एथेंस (ईएमएस)। ग्रीस में वैज्ञानिकों को दुनिया के अब तक के सबसे पुराने हाथ से इस्तेमाल किए गए लकड़ी के औजार मिले हैं, जिनसे पता चलता है कि शुरुआती इंसान केवल पत्थर तोड़ने या शिकार करने तक सीमित नहीं थे, बल्कि वे लकड़ी को पहचानने, उसे तराशने और जरूरत के मुताबिक उपयोगी औजार बनाने की कला भी जानते थे। यह अहम खोज ग्रीस के मेगालोपोलिस क्षेत्र स्थित मराठौसा पुरातात्विक स्थल पर हुई है। इस शोध में यूनिवर्सिटी ऑफ रीडिंग, यूनिवर्सिटी ऑफ ट्यूबिंगेन और जर्मनी की सेनकनबर्ग नेचर रिसर्च सोसायटी के वैज्ञानिक शामिल थे। वैज्ञानिकों के अनुसार ये लकड़ी के औजार करीब 4 लाख 30 हजार साल पुराने हैं, जो अब तक मिले ऐसे औजारों में सबसे प्राचीन माने जा रहे हैं। वैज्ञानिकों को यहां दो लकड़ी के औजार मिले। इनमें से एक एल्डर पेड़ की लकड़ी से बना था, जबकि दूसरा विलो या पॉपलर पेड़ की लकड़ी से तैयार किया गया था। इन औजारों पर कटाई, छीलने और आकार देने के स्पष्ट निशान मिले हैं, जिससे साबित होता है कि इन्हें इंसानों ने जानबूझकर तैयार किया था। शोधकर्ताओं का मानना है कि इनका उपयोग झील किनारे नरम मिट्टी खोदने, जड़ें निकालने, पेड़ों की छाल हटाने या दूसरी दैनिक जरूरतों के लिए किया जाता होगा। वैज्ञानिकों के लिए सबसे हैरान करने वाली बात यह थी कि इतनी पुरानी लकड़ी आखिर सुरक्षित कैसे बची रही। सामान्य तौर पर लकड़ी जल्दी सड़ जाती है और हजारों साल तक सुरक्षित नहीं रह पाती। लेकिन मराठौसा क्षेत्र कभी एक प्राचीन झील का किनारा हुआ करता था। वहां की गीली मिट्टी और कम ऑक्सीजन वाले वातावरण ने इन लकड़ी के औजारों को लंबे समय तक सुरक्षित रखा। शोधकर्ताओं के मुताबिक यह खोज इस बात का सबूत है कि मध्य प्लेस्टोसीन काल के इंसान हमारी सोच से कहीं ज्यादा समझदार और तकनीकी रूप से विकसित थे। यह काल लगभग 7 लाख 50 हजार साल पहले से 1 लाख 29 हजार साल पहले तक फैला हुआ था। इसी दौर में इंसानों ने अपने आसपास के संसाधनों को समझना और उनका योजनाबद्ध तरीके से इस्तेमाल करना शुरू किया। मराठौसा स्थल से पत्थर के औजार, हाथियों के अवशेष और अन्य जानवरों की हड्डियां भी मिली हैं। इससे संकेत मिलता है कि यह इलाका शिकार और भोजन तैयार करने का प्रमुख केंद्र रहा होगा। वैज्ञानिकों को यहां लकड़ी के बड़े टुकड़ों पर पंजों के निशान भी मिले हैं, जो संभवतः किसी बड़े मांसाहारी जानवर, जैसे भालू, के हो सकते हैं। इससे यह भी पता चलता है कि उस समय इंसानों और जंगली जानवरों के बीच भोजन और शिकार को लेकर कड़ी प्रतिस्पर्धा रही होगी। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह खोज मानव इतिहास की समझ को नया आयाम देती है। सुदामा/ईएमएस 01 जून 2026