राष्ट्रीय
04-Jun-2026
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-भाजपा को लग सकता है दोहरा झटका नई दिल्ली,(ईएमएस)। पंजाब में 2027 विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक हलचल तेज है। हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्‌डा के दावे ने अटकलों को बल दिया है, जिसके अनुसार पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह अपनी पुरानी पार्टी कांग्रेस में वापसी कर सकते हैं। पूर्व सीएम हुड्‌डा ने कहा कि कैप्टन उनके संपर्क में हैं और उन्हें अपना वरिष्ठ साथी बताया, जिससे उनकी वापसी की संभावनाएं बढ़ी हैं। गौरतलब है कि कैप्टन और हुड्‌डा की दोस्ती पुरानी है, इसके बाद हो सकता है कि हुड्‌डा ही कैप्टन की कांग्रेस में वापसी के वाहक बनें। हालांकि, पंजाब भाजपा के प्रवक्ता प्रितपाल सिंह बलियावाल ने दावे को खास तवज्जो न देकर कहा कि केवल संपर्क में होना कोई बड़ी बात नहीं है। उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला और कुमारी सैलजा, तब खुद कहती हैं कि हुड्‌डा किसी के संपर्क में नहीं रहते, इसलिए इस बात के कोई और मायने नहीं निकाले जाने चाहिए। दरअसल कैप्टन अमरिंदर के कांग्रेस में लौटने की इन चर्चाओं को इसलिए भी बल मिला है क्योंकि वे भाजपा के भीतर खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। उन्होंने लगातार कांग्रेस की कार्यप्रणाली की तारीफ की है, जहां उन्हें पंजाब से जुड़े फैसलों में शामिल किया जाता था, जबकि भाजपा में ऊपर से फैसले होते हैं। कैप्टन का कहना है कि वे कांग्रेस में तीन बार अध्यक्ष रहे और हमेशा उनसे सलाह ली जाती थी, लेकिन भाजपा में यह संस्कृति पूरी तरह अलग है। हाल ही में पंजाब भाजपा अध्यक्ष सुनील जाखड़ की नियुक्ति या बठिंडा से ढिल्लों को नया प्रधान बनाने जैसे मामलों पर उनसे कोई राय न लेना इसी असंतोष का एक उदाहरण है। कैप्टन ने कुछ समय पहले खुले तौर पर कहा था कि वे कांग्रेस को मिस करते हैं और कांग्रेस को एक परिवार की तरह मानते हैं। उन्होंने राहुल गांधी द्वारा उनके जन्मदिन और भाई के निधन पर भेजे गए संदेशों का जिक्र कर भाजपा नेतृत्व से इसतहर के किसी भावनात्मक जुड़ाव की कमी पर निराशा व्यक्त की थी। इसके अलावा, कैप्टन अकाली दल के साथ गठबंधन के पक्ष में हैं, जबकि भाजपा ने पंजाब की सभी 117 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने की घोषणा कर रखी है, जो उनके विचारों में एक और बड़ा अंतर दिखाता है। यह घटनाक्रम तब हुआ है, जब तमिलनाडु भाजपा के पूर्व अध्यक्ष अन्नामलाई के भी पार्टी से इस्तीफा देने और नया दल बनाने की अटकलें तेज हैं। भले ही उनका इस्तीफा अभी तक स्वीकार नहीं हुआ है, लेकिन दोनों घटनाएँ भाजपा के भीतर बड़े चेहरों की संभावित नाराजगी और उनके बाहर निकलने की ओर इशारा करती हैं, जो पार्टी के लिए एक चुनौती बन सकती है। आशीष दुबे / 04 जून 2026