* कचरा प्रबंधन विषय पर उत्कृष्ट कार्य के लिए देश की शीर्ष 25 विद्यालयों में बनाई जगह, मिला रु. 50,000 का पुरस्कार अहमदाबाद (ईएमएस)| विप्रो फाउंडेशन द्वारा देशभर में स्थानीय संस्थाओं के सहयोग से पर्यावरण आधारित परियोजनाएँ संचालित की जाती हैं। वर्ष 2025 के विप्रो अर्थियन अवॉर्ड के लिए जल, जैव-विविधता और कचरा प्रबंधन की तीन अलग-अलग थीमों पर देशभर की लगभग 2000 विद्यालयों ने भाग लिया था। गुजरात में सेंटर फॉर एनवायरनमेंट एजुकेशन (सीईई) द्वारा शिक्षकों को जल, जैव-विविधता और कचरा प्रबंधन जैसे विषयों पर प्रशिक्षण प्रदान किया गया। प्रशिक्षण के बाद साचणा प्राथमिक विद्यालय ने अहमदाबाद जिले के लिए निर्धारित ‘वेस्ट मैनेजमेंट’ थीम पर गंभीरता से कार्य आरंभ किया। विद्यालय ने इस परियोजना के लिए वैज्ञानिक एवं व्यवस्थित दृष्टिकोण अपनाया। ‘वेस्ट मैनेजमेंट’ विषय पर कार्य करते हुए शिक्षिका रूपमबाला कासुंद्रा ने सबसे पहले विद्यालय में ‘पर्यावरण संरक्षण समिति’ की स्थापना की। “कचरा गंदगी नहीं, बल्कि एक संसाधन है” इस विचार को केंद्र में रखकर विद्यार्थियों ने विद्यालय और गांव स्तर पर ‘कचरे की खोज’ अभियान चलाया। बच्चों ने सूखे और गीले कचरे का वर्गीकरण किया तथा विद्यालय परिसर में जैव-विघटन संबंधी प्रयोग किए। गीले कचरे से वैज्ञानिक पद्धति द्वारा उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद तैयार की गई, जिससे भूमि की उर्वरता बढ़ाने में सहायता मिली। यह पूरा प्रकल्प पुस्तक आधारित शिक्षा के बजाय अनुभवात्मक शिक्षण पर आधारित था। लगभग तीन माह की कठोर मेहनत के बाद तैयार विस्तृत रिपोर्ट ऑनलाइन प्रस्तुत की गई। उल्लेखनीय है कि गुजरात से विभिन्न थीमों के अंतर्गत लगभग 250 रिपोर्टें प्रस्तुत की गई थीं। राष्ट्रीय स्तर पर तीनों थीमों के अंतर्गत प्राप्त लगभग 2000 प्रविष्टियों में से केवल 25 विद्यालयों को विजेता घोषित किया गया। इनमें जैव-विविधता थीम में 9 विद्यालय, जल थीम में 6 विद्यालय तथा वेस्ट मैनेजमेंट थीम में 10 विद्यालय शामिल थे। इन्हीं में गुजरात का साचणा प्राथमिक विद्यालय भी वेस्ट मैनेजमेंट श्रेणी में विजेता चुना गया। जनवरी 2026 में बेंगलुरु में आयोजित भव्य समारोह में विद्यालय के पांच विद्यार्थियों और मार्गदर्शक शिक्षिका को आमंत्रित कर सम्मानित किया गया तथा विद्यालय को रु. 50,000 की पुरस्कार राशि भी प्रदान की गई। विद्यालय की अन्य पर्यावरणीय गतिविधियाँ साचणा विद्यालय की यह पहल केवल कचरा निपटान तक सीमित नहीं रही, बल्कि व्यापक सामाजिक परिवर्तन का माध्यम बनी। विद्यार्थियों ने गांव के बुजुर्गों और किसानों के साक्षात्कार लेकर पारंपरिक और आधुनिक ज्ञान का समन्वय किया। उन्होंने लोगों को सिंगल-यूज प्लास्टिक के उपयोग को कम करने और पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया। विद्यालय एवं गांव में निम्नलिखित गतिविधियाँ निरंतर संचालित की जा रही हैं - 3 आर मंत्र का प्रभावी क्रियान्वयन कचरा कम करना, पुनः उपयोग तथा पुनर्चक्रण को लोगों की दैनिक जीवनशैली का हिस्सा बनाया गया। प्लास्टिक मुक्त विद्यालय विद्यालय के विद्यार्थी प्लास्टिक पैकेट में आने वाले नाश्ते को विद्यालय नहीं लाते और प्लास्टिक के न्यूनतम उपयोग के लिए समाज को जागरूक करते हैं। ‘वेस्ट से बेस्ट’ अभियान अनुपयोगी वस्तुओं एवं खाली बोतलों से सुंदर