राज्य
04-Jun-2026


पटना, (ईएमएस)। जद (यू) के प्रदेश प्रवक्ता डॉ.निहोरा प्रसाद यादव ने जारी बयान में कहा कि मुख्यमंत्री चिकित्सा सहायता कोष, गंभीर एवं असाध्य बीमारियों से पीड़ित आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए जीवनरक्षक सहारा बनकर उभरी है। नीतीश कुमार के शासनकाल में 2006-07 में शुरू की गई इस योजना का मूल उद्देश्य यह सुनिश्चित करना रहा है कि किसी भी गरीब परिवार को आर्थिक अभाव के कारण गंभीर बीमारी के इलाज से वंचित न होना पड़े। नीतीश कुमार ने हमेशा यह माना है कि स्वास्थ्य सेवा किसी व्यक्ति की आर्थिक स्थिति पर नहीं, बल्कि उसके अधिकार पर आधारित होनी चाहिए। यही कारण है कि राज्य की वर्तमान एनडीए सरकार ने इस योजना का दायरा बढ़ाते हुए अधिक से अधिक जरूरतमंद लोगों को इसका लाभ पहुंचाने का फैसला लिया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सरकार ने इस योजना के तहत आय सीमा को बढ़ाकर ढाई लाख रुपये से चार लाख रुपये वार्षिक कर दिया है। यह निर्णय इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं को गरीब और मध्यम आय वर्ग के परिवारों तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। बढ़ी हुई आय सीमा के कारण अब बड़ी संख्या में ऐसे परिवार भी सहायता के दायरे में आए हैं जो गंभीर बीमारी की स्थिति में इलाज का खर्च वहन करने में कठिनाई महसूस करते हैं। बिहार के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग यह सुनिश्चित कर रहा है कि पात्र मरीजों को समय पर सहायता मिले और सरकारी योजनाओं का लाभ बिना किसी भेदभाव के जरूरतमंदों तक पहुंचे। राज्य सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार, इलाज की बेहतर व्यवस्था और गरीब मरीजों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। इस योजना के तहत पिछले लगभग डेढ़ वर्ष में करीब 55 हजार से अधिक जरूरतमंद मरीजों को 400 करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई गई है। यह केवल आंकड़े नहीं हैं, बल्कि हजारों परिवारों के जीवन में आई राहत, आशा और विश्वास की कहानी हैं। जिन परिवारों के सामने गंभीर बीमारी के कारण आर्थिक संकट खड़ा हो जाता था, उनके लिए यह योजना संबल और सुरक्षा कवच का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि सुशासन का अर्थ केवल विकास कार्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि आम नागरिक के दुख-दर्द में सहभागी बनना भी है। मुख्यमंत्री चिकित्सा सहायता कोष इसी मानवीय सोच और जनकल्याणकारी दृष्टिकोण का सशक्त उदाहरण है। राज्य सरकार आगे भी यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि बिहार का कोई भी नागरिक आर्थिक तंगी के कारण बेहतर इलाज से वंचित न रहे और स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ समाज के सबसे कमजोर वर्ग तक पहुंचे। संतोष झा- ०४ जून/२०२६/ईएमएस