-बोलीं- सिर्फ ग्लैमर और कैमरे तक सीमित नहीं सिनेमा -सोनाक्षी की फिल्म सिस्टम को ओटीटी पर मिला शानदार रिस्पॉन्स मुंबई (ईएमएस)। बॉलीवुड अभिनेत्री सोनाक्षी सिन्हा की हाल ही में रिलीज हुई डिजिटल फिल्म सिस्टम को दर्शकों से काफी अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है। इसी बीच, फिल्म के प्रचार के दौरान उन्होंने अभिनय और अपने किरदार को लेकर बात करते हुए कई दिलचस्प अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि एक अभिनेता का काम बाहर से देखने में जितना सरल प्रतीत होता है, वास्तविकता में वह उतना ही चुनौतीपूर्ण होता है। सोनाक्षी ने कहा कि जब कोई कलाकार किसी नए किरदार को निभाता है, तो वह उसकी पूरी दुनिया में कदम रखता है। हर फिल्म और हर भूमिका एक अलग जिंदगी की तरह होती है, जिसमें नियम, रिश्ते और परिस्थितियां बिल्कुल नई होती हैं। उन्हें अभिनय हमेशा रोमांचक लगता है, क्योंकि हर बार कुछ नया सीखने और महसूस करने का अवसर मिलता है। सोनाक्षी का मानना है कि किसी भी व्यवसाय को बाहर से देखकर पूरी तरह समझना कठिन होता है। जैसे वकील या चिकित्सक की दुनिया को गहराई से समझना आसान नहीं होता, वैसे ही फिल्म उद्योग के भीतर क्या होता है, यह केवल वही लोग जानते हैं जो स्वयं उस प्रक्रिया का हिस्सा रहे हों। लोग अक्सर सोचते हैं कि फिल्में सिर्फ चकाचौंध और कैमरे तक सीमित होती हैं, लेकिन वास्तव में एक फिल्म के पीछे बहुत सारे लोगों की कड़ी मेहनत, लगन और लंबी तैयारी होती है, जो मिलकर एक कहानी को जीवंत आकार देती है। इस फिल्म में सोनाक्षी सिन्हा ने एक वकील नेहा राजवंश का किरदार निभाया है। कहानी में उनके पिता रवि राजवंश उन्हें खुद को साबित करने की चुनौती देते हैं और उनके सामने दस मामले (केस) जीतने की शर्त रखते हैं। इस चुनौती को स्वीकार करते हुए वह कई बड़े मामलों की पैरवी करती हैं, और इसी दौरान उनकी मुलाकात अभिनेत्री ज्योतिका के किरदार सारिका रावत से होती है, जो एक आशुलिपिक (स्टेनोग्राफर) की भूमिका में हैं। इस फिल्म का निर्माण पम्मी बावेजा, हरमन बावेजा और स्मिता बालिगा ने मिलकर किया है, जबकि अश्विनी अय्यर तिवारी ने हरमन बावेजा, अरुण सुकुमार और तस्नीम लोखंडवाला के साथ मिलकर इसकी पटकथा लिखी है। रामयश/ईएमएस 31 मई 2026