लंदन (ईएमएस)। भारत में सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई “कॉकरोच जनता पार्टी” ने बेहद कम समय में करोड़ों फॉलोअर्स जुटाकर लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। देश के युवाओं के बीच यह व्यंग्यात्मक डिजिटल ट्रेंड इतना लोकप्रिय हो गया कि अब कॉकरोच की असाधारण जीवित रहने की क्षमता पर भी चर्चा तेज हो गई है। सोशल मीडिया पर लोग सवाल पूछ रहे हैं कि क्या सच में परमाणु युद्ध जैसी भयानक तबाही के बाद भी कॉकरोच जिंदा बच सकते हैं। कॉकरोच को लेकर यह धारणा नई नहीं है। वर्ष 1965 में “नेशनल कमेटी फॉर अ सेन न्यूक्लियर पॉलिसी” द्वारा जारी एक विज्ञापन में दावा किया गया था कि यदि तीसरा विश्व युद्ध हुआ तो न अमेरिका बचेगा, न रूस और न चीन, बल्कि उसका असली विजेता कॉकरोच होगा। इसके बाद से यह बात दुनिया भर में एक चर्चित वैज्ञानिक मिथक बन गई। हालांकि वैज्ञानिकों का कहना है कि इस दावे में कुछ सच्चाई जरूर है, लेकिन इसे पूरी तरह सही मानना गलत होगा। विशेषज्ञों के अनुसार कॉकरोच सीधे परमाणु बम के विस्फोट को नहीं झेल सकते। परमाणु धमाके के दौरान पैदा होने वाली भीषण गर्मी, आग का विशाल गोला और तेज शॉकवेव किसी भी जीवित प्राणी को तुरंत नष्ट कर सकती है। इसलिए यदि कोई कॉकरोच विस्फोट के बिल्कुल केंद्र में मौजूद हो तो उसका बचना असंभव है। लेकिन असली खासियत उनकी रेडिएशन सहन करने की क्षमता में छिपी है। वैज्ञानिकों के मुताबिक कॉकरोच इंसानों की तुलना में लगभग 10 गुना ज्यादा रेडियोएक्टिव विकिरण सहन कर सकते हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह उनके शरीर की कोशिकाओं का धीमा विभाजन है। रेडिएशन मुख्य रूप से उन कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाता है जो तेजी से विभाजित होती हैं। इंसानों में यह प्रक्रिया लगातार चलती रहती है, जबकि कॉकरोच में कोशिका विभाजन केवल तब होता है जब वे अपनी बाहरी त्वचा बदलते हैं। यही कारण है कि उन पर रेडिएशन का असर बेहद कम होता है। कॉकरोच की एक और खासियत यह है कि वे बिना सिर के भी कई दिनों तक जिंदा रह सकते हैं। उनका परिसंचरण तंत्र खुला होता है और वे शरीर में मौजूद छोटे छिद्रों से सांस लेते हैं। सिर कटने के बाद भी उनके शरीर का कामकाज कुछ समय तक चलता रहता है। इसके अलावा कॉकरोच लगभग 30 करोड़ वर्षों से पृथ्वी पर मौजूद हैं और वे कई बड़े जलवायु परिवर्तनों तथा विनाशकारी घटनाओं को झेल चुके हैं। डिस्कवरी चैनल के लोकप्रिय शो “मिथबस्टर्स” में भी इस विषय पर प्रयोग किया गया था। परीक्षण में पाया गया कि कॉकरोच बेहद ऊंचे स्तर का रेडिएशन झेलने में सक्षम हैं। हालांकि वे इस मामले में दुनिया के सबसे ताकतवर जीव नहीं हैं, क्योंकि कुछ अन्य कीट उनसे भी अधिक विकिरण सहन कर सकते हैं। सुदामा/ईएमएस 01 जून 2026