देहरादून (ईएमएस)। उत्तराखंड की प्रसिद्ध चारधाम यात्रा के दौरान बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या अब हिमालयी पर्यावरण के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही है। एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, चारधाम यात्रा मार्ग पर श्रद्धालुओं द्वारा लगभग 288 टन प्लास्टिक और अन्य ठोस कचरा छोड़ा गया है, जिससे संवेदनशील हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र पर खतरा बढ़ गया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि यात्रा के दौरान सबसे अधिक कचरा प्लास्टिक की बोतलों, खाद्य पदार्थों की पैकेजिंग, पॉलीथीन और अन्य एकल-उपयोग प्लास्टिक सामग्री के रूप में सामने आया। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि यह कचरा न केवल पहाड़ों की प्राकृतिक सुंदरता को नुकसान पहुंचा रहा है, बल्कि नदियों, वन्यजीवों और स्थानीय जैव विविधता पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है। चारधाम यात्रा में हर वर्ष लाखों श्रद्धालु केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धामों के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। बढ़ती भीड़ के साथ कचरा प्रबंधन की समस्या भी लगातार गंभीर होती जा रही है। पूर्व में भी केदारनाथ क्षेत्र में प्लास्टिक कचरे के ढेर और अव्यवस्थित अपशिष्ट प्रबंधन को लेकर चिंताएं जताई जा चुकी हैं। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो हिमालयी क्षेत्रों में भूस्खलन, जल स्रोतों के प्रदूषण और वन्यजीवों के लिए खतरा और बढ़ सकता है। पर्यावरणविदों ने यात्रा मार्ग पर प्लास्टिक के उपयोग को नियंत्रित करने, कचरा निस्तारण की बेहतर व्यवस्था विकसित करने और श्रद्धालुओं के बीच जागरूकता बढ़ाने की मांग की है। राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन का कहना है कि स्वच्छता अभियान, जुर्माना व्यवस्था और कचरा संग्रहण तंत्र को मजबूत करने के प्रयास किए जा रहे हैं। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि हिमालय की रक्षा के लिए केवल सरकारी प्रयास ही नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं की जिम्मेदार भागीदारी भी उतनी ही जरूरी है। सुबोध/०२-०६-२०२६