बिलासपुर (ईएमएस)। डॉ. सी.वी. रमन विश्वविद्यालय में शिक्षा विभाग, आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (आईक्यूएसी) एवं काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में एआई फॉर एजुकेटर्स: एन्हांसिंग टीचिंग एंड प्रोडक्टिविटी विद एवरीडे एआई विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में देशभर से शिक्षाविदों, शोधार्थियों और विशेषज्ञों ने भाग लेकर शिक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की भूमिका और संभावनाओं पर विचार साझा किए। दो दिन तक चले आयोजन में 127 शोध पत्र प्राप्त हुए। पांच राज्यों से आए विशेषज्ञों ने एआई आधारित शिक्षण, अनुसंधान, मूल्यांकन प्रणाली और उत्पादकता वृद्धि जैसे विषयों पर अपने शोध और अनुभव प्रस्तुत किए। मुख्य अतिथि राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद के विशेषज्ञ डॉ. हेमंत कुमार साव ने कहा कि यह धारणा गलत है कि एआई शिक्षकों की जगह ले लेगा। कोई भी तकनीक शिक्षक का विकल्प नहीं बन सकती, लेकिन जो शिक्षक नई तकनीकों को अपनाने से बचेंगे, वे समय की दौड़ में पीछे रह जाएंगे। इसलिए शिक्षकों को एआई का सकारात्मक और रचनात्मक उपयोग सीखना चाहिए। मुख्य वक्ता प्रो. संबित कुमार पाढ़ी ने कहा कि एआई शिक्षकों की कार्यक्षमता बढ़ाने के साथ शिक्षण को अधिक प्रभावी और विद्यार्थीकेंद्रित बनाने में सहायक साबित हो सकता है। उन्होंने भविष्य की शिक्षा व्यवस्था में तकनीक की बढ़ती भूमिका पर विस्तार से चर्चा की। कुलपति प्रो. प्रदीप कुमार घोष ने कहा कि विकसित भारत के निर्माण में शिक्षा की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। शिक्षकों को बदलती तकनीकों और नवीन विचारों को अपनी शिक्षण प्रक्रिया में शामिल करना होगा। कुलसचिव डॉ. अरविंद कुमार तिवारी ने कहा कि विश्वविद्यालय भविष्य की तकनीकों को लेकर लगातार प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम संचालित कर रहा है तथा एआई सहित नवीन तकनीकों के प्रभावी उपयोग के लिए प्रतिबद्ध है। समकुलपति डॉ. जयंती चटर्जी ने कहा कि शिक्षा में एआई का समावेश गुणवत्तापूर्ण, समावेशी और नवाचार आधारित शिक्षण संस्कृति के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। कार्यक्रम में शिक्षा विभागाध्यक्ष एवं डीन डॉ. जयशंकर यादव, कार्यक्रम समन्वयक डॉ. के.के. पांडे, डॉ. नवीन कुमार, डॉ. शैलेश कुमार द्विवेदी, डॉ. शिव सिंह परमार, डॉ. शोभा उपाध्याय, डॉ. कार्तिकेय कुमार, डॉ. ज्योति वर्मा और डॉ. धीरेंद्र सिंह सहित बड़ी संख्या में शिक्षक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे। संचालन डॉ. ब्रम्हेश श्रीवास्तव ने किया। - 31 मई 2026