राज्य
04-Jun-2026
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- एआई आधारित शिक्षण और ऑनलाइन उपस्थिति व्यवस्था लागू भोपाल (ईएमएस)। मध्य प्रदेश का उच्च शिक्षा विभाग आगामी शैक्षणिक सत्र से विश्वविद्यालयों और उनसे संबद्ध महाविद्यालयों की शिक्षा एवं परीक्षा प्रणाली में व्यापक बदलाव करने जा रहा है। लगभग चार दशक बाद उच्च शिक्षा व्यवस्था में किए जा रहे इन सुधारों को राज्य सरकार की मंजूरी मिल चुकी है। नई व्यवस्था के तहत उत्तर पुस्तिकाओं का शत-प्रतिशत डिजिटल मूल्यांकन, एआई आधारित शिक्षण, ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली तथा विद्यार्थियों की डिजिटल शैक्षणिक पहचान जैसे प्रावधान लागू किए जाएंगे। प्रदेश के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में अध्ययनरत लाखों विद्यार्थियों को नई व्यवस्था का लाभ मिलेगा। उच्च शिक्षा विभाग का मानना है कि इन बदलावों से शिक्षा प्रणाली अधिक पारदर्शी, तकनीक-सक्षम और छात्र-केंद्रित बनेगी। वर्तमान में लागू मूल्यांकन प्रणाली में 30 प्रतिशत अंक आंतरिक मूल्यांकन और 70 प्रतिशत अंक लिखित परीक्षा के लिए निर्धारित हैं। विभाग इस अनुपात को बदलकर 40:60 करने पर विचार कर रहा है। इसके तहत आंतरिक मूल्यांकन को अधिक महत्व मिलेगा, जिससे विद्यार्थियों की नियमित पढ़ाई, प्रोजेक्ट कार्य, प्रेजेंटेशन, सेमीनार और कक्षा में सहभागिता को बढ़ावा मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे विद्यार्थियों को केवल वार्षिक परीक्षा पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा और उनकी समग्र शैक्षणिक क्षमता का बेहतर आकलन संभव होगा। नई व्यवस्था के तहत सभी उत्तर पुस्तिकाओं का शत-प्रतिशत डिजिटल मूल्यांकन किया जाएगा। इससे मूल्यांकन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, तेज और विश्वसनीय बनेगी। साथ ही परिणाम घोषित होने में लगने वाला समय कम होगा तथा मूल्यांकन संबंधी शिकायतों में भी कमी आने की संभावना है। एआई आधारित शिक्षा पर विशेष जोर उच्च शिक्षा विभाग ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) को भविष्य की शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने का निर्णय लिया है। प्रदेश के 67 पीएमश्री महाविद्यालयों में इस वर्ष से एआई आधारित सर्टिफिकेट कोर्स शुरू किए जाएंगे। इन पाठ्यक्रमों में विद्यार्थियों को एआई टूल्स के जिम्मेदार, नैतिक और रचनात्मक उपयोग का प्रशिक्षण दिया जाएगा। विद्यार्थियों की बनेगी अपार आईडी स्कूल शिक्षा की तर्ज पर अब महाविद्यालयों में भी विद्यार्थियों की अपार आईडी तैयार की जाएगी। इसके माध्यम से छात्र का संपूर्ण शैक्षणिक रिकॉर्ड एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध रहेगा। प्रवेश, अंकसूची, प्रमाण-पत्र तथा अन्य शैक्षणिक प्रक्रियाएं इससे अधिक सरल और पारदर्शी बन सकेंगी। ऑनलाइन उपस्थिति होगी अनिवार्य विभाग विद्यार्थियों की उपस्थिति दर्ज करने के लिए सार्थक ऐप आधारित प्रणाली को अनिवार्य बनाने जा रहा है। इससे कॉलेजों में उपस्थिति की निगरानी आसान होगी और विद्यार्थियों की नियमित कक्षाओं में भागीदारी सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। विशेषज्ञों ने बताया छात्रहित में कदम बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. शशांक शेखर के अनुसार उच्च शिक्षा विभाग द्वारा किए जा रहे बदलाव कौशल विकास और छात्र हित की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। उनका कहना है कि नई व्यवस्था में सैद्धांतिक अध्ययन के साथ-साथ व्यावहारिक कार्यों को भी पर्याप्त महत्व मिलेगा। इटारसी गल्र्स कॉलेज के प्रोफेसर डॉ. संजय आर्य का मानना है कि आंतरिक मूल्यांकन के बढ़े हुए महत्व से विद्यार्थियों की रुचि प्रोजेक्ट वर्क, प्रेजेंटेशन और सेमीनार जैसी गतिविधियों में बढ़ेगी, जिससे उनके व्यक्तित्व और कौशल का बेहतर विकास होगा। तकनीकी रूप से सक्षम बनेंगे विद्यार्थी उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि एआई आधारित शिक्षा केवल प्रशासनिक सुधार का माध्यम नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों को वैश्विक अवसरों से जोडऩे का सशक्त साधन भी है। विभाग का लक्ष्य विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों को तकनीकी रूप से अधिक सक्षम बनाना है, ताकि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, गुणवत्ता और दक्षता सुनिश्चित की जा सके। वहीं बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. एस.के. जैन ने कहा कि नई शिक्षा नीति के अनुरूप किए जा रहे ये सुधार विद्यार्थियों के बेहतर भविष्य और रोजगारोन्मुखी शिक्षा के लिए आवश्यक हैं। उनके अनुसार समय के साथ शिक्षा व्यवस्था में बदलाव आज की प्रमुख आवश्यकता बन चुकी है। विनोद / 04 जून 26