मनोरंजन
31-May-2026
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मुंबई (ईएमएस)। अपनी आगामी साइकोलॉजिकल थ्रिलर फिल्म ऑब्सेस की रिलीज को लेकर बॉलीवुड अभिनेत्री ईशा सिंह उत्साहित हैं। फिल्म में एक जटिल और गहरे किरदार को निभाने के अनुभव पर ईशा सिंह ने विस्तार से बात की है। खासकर इस बात पर कि एक कलाकार के लिए अपने किरदार में पूरी तरह डूबना और फिर उससे बाहर निकलना कितना महत्वपूर्ण है। ईशा ने बताया, एक कलाकार के रूप में, यह जानना बेहद ज़रूरी है कि कैमरे के सामने कब आपको अपने किरदार में पूरी तरह उतरना है और ऑन होना है, और शॉट खत्म होने के बाद कब आपको उससे बाहर आकर ऑफ हो जाना है। उन्होंने स्वीकार किया कि कुछ किरदार इतने गहरे और भावनात्मक होते हैं कि उनमें पूरी तरह से डूब जाने का खतरा रहता है। हालांकि, ऑब्सेस के सेट पर मिले सकारात्मक माहौल ने उनकी बहुत मदद की। वे कहती हैं, खुशकिस्मती से, हमारी फिल्म का सेट बहुत ही सहयोगी और सकारात्मक ऊर्जा से भरा था। मेरे आसपास के लोग लगातार मेरा ध्यान रख रहे थे, जिसकी वजह से इस डार्क किरदार का भावनात्मक बोझ मुझ पर हावी नहीं हो पाया। आज के समाज में बढ़ते टॉक्सिक अटैचमेंट और जुनूनी व्यवहार पर अपने विचार साझा करते हुए ईशा ने एक महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने बताया कि इस तरह के जुनूनी लोग और व्यवहार सोशल मीडिया के आने से पहले भी समाज में मौजूद थे। अंतर सिर्फ इतना है कि अब सब कुछ बहुत तेज़ी से और आसानी से लोगों तक पहुंच जाता है, क्योंकि हर किसी के पास स्मार्टफोन है और जानकारी पलक झपकते ही फैल जाती है। ईशा मानती हैं कि सोशल मीडिया के अपने सकारात्मक और नकारात्मक दोनों पहलू हैं। अपनी फिल्म ऑब्सेस के बारे में बताते हुए ईशा ने कहा कि उन्हें इसकी कहानी में मौजूद भावनात्मक परतें सबसे ज्यादा पसंद आईं। जब दर्शक यह फिल्म देखेंगे, तो वे समझेंगे कि इन गंभीर विषयों को कितनी गहराई और संवेदनशीलता के साथ चित्रित किया गया है। इस संदर्भ में, उन्होंने फिल्म के निर्देशक पीटर की एक बात को याद किया, जिन्होंने कहा था, हर इंसान के भीतर एक फ़रिश्ता और एक शैतान, दोनों मौजूद होते हैं। इनमें से कौन सा पहलू कितना बाहर आता है, यह पूरी तरह से उस व्यक्ति पर और उसकी परिस्थितियों पर निर्भर करता है। अभिनेत्री ने इस बात पर ज़ोर दिया कि किसी भी कलाकार के मानसिक स्वास्थ्य के लिए यह बेहद ज़रूरी है कि वह अपने काम के दौरान उस काल्पनिक दुनिया में मानसिक रूप से भले ही डूबा रहे, लेकिन काम खत्म होते ही उससे पूरी तरह से मुक्त हो जाए। कुछ दिन बहुत भारी महसूस हो सकते हैं, जबकि कुछ अच्छे, लेकिन एक बार जब काम पूरा हो जाता है, तो उस किरदार और उसकी दुनिया से बाहर निकलना कलाकार के मानसिक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत आवश्यक है! सुदामा/ईएमएस 31 मई 2026