क्षेत्रीय
31-May-2026
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- समान नागरिक संहिता विषय पर गठित समिति की बैठक आयोजित राजगढ़(ईएमएस)l मध्यप्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के संबंध में सुझाव एवं विचार प्राप्त करने हेतु गठित उच्च स्तरीय समिति की बैठक रविवार को जिला पंचायत सभागृह में आयोजित की जाएगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समान नागरिक संहिता (यूसीसी) का समर्थन करते हुए कहते हैं कि देश में अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों के बजाय सभी नागरिकों के लिए एक समान नागरिक कानून होना चाहिए। उनके अनुसार यूसीसी का उद्देश्य कानून के समक्ष समानता, महिलाओं को समान अधिकार और लैंगिक न्याय सुनिश्चित करना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मानना है कि एक धर्मनिरपेक्ष और समान नागरिक संहिता से विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे मामलों में सभी नागरिकों के साथ समान व्यवहार होगा, जिससे संविधान में निहित समानता के सिद्धांत को मजबूती मिलेगी। बैठक को संबोधित करते हुए प्रोफेसर गोपाल शर्मा ने कहा कि समान नागरिक संहिता (यूसीसी) जैसे महत्वपूर्ण विषय पर समाज के सभी वर्गों एवं आमजन की राय लेना तथा उसे विधिवत दर्ज करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य विभिन्न समुदायों के विचारों, सुझावों एवं मतों को संकलित कर उन्हें नीति निर्माण की प्रक्रिया में शामिल करना है। उन्होंने बताया कि यूसीसी की अवधारणा कोई नई नहीं है, बल्कि भारतीय संविधान के नीति निदेशक तत्वों के अंतर्गत अनुच्छेद 44 में इसका उल्लेख किया गया है। संविधान निर्माताओं ने यह परिकल्पना की थी कि देश की सामाजिक परिस्थितियों और विकास के अनुरूप समय आने पर समान नागरिक संहिता को लागू किया जाएगा। इस अवसर पर प्रदेश सरकार के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विकास विभाग नारायण सिंह पंवार, विधायक राजगढ़ अमर सिंह यादव, विधायक खिलचीपुर हजारीलाल दांगी, भाजपा जिला अध्यक्ष ज्ञान सिंह गुर्जर, कलेक्टर डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा, पुलिस अधीक्ष अमित तोलानी, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत डॉ. इच्छित गढ़पाले, अपर कलेक्टर प्रताप सिंह चौहान, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के.एल. बंजारे सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि व अधिकारी - कर्मचारीगण उपस्थित रहे। प्रोफेसर श्री शर्मा ने कहा कि महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा एवं उनके सशक्तिकरण की दिशा में यूसीसी एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि एक सशक्त, समरस एवं एकीकृत राष्ट्र के निर्माण के लिए समान नागरिक कानूनों पर व्यापक सहमति आवश्यक है। यूसीसी के अंतर्गत विवाह की न्यूनतम आयु, एक से अधिक विवाह, सभी लिंगों के लिए समान संपत्ति अधिकार जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं। उन्होंने उपस्थितजनों को बताया कि यूसीसी से संबंधित सुझाव एवं विचार मध्यप्रदेश शासन के पोर्टल ucc.mp.gov.in पर भी दर्ज कराए जा सकते हैं। उन्होंने अधिक से अधिक नागरिकों से इस विषय पर अपनी सहभागिता सुनिश्चित करने का आह्वान किया। बैठक के दौरान प्रोफेसर श्री शर्मा ने सभागार में उपस्थित सभी समुदायों, सामाजिक संगठनों एवं नागरिकों को खुलकर अपनी बात रखने का अवसर प्रदान किया। ओपन माइक सत्र के माध्यम से उपस्थित सदस्यों के सुझाव, विचार एवं मत सुने गए तथा उन्हें विधिवत अभिलेखित किया गया। उन्होंने कहा कि इस परामर्श प्रक्रिया का उद्देश्य समाज के प्रत्येक वर्ग की भावनाओं, अपेक्षाओं एवं सुझावों को संकलित कर एक समावेशी एवं न्यायसंगत व्यवस्था की दिशा में सार्थक पहल करना है। - प्रतिभागियों ने रखे महत्वपूर्ण सुझाव जनप्रतिनिधियों एवं प्रतिभागियों ने सुझाव दिया कि समान नागरिक संहिता का मूल उद्देश्य एवं भावना वही बनी रहनी चाहिए, जिसकी परिकल्पना संविधान निर्माताओं ने की थी। उन्होंने कहा कि यूसीसी को लागू करते समय संविधान के मूल सिद्धांतों एवं समानता के उद्देश्य को केंद्र में रखा जाना चाहिए। बैठक में यह मत भी व्यक्त किया गया कि बीएनएस के प्रावधान पूरे देश में समान रूप से लागू हो सकते हैं, तो विवाह, उत्तराधिकार एवं पारिवारिक कानूनों में भी एकरूपता स्थापित की जा सकती है।प्रतिभागियों ने कहा कि हम सभी भारतीय हैं और समान नागरिक संहिता राष्ट्रीय एकता एवं समानता को और अधिक सुदृढ़ बनाने का माध्यम बन सकती है। वन स्टॉप सेंटर से उपस्थित प्रतिनिधियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि विभिन्न प्रकरणों में बड़ी संख्या में महिलाओं की काउंसलिंग के दौरान यह अनुभव हुआ है कि महिलाओं के अधिकारों की प्रभावी सुरक्षा के लिए समान नागरिक संहिता समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि कई मामलों में महिलाओं के मौलिक अधिकारों के हनन एवं उनके साथ असमान व्यवहार की शिकायतें सामने आती हैं, जिनके समाधान के लिए एक समान एवं न्यायसंगत कानूनी व्यवस्था उपयोगी सिद्ध हो सकती है। बैठक को संबोधित करते हुए प्रदेश सरकार के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विकास विभाग नारायण सिंह पंवार ने कहा कि समान नागरिक संहिता वर्तमान समय की आवश्यकता है।उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार समाज में व्याप्त सांस्कृतिक अंतर को समाप्त करने तथा सभी नागरिकों के लिए समानता सुनिश्चित करने की दिशा में कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि एक देश, एक कानून की भावना को मजबूत करने के लिए समान नागरिक संहिता महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हो सकती है। राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री पंवार ने कहा कि कानूनों को सरल, स्पष्ट एवं आमजन के लिए सहज बनाया जाना चाहिए, जिससे प्रत्येक नागरिक को न्याय एवं अधिकारों की समान पहुंच सुनिश्चित हो सके। बैठक के अंत में कलेक्टर डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा ने मुख्यमंत्री के नेतृत्व में गठित उच्चस्तरीय समिति एवं शासन की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि किसी कानून के क्रियान्वयन से पूर्व व्यापक जनपरामर्श की यह प्रक्रिया अत्यंत सराहनीय है। उन्होंने कहा कि आमजन, सामाजिक संगठनों एवं विभिन्न समुदायों से सुझाव प्राप्त कर कानून निर्माण की दिशा में आगे बढ़ना लोकतांत्रिक मूल्यों को सुदृढ़ करता है। कलेक्टर डॉ. मिश्रा ने बैठक में उपस्थित सभी नागरिकों, जनप्रतिनिधियों एवं संगठनों के प्रतिनिधियों का अपना बहुमूल्य समय देकर चर्चा में सहभागिता करने के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि बैठक के दौरान प्राप्त सभी सुझावों, विचारों एवं अभिमतों को विधिवत कार्यवृत्त (मिनिट्स) में दर्ज कर संबंधित उच्चस्तरीय समिति को प्रेषित किया जाएगा, ताकि उन्हें आगामी प्रक्रिया में समुचित रूप से विचारार्थ शामिल किया जा सके। - निखिल/राजगढ़/31/5/2026