राष्ट्रीय
04-Jun-2026
...


टीएमसी को शाह और सुवेंदु तोड़ रहे -ममता से बगावत पर शिवसेना (यूबीटी) नेता का बड़ा आरोप -मनीषा कायंदे ने किया पलटवार मुंबई,(ईएमएस)। पश्चिम बंगाल की राजनीति में जारी घमासान की गूंज अब देश के अन्य राज्यों में भी सुनाई दे रही है। दरअसल तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर उभरे सियासी संकट को लेकर शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर गंभीर आरोप लगाए हैं। राउत ने दावा किया कि टीएमसी के बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी के पास अकेले 60 विधायकों का समर्थन जुटाने का दम नहीं है और इसके पीछे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और पश्चिम बंगाल के नेता सुवेंदु अधिकारी की भूमिका है। यहां बताते चलें कि बुधवार को पश्चिम बंगाल विधानसभा अध्यक्ष रतींद्र नाथ बोस ने टीएमसी के बागी गुट को विधानसभा में विपक्ष की मान्यता प्रदान कर दी। ऋतब्रत बनर्जी ने 60 विधायकों के समर्थन का दावा पेश किया था, जिसे स्वीकार करते हुए उन्हें नेता प्रतिपक्ष का दर्जा दिया गया। विधानसभा में उन्हें कार्यालय भी आवंटित कर दिया गया है। इसके साथ ही बागी गुट की ओर से प्रस्तावित चीफ व्हीप और उपनेता के नामों को भी मंजूरी मिल गई। इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए संजय राउत ने कहा कि बंगाल में वही राजनीतिक रणनीति अपनाई जा रही है, जिसका इस्तेमाल पहले महाराष्ट्र में किया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि पर्दे के पीछे अमित शाह और सुवेंदु अधिकारी सक्रिय हैं और टीएमसी को कमजोर करने का प्रयास कर रहे हैं। राउत ने कहा कि ऋतब्रत बनर्जी कोई इतने बड़े नेता नहीं हैं कि अपने दम पर इतने विधायकों का समर्थन हासिल कर लें। राउत ने महाराष्ट्र की राजनीतिक उठापटक का उल्लेख करते हुए कहा कि जब एकनाथ शिंदे ने बगावत की थी, तब उनके साथ शुरुआत में सीमित संख्या में विधायक थे। बाद में भाजपा नेतृत्व ने समर्थन जुटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उनके अनुसार, पश्चिम बंगाल में भी इसी तरह का राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिल रहा है। ऐसे आरोपों पर ध्यान नहीं देते: मनीषा हालांकि, राउत के आरोपों पर शिवसेना की नेता मनीषा कायंदे ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि आजकल संजय राउत के आरोपों को गंभीरता से नहीं लिया जाता। कायंदे ने कहा कि पहले लोग उनकी बातों पर ध्यान देते थे, लेकिन अब उनके बयान केवल मीडिया की सुर्खियों तक सीमित रह जाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उद्धव ठाकरे की पार्टी खुद अपने विधायकों और नेताओं को एकजुट रखने की स्थिति में नहीं है। बंगाल में टीएमसी के भीतर बढ़ते राजनीतिक संकट और उस पर राष्ट्रीय दलों की प्रतिक्रियाओं ने राज्य की राजनीति को और अधिक गरमा दिया है। आने वाले दिनों में इस घटनाक्रम के और व्यापक राजनीतिक प्रभाव देखने को मिल सकते हैं। हिदायत/ईएमएस 04जून26