकार के सामने महंगाई नियंत्रित रखने और आम लोगों को राहत देने की चुनौती पहले से अधिक बड़ी हो गई है। -महंगाई की मार एक नजर में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 8 प्रतिशत तक वृद्धि सीएनजी के दाम कई शहरों में रिकॉर्ड स्तर पर दूध की कीमतों में बढ़ोतरी बिजली बिल पर अतिरिक्त फ्यूल सरचार्ज एफएमसीजी उत्पाद 3-7 प्रतिशत तक महंगे खाद्य तेल और पैकेजिंग लागत में तेज उछाल घरेलू बजट पर लगातार बढ़ता दबाव विनोद उपाध्याय / 30 मई, 2026