क्षेत्रीय
05-Jun-2026
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बालोद(ईएमएस)। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने सेवा में कमी और उपभोक्ता के साथ अनुचित व्यवहार के एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए लिफ्ट लगाने वाली कंपनी के संचालक को लाखों रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया है। आयोग के इस फैसले की जिले के व्यावसायिक और कारोबारी वर्ग में व्यापक चर्चा हो रही है। मामला दल्लीराजहरा स्थित होटल स्टील सिटी से जुड़ा है। होटल संचालक प्रवीण कुमार जैन ने लिफ्ट स्थापना और रखरखाव में कथित लापरवाही को लेकर सावी एलीवेटर के संचालक पूरन साहू के खिलाफ जिला उपभोक्ता आयोग में परिवाद प्रस्तुत किया था। परिवाद के अनुसार होटल में दो लिफ्ट लगाने के लिए करीब सात लाख रुपये का भुगतान किया गया था। शिकायत में कहा गया कि पूरी राशि प्राप्त करने के बावजूद कंपनी द्वारा केवल एक लिफ्ट स्थापित की गई, जबकि दूसरी लिफ्ट नहीं लगाