टीएमसी तोड़ सकते हैं निकाले गए विधायक, बोले- हम असली तृणमूल, 50 से ज्यादा विधायक साथ; नेता विपक्ष हमारा हो, चुनाव चिन्ह भी मिले ममता से छिनेगी तृणमूल कांग्रेस! -ऋतब्रत बनर्जी बनेंगे टीएमसी के शिंदे...ममता बनर्जी ने बुलाई थी बैठक, 80 में से सिर्फ 20 विधायक ही पहुंचे कोलकाता(ईएमएस)। ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस दो गुटों में बंट सकती है। पार्टी से निकाले गए नेता रिजू दत्ता ने दावा किया कि 80 में से 50 से ज्यादा विधायक खुद को असली तृणमूल बताने की तैयारी कर रहे हैं। रिजू ने दावा किया है कि ये सभी विधायक विधानसभा स्पीकर के पास जाएंगे और तीन मुद्दे उठाएंगे। पहला- हमारे पास दो-तिहाई बहुमत है 50 विधायक हमारे साथ हैं। हम ही असली तृणमूल कांग्रेस हैं। दूसरा, विपक्ष के नेता ऋतब्रत होंगे, न कि शोभनदेव। तीसरा, हमारे पास दो-तिहाई बहुमत है, इसलिए चुनाव चिह्न हमारा होना चाहिए। पश्चिम बंगाल की सत्ता बदलते ही ममता बनर्जी के सामने सियासी संकट गहराता जा रहा है। चुनाव में मिली करारी हार के बाद एक-एक करके टीएमसी के पत्ते झड़ते जा रहे हैं। टीएमसी के एक के बाद एक नेता बागी तेवर अपनाता जा रहा है। ममता बनर्जी ने पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा को बाहर का रास्ता दिखा दिया है। टीएमसी से निष्कासित विधायक रि ऋतब्रत बनर्जी क्या अब टीएमसी के एकनाथ शिंदे साबित होंगे? साल 2022 का महाराष्ट्र में जब एकनाथ शिंदे ने शिवसेना से बगावत कर उद्धव ठाकरे के हाथों से सरकार और सियासत दोनों ही छीन ली थी। अब ठीक वैसी ही सियासी स्क्रिप्ट अब पश्चिम बंगाल में लिखे जाने की सुगबुगाहट है। इसके केंद्र में टीएमसी से निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी हैं। नए गुट को मान्यता के लिए 54 विधायकों की जरूरत बंगाल में टीएमसी के 80 विधायक हैं। नए गुट को मान्यता के लिए दो-तिहाई यानी 54 विधायकों की जरूरत होगी। इससे कम विधायक होने पर स्पीकर नए गुट को मान्यता नहीं देंगे। टूट का दावा करने वाले रिजू दत्ता विधायक नहीं है। सोमवार को टीएमसी से निलंबित किए गए 2 विधायक संदीपन साहा और ऋतब्रत बनर्जी ने एमएलए हॉस्टल में टीएमसी के कई विधायकों के साथ मीटिंग की। इसमें ममता के कई खास विधायक भी शामिल हुए। संदीपन साहा और ऋतब्रत बनर्जी का आरोप था कि नेता प्रतिपक्ष बनाने को लेकर विधानसभा अध्यक्ष को भेजे गए प्रस्ताव में उनके फर्जी साइन थे। यह शिकायत करने पर ही दोनों टीएमसी से निकाले गए। टीएमसी के 80 विधायकों में से 60 विधायकों ने ममता बनर्जी की बैठक से दूरी बना ली थी। अब उन्हीं विधायकों से ऋतब्रत बनर्जी की मुलाकात ने बंगाल में सियासी हलचल बढ़ा दी है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या कोई बड़ा खेला होने जा रहा है? इससे पहले विभिन्न नगर निकायों के लगभग 100 टीएमसी पार्षदों ने इस्तीफा दे दिया है। कई टीएमसी नेता की बीजेपी के साथ बातचीत कर रहे हैं। अभिषेक बनर्जी को लेकर विरोध के सुर बंगाल की सत्ता से बाहर होते ही ममता बनर्जी की सियासी चुनौतियां कम होने का नाम नहीं ले रही है। टीएमसी के कार्यकर्ता से लेकर नेता तक का मोहभंग हो रहा है। ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी को लेकर विरोध के सुर टीएमसी में तेज होते जा रहे हैं। टीएमसीके कई नेता और विधायक पार्टी की इस हालत के लिए खुले तौर पर उन्हें ही दोषी ठहरा रहे हैं। वे उन पर भ्रष्टाचार, घमंड, परिवारवाद, सीनियर नेताओं को किनारे करने और आई-पैक के प्रोफेशनल्स के जरिए पार्टी को अपनी जागीर की तरह चलाने का आरोप लगा रहे हैं। टीएमसी के कुछ नेता खुले तौर पर पार्टी पर आरोप लगा रहे हैं कि 15 साल सत्ता में रहने के बाद पार्टी जमीनी हकीकत से कट गई है। सिंडिकेट और कट-मनी (कमीशन) की आदी हो गई है, और हिंसक रूप से अहंकारी हो गई है। वे जवाबदेही और आत्म-मंथन की मांग कर रहे हैं, जिसका ममता बनर्जी ने जिद के साथ विरोध किया है। टीएमसी में टूटने का सबसे खतरा वहीं से आ रहा है जहां से तृणमूल कांग्रेस खड़ी हुई थी, मतलब जमीनी स्तर से विरोध तेज हो गया है। टीएमसी टूटती है, तो 2 संभावनाएं बन सकती हैं पहली दो तिहाई विधायक भाजपा में शामिल हों। टीएमसी के कुल 80 विधायकों में से दो तिहाई (54 विधायक) भाजपा में शामिल होने का फैसला लें। ऐसे में दलबदल कानून नहीं लगेगा। दूसरी टीएमसी में 2 गुटों में बंट जाए। एक ग्रुप पार्टी से अलग होकर असली टीएससी का दावा करे। इसके लिए 54 विधायकों के समर्थन की जरूरत होगी। अगर ऐसा होता है तो बड़े गुट के दावे पर चुनाव आयोग फैसला लेगा। मामला कोर्ट भी जा सकता है। ऋतब्रत बनर्जी बनेंगे टीएमसी के शिंदे टीएमसी के टिकट पर विधायक बने ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा ने अभिषेक बनर्जी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है, जिसके चलते ममता बनर्जी ने दोनों विधायकों को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया है। अब इन्हीं दोनों विधायकों ने टीएमसी के साथ खेला करने की कवायद में जुट गए हैं। टीएमसी के कई विधायकों के साथ ऋतब्रत बनर्जी ने देर रात मुलाकात की है। इससे यह अटकलें तेज हो गई हैं कि टीएमसी के भीतर एक नया समूह आकार ले सकता है। विधायक हॉस्टल में ऋतब्रत बनर्जी से मिलने वालों में पश्चिमी मिदनापुर की एक महिला विधायक भी शामिल थीं। ऋतब्रत और संदीपन से मिलने वाले टीएमसी के एक विधायक के मुताबिक हम पार्टी तोडक़र कोई अलग दल बनाने की कोशिश नहीं कर रहे हैं, हम टीएमसी के झंडे तले ही काम करेंगे। ऐसे में साफ है कि टीएमसी के अंदर कुछ सियासी खिचड़ी जरूर पक रही है। टीएमसी से निष्कासित विधायक जिस तरह से एक्टिव हैं और अभिषेक पर पार्टी को हाईजैक करने का आरोप लगाया, उससे सियासत तेज हो गई है। कुणाल घोष की अपील डूबते जहाज न छोड़े टीएमसी के 80 विधायकों और 29 सांसदों में से आधे से ज्यादा (लगभग 40-45 विधायक और 15-18 सांसद) ममता बनर्जी से अलग होकर दो घास-फूल वाले चुनाव चिह्न के लिए चुनाव आयोग से संपर्क करते हैं, तो यह ममता बनर्जी और उनके भतीजे के पार्टी पर दावे को खारिज करने के लिए काफी हो सकता है। सोमवार को विधायक कुणाल घोष ने टीएमसी नेताओं से हाथ जोडक़र गुज़ारिश की कि वे डूबते जहाज को छोडक़र न भागें, लेकिन ऐसे मुश्किल समय में, उनके नेता को उन पर भी यह भरोसा नहीं है कि वे कोई लाइफबोट छीनकर कूद न जाएं। बंगाल चुनाव के बाद हुई समीक्षा बैठक में कम से कम तीन चुने हुए विधायकों ने खुलकर पार्टी नेतृत्व का विरोध किया। उन्होंने चुनाव में मिली करारी हार के लिए अभिषेक बनर्जी की पसंद को जबरदस्ती थोपे जाने को जिम्मेदार ठहराया। कआलोचना करने वालों में वे दो विधायकों निकाल दिया गया है। तीसरे विधायक, जिनके बारे में कहा जा रहा है कि वे कुणाल घोष हैं। विनोद उपाध्याय / 02 जून, 2026