राष्ट्रीय
02-Jun-2026


मुंबई, (ईएमएस)। मुंबई के साकीनाका पुलिस स्टेशन की एंटी-नारकोटिक्स टीम ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए गुजरात में संचालित मेफेड्रोन (एमडी) ड्रग्स निर्माण फैक्ट्री का पर्दाफाश किया है। इस मामले में पुलिस ने कथित मास्टरमाइंड वजुल कमर अबुल वफा चौधरी उर्फ पप्पू (54) को गिरफ्तार किया है। जांच के दौरान करीब 75 करोड़ रुपये मूल्य के ड्रग्स, रसायन और निर्माण सामग्री जब्त की गई है। बताया गया है कि पुलिस ने 21 मई को अँधेरी के साकीनाका इलाके से एक 26 वर्षीय महिला को 101 ग्राम मेफेड्रोन के साथ गिरफ्तार किया था। पूछताछ में महिला ने खुलासा किया कि उसे यह ड्रग्स चौधरी से मिला था। इसके बाद पुलिस ने तकनीकी और गुप्त सूचना के आधार पर जांच आगे बढ़ाई और मुख्य आरोपी तक पहुंचने में सफलता हासिल की। जांच में सामने आया कि गिरफ्तार महिला ऐप-आधारित टैक्सी चालक के रूप में काम करती थी और उसी की आड़ में ड्रग्स की सप्लाई करती थी। उसने पुलिस को बताया कि प्रत्येक डिलीवरी के लिए उसे 900 रुपये के बजाय लगभग 1200 रुपये तक का भुगतान मिलता था। महिला ने यह भी स्वीकार किया कि वह पिछले तीन वर्षों से इस अवैध कारोबार में सक्रिय थी। * गुजरात में किराए के मकान में चल रही थी फैक्ट्री पूछताछ के दौरान चौधरी ने खुलासा किया कि उसने गुजरात के नर्मदा जिले के वरखड़ गांव में किराए पर एक मकान लेकर वहां मेफेड्रोन बनाने की फैक्ट्री स्थापित की थी। इसके बाद साकीनाका पुलिस की टीम ने गुजरात में छापा मारकर फैक्ट्री को ध्वस्त कर दिया। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने लगभग 20 किलो तरल मेफेड्रोन, भारी मात्रा में रसायन, ड्रग्स निर्माण में इस्तेमाल होने वाली मशीनें और अन्य सामग्री बरामद की। फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) की जांच में जब्त पदार्थ मेफेड्रोन ही पाया गया। * डोंगरी के आरोपी से सीखा ड्रग्स बनाने का तरीका पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि चौधरी ने मुंबई के डोंगरी क्षेत्र के एक अन्य आरोपी से मेफेड्रोन बनाने की तकनीक सीखी थी। इसके बाद उसने खुद का उत्पादन और वितरण नेटवर्क तैयार कर मुंबई और आसपास के क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर ड्रग्स की सप्लाई शुरू कर दी। * 2001 से अपराध की दुनिया में सक्रिय पुलिस के अनुसार चौधरी एक आदतन अपराधी है और वर्ष 2001 से मादक पदार्थों के अवैध कारोबार से जुड़ा हुआ है। वर्ष 2001 में चरस तस्करी के एक बड़े मामले में उसे गिरफ्तार किया गया था और वह 2011 तक जेल में रहा। इसके बाद वर्ष 2017 में राजस्व आसूचना निदेशालय (डीआरआई) ने उसे 238 किलोग्राम एमडी ड्रग्स मामले में गिरफ्तार किया था। वह 2017 से 2023 तक ठाणे जेल में बंद रहा। जांच एजेंसियों को संदेह है कि वह पिछले छह से सात वर्षों से मेफेड्रोन के निर्माण और वितरण में सक्रिय था। * और गिरफ्तारियां संभव पुलिस अब इस ड्रग्स रैकेट के अन्य सदस्यों, वित्तीय लेन-देन, सप्लाई चेन और नेटवर्क से जुड़े लोगों की तलाश कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि जांच आगे बढ़ने पर इस मामले में कई और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। बहरहाल मुंबई की साकीनाका पुलिस की यह कार्रवाई हाल के वर्षों में मुंबई और गुजरात में ड्रग्स तस्करी के खिलाफ सबसे बड़ी कार्रवाइयों में से एक मानी जा रही है। संजय/संतोष झा- ०२ जून/२०२६/ईएमएस