व्यापार
03-Jun-2026


नई दिल्ली,(ईएमएस)। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक के बीच देश के सबसे बड़े बैंक स्टेट बैंक आफॅ इंडिया (एसबीआई) के चेयरमैन सीएस शेटटी ने संकेत दिया है कि फिलहाल ब्याज दरों में किसी प्रकार का बदलाव न करना अर्थव्यवस्था के लिए अधिक लाभदायक हो सकता है। उनका मानना है कि मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों में दरों को स्थिर रखने से विकास की गति को सहारा मिलेगा और बाजार में भरोसा बना रहेगा। एक कार्यक्रम एसबीआई चैयरमैन सेटी ने कहा कि वित्तीय बाजार भी ब्याज दरों में किसी बड़े बदलाव की उम्मीद नहीं कर रहे हैं। उनके अनुसार महंगाई पर लगातार नजर रखना आवश्यक है, लेकिन वर्तमान समय में ब्याज दरों में स्थिरता बनाए रखना आर्थिक गतिविधियों के लिए सकारात्मक साबित हो सकता है। उन्होंने निवेशकों को सलाह दी कि वे शेयर बाजार के दैनिक उतार-चढ़ाव से प्रभावित होकर निर्णय न लें, बल्कि भारत की दीर्घकालिक विकास संभावनाओं पर ध्यान केंद्रित करें। उन्होंने कहा कि केवल सेंसेक्स के उतार-चढ़ाव को देखने के बजाय देश की व्यापक आर्थिक प्रगति को समझना अधिक महत्वपूर्ण है। एसबीआई चैयरमैन सेटी ने कहा कि वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव, आपूर्ति श्रृंखलाओं में बदलाव, नई तकनीकों का प्रभाव और पूंजी प्रवाह में परिवर्तन जैसी चुनौतियां मौजूद हैं, लेकिन इन परिस्थितियों के बीच भारत निवेश और विकास के लिए एक मजबूत और स्थिर केंद्र के रूप में उभरा है। उन्होंने देश के डिजिटल ढांचे की विशेष तारीफ कर कहा कि यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) भारत की सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल है। उनके अनुसार हर महीने यूपीआई पर करीब 20 अरब लेनदेन होते हैं, जिनमें करीब 30 प्रतिशत हिस्सेदारी एसबीआई की है। उन्होंने कहा कि जन धन खाते, आधार और मोबाइल कनेक्टिविटी पर आधारित जैम (जैम) ढांचा तथा प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) प्रणाली ने वित्तीय समावेशन को नई दिशा दी है। इससे सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे लाभार्थियों तक पहुंच रहा है और पारदर्शिता बढ़ी है। गांवों और छोटे शहरों में बैंकिंग सेवाओं की पहुंच बढ़ने से महिलाओं, छोटे कारोबारियों और ग्रामीण आबादी को विशेष लाभ मिला है। देश में तेजी से विकसित हो रहे बुनियादी ढांचे का उल्लेख कर एसबीआई चैयरमैन ने कहा कि राजमार्ग, हवाई अड्डे, मेट्रो परियोजनाएं, लॉजिस्टिक कॉरिडोर और नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के पीछे बैंकों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। एसबीआई के आंतरिक आकलन के अनुसार भारत को वर्ष 2030 तक लगभग 200 लाख करोड़ रुपये के अतिरिक्त निवेश की आवश्यकता होगी, जबकि बुनियादी ढांचे, विनिर्माण, ऊर्जा परिवर्तन, शहरी विकास, एमएसएमई और नवाचार जैसे क्षेत्रों में करीब 450 लाख करोड़ रुपये का निवेश और करना होगा। आशीष दुबे / 03 जून 2026