और उपयोगी कलाकृतियाँ बनाकर बच्चों की रचनात्मकता को प्रोत्साहित किया जाता है। जन-जागरूकता अभियान पर्यावरण एवं स्वच्छता विषय पर रंगोली, चित्रकला और वक्तृत्व प्रतियोगिताएँ आयोजित की जाती हैं। साथ ही गांव में स्वच्छता रैलियाँ निकाली जाती हैं। विद्यार्थी विद्यालय में स्वअनुशासन विकसित करते हुए अनावश्यक विद्युत उपयोग को रोकते हैं तथा आवश्यकता न होने पर कक्षाओं के पंखे और लाइटें स्वयं बंद करते हैं। इस पर्यावरणीय आंदोलन के विस्तार हेतु शिक्षिका और पाँच विद्यार्थियों की टीम ने आसपास की अन्य विद्यालयों—ओगण प्राथमिक विद्यालय, अभेसंगपुरा प्राथमिक विद्यालय तथा कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (KGBV) में भी पर्यावरण एवं प्रकृति शिक्षा संबंधी कार्यक्रम आयोजित कर विद्यार्थियों को जागरूक किया। प्रतिष्ठित संस्थाओं का सहयोग और सम्मान साचणा प्राथमिक विद्यालय की उल्लेखनीय उपलब्धियों को देखते हुए अनेक प्रतिष्ठित पर्यावरणीय और सामाजिक संस्थाओं ने इसकी गतिविधियों की सराहना की है। विद्यालय को राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर पहचान दिलाने में सेंटर फॉर एनवायरनमेंट एजुकेशन (सीईई), अहमदाबाद, गीर फाउंडेशन, विप्रो फाउंडेशन तथा एचसीएल फाउंडेशन जैसी संस्थाओं का महत्वपूर्ण मार्गदर्शन प्राप्त हुआ है। इन संस्थाओं के सहयोग से विद्यालय को कई गौरवपूर्ण सम्मान प्राप्त हुए हैं— गीर फाउंडेशन द्वारा चयनित विद्यालयों में स्थान प्राप्त कर विद्यालय के 50 विद्यार्थियों ने हिंगोलगढ़ प्रकृति शिक्षा अभयारण्य में तीन दिवसीय प्रकृति शिक्षा शिविर में भाग लिया तथा प्लास्टिक कचरा कम करने की परियोजना के लिए विशेष प्रोत्साहन अनुदान प्राप्त किया। विद्यालय की गतिविधियों को वर्ल्ड वाइड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में स्थान मिला। एचसीएल फाउंडेशन के जीईएनसीएएन प्रोजेक्ट के अंतर्गत राज्य स्तर पर उत्कृष्ट पर्यावरण मित्र के रूप में विशेष सम्मान एवं प्रमाणपत्र प्राप्त हुआ। इसके अतिरिक्त हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड के स्वच्छ आदत प्रमाणपत्र, नॉलेज वैली फाउंडेशन के गुजरात शाश्वत सम्मान तथा जिला एवं जोन स्तर के इनोवेशन मेले में प्रथम स्थान सहित अनेक प्रतिष्ठित पुरस्कार विद्यालय और शिक्षिका रूपमबाला कासुंद्रा को प्राप्त हुए हैं। उनके मार्गदर्शन में विद्यालय ने जिला स्तरीय इनोवेशन मेले में प्रथम स्थान प्राप्त कर जोन स्तर पर भी उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। प्रेरणादायी संदेश कचरे के उचित प्रबंधन जैसा छोटा कदम यदि सामूहिक संकल्प बन जाए, तो वह पृथ्वी को बचाने का बड़ा आंदोलन बन सकता है। साचणा प्राथमिक विद्यालय ने इसका जीवंत उदाहरण प्रस्तुत किया है। “मैं बदलूँगा तो पर्यावरण बदलेगा, हम बदलेंगे तो पृथ्वी बचेगी” के मंत्र के साथ शिक्षिका रूपमबाला कासुंद्रा का दृढ़ संकल्प और विद्यार्थियों का समर्पण यह सिद्ध करता है कि दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्र की एक सरकारी विद्यालय भी इच्छाशक्ति और नवाचार के बल पर वैश्विक स्तर का परिवर्तन ला सकती है। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर साचणा विद्यालय की यह प्रेरक सफलता देश की प्रत्येक शैक्षणिक संस्था के लिए एक प्रकाशस्तंभ के समान है। सतीश/04 जून