- नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे 6 की रिपोर्ट में खुलासा, मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों में घट रहा स्तनपान का आंकड़ा, इस राज्य में बढ़ी ब्रेस्टेफीडिंग भोपाल (ईएमएस)। नवजात के लिए मां का दूध अमृत के समान माना जाता है, लेकिन नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे 6 की रिपोर्ट में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। आंकड़ों से खुलासा हुआ है कि प्रदेश में 6 माह तक के 56.4 फीसदी बच्चों को मां का दूध पिलाया जा रहा है। पिछले सालों में इन आंकड़ों में तेजी से कमी आई है। 2019-21 की रिपोर्ट में यह आंकड़ा 74.0 फीसदी था। छह माह तक के बच्चों को स्तनपान कराए जाने के आंकड़ों में गिरावट को लेकर विशेषज्ञ हैरान हैं और इसे बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर चिंताजनक मानते हैं। हालांकि बच्चों के स्तनपान के आंकड़ों में राष्ट्रीय स्तर पर गिरावट आई है। देश भर में घटा स्तनपान कराने का आंकड़ा छह माह तक के शिशुओं को स्तनपान कराए जाने के आंकड़ों में राष्ट्रीय स्तर पर भी गिरावट आई है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण 05 की रिपोर्ट में स्तनपान कराने का आंकड़ा 64 फीसदी था, जबकि ताजा रिपोर्ट में यह आंकड़ा घटकर 55.8 फीसदी रह गया है। रिपोर्ट के मुताबिक इस मामले में सबसे बेहतर स्थिति केरल राज्य की है। केरल में 6 माह तक के बच्चों को स्तनपान कराए जाने के आंकड़े बढ़े हैं। 2019-21 की रिपोर्ट में केरलम में 55.5 फीसदी थी, जो अब बढक़र 72.7 फीसदी तक पहुंच गई है। उधर सबसे ज्यादा गिरावट हरियाणा राज्य में रिकॉर्ड की गई है। हरियाणा में 6 माह तक के शिशुओं को स्तनपान कराने की दर 41.2 फीसदी पर आ गई है, जबकि पिछली रिपोर्ट में यह 69.5 फीसदी थी। किस राज्य में क्या है स्थिति देश के बड़े राज्यों की बात करें तो उत्तर प्रदेश के भी आंकड़े निराश करने वाले हैं। आंध्र प्रदेश में छह माह तक के शिशुओं को स्तनपान कराने का आंकड़ा बढ़ा है। पिछली रिपोर्ट में यह 68 फीसदी था, जो अब बढक़र 69.5 हो गया है। बिहार की स्थिति इस मामले में बेहतर है। बिहार में 2019-21 की रिपोर्ट के मुकाबले में छह माह तक के शिशुओं को स्तनपान का आंकड़ा 58.9 से बढक़र 62.2 हो गया है। छत्तीसगढ़ में स्थिति काफी बेहतर है, हालांकि आंकड़ों में गिरावट आई है। छत्तीसगढ़ में 80.3 फीसदी से घटकर 75.8 फीसदी आंकड़ा आ गया है। गुजरात में छह माह तक के शिशुओं को स्तनपान कराने का प्रतिशत बढ़ गया है। गुजरात में 65 फीसदी से शिशुओं को स्तनपान कराने का आंकड़ा बढक़र 71.04 फीसदी पहुंच गया है। महाराष्ट्र में भी छह माह तक के शिशुओं को स्तनपान कराने का आंकड़ा घटा है। ताजा रिपोर्ट में यह आंकड़ा घटकर 64.7 फीसदी आ गया है, जबकि पूर्व में यह 71 फीसदी था। राजस्थान में इस मामले में ज्यादा गिरावट आई है। पिछली रिपोर्ट में 70 फीसदी 6 माह तक के बच्चों को स्तरपान कराने के आंकड़े सामने आए थे, जो अब घटकर 53.8 फीसदी ही रह गया है। क्या कहते हैं विशेषज्ञ नेशनल हेल्थ मिशन के रिटायर्ड डायरेक्टर डॉ. पंकज शुक्ला कहते हैं कि यह आंकड़े चौंकाने वाले हैं। इस मामले में महिलाओं और परिवार में जागरूकता आनी चाहिए, लेकिन आंकड़े से पता चलता है कि बच्चों की सेहत को लेकर लापरवाही बरती जा रही है। मध्य प्रदेश में पिछले सालों में इन आंकड़ों में बड़ी गिरावट आई है। आंकड़ों से पता चलता है कि प्रदेश में 56.4 फीसदी 6 माह तक के बच्चों को स्तनपान कराया जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह आंकड़ा 55.8 फीसदी है। प्रदेश में शिशु मृत्यु दर में सुधार के लिए इस स्थिति में सुधार लाना होगा। भ्रांतियों की वजह से बिगड़ रहे आंकड़े सीनियर डायटीशियन डॉ. अमिता सिंह कहती हैं कि छह माह तक शिशु के लिए मां का दूध अमृत होता है। कितनी भी गर्मी और ठंड क्यों न हो, मां का दूध अपने आप पानी की मात्रा को कम ज्यादा करता है। हैरानी होगी कि जब शिशु में किसी भी तरह की कमी होती है और जब वह मां के स्तन को चूसता है तो उसके थूक से मां के शरीर में यह सिग्नल जाता है और अपने आप स्तनपान से वह कमी हो जाती है। आंकड़ों में गिरावट के लिए वे कहती हैं कि आमतौर पर जब बच्चा रोता है तो कई बार कहा जाता है कि मां के दूध से उसका पेट नहीं भर रहा और ऐसे में वह बच्चे को बाहर का दूध देने लगते हैं। कई बार गर्मी के समय बच्चों को पानी पिलाते हैं, यह गलत है। इसके लिए भ्रांतियों को दूर करना होगा और छह माह तक बच्चे को मां का दूध ही पिलाना चाहिए। स्तनपान घटने से कमजोर होता है बच्चा डॉ. अमिता सिंह कहती हैं कि छह माह तक के बच्चे को स्तनपान के अलावा अन्य कोई दूध-पानी देने से बच्चे में इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। मां के दूध में बड़ी मात्रा में एंटीबॉडीज होता है, जो बच्चे की इम्युनिटी को बढ़ाता है और उसे जल्दी कोई बीमारी नहीं होती। शुरूआत के 1 साल बच्चे का विकास सबसे तेजी से होता है। इस दौरान बच्चे का शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक विकास होता है। ऐसे में मां के दूध से वंचित होने पर उनमें संक्रमण का खतरा बढ़ता है और बीमार होने उनके विकास में बाधा आती है। रिसर्च के मुताबिक स्तनपान करने वाले बच्चों का दिमागी विकास ज्यादा बेहतर होता है। विनोद / 02 जून 26