नई दिल्ली (ईएमएस)। दिल्ली के जल मंत्री प्रवेश ने राजधानी में जल संकट को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि सरकार ड्यूल पाइपिंग सप्लाई सिस्टम, पुराने पाइपलाइनों के नवीनीकरण और भूजल रिचार्ज जैसे उपायों के जरिए पानी की समस्या का स्थायी समाधान करने पर काम कर रही है। देश की राजधानी दिल्ली में जल संकट को लेकर आ रही खबरों के बीच दिल्ली के जल मंत्री प्रवेश वर्मा ने मंगलवार को दिल्ली सचिवालय में एक प्रेस कांफ्रेंस कर स्थिति स्पष्ट की और बताया कि भविष्य में जल संकट का परमानेंट सोल्यूशन करने के सरकार ड्यूअल पाइपिंग सप्लाई सिस्टम पर काम कर रही है। प्रवेश वर्मा ने कहा कि पिछले कुछ दिनों से दिल्ली में पानी की कमी की शिकायत मिली और मीडिया में रिपोर्ट भी आ रही थी। हमारी दिल्ली की जनसंख्या के आधार पर अगर हर व्यक्ति को पूरा 24 घंटे पानी मिले तो 1250 मिलियन गैलन प्रतिदिन (एमजीडी) की जरूरत होती है। हमारी नोर्मल कैपिसिटी 1000 एमजीडी रहती है। कैनाल से हमें 924 क्यूसेक पानी मिलता था। अभी हरियाणा सरकार से बात करके हमें 1000 क्यूसेक पानी मिलने लगा है। यमुना नदी से वजीराबाद जल शोधन संयंत्र (डब्ल्यूटीपी के लिए पानी लिया जाता है, लेकिन इस समय यमुना का जलस्तर कई मीटर नीचे चला गया है। मौजूदा में जलस्तर 668 फीट दर्ज किया गया है, जो सामान्य स्तर से लगभग 5.5 फीट कम है। इसके चलते वहां से केवल सिर्फ 75 क्यूसेक पानी ही प्राप्त हो पा रहा है। प्रवेश वर्मा ने बताया कि स्थिति को देखते हुए डीएसएसबी से पानी को वजीराबाद की ओर डायवर्ट किया गया है, जिससे उसके कैचमेंट क्षेत्र पर भी प्रभाव पड़ा है। गंगा से 253 एमजीडी पानी लेते हैं, 135 एमजीडी बोरवेल से निकालते हैं। जहां लाइन बदली जा रही है या जलापूर्ति लाइनों का निर्माण कार्य चल रहा है, वहां टैंकरों के माध्यम से पानी की आपूर्ति की जा रही है। वहीं जिन क्षेत्रों में अभी तक पाइपलाइन नहीं बिछाई गई है, वहां भी टैंकरों से ही जलापूर्ति की जा रही है। टैंकरों के निर्धारित बिंदुओं और आपूर्ति की संख्या को पिछले वर्ष की तुलना में दोगुना कर दिया गया है। पहले भी सरकार साल में केवल 200 नए बोरवेल लगाती थी हमने पिछले साल 560 बोरवेल लगाए। जहां पानी ठीक मिलता है हम वहां बोरवेल लगाते हैं। अजीत झा/देवेन्द्र/नई दिल्ली/ईएमएस/03/ जून /2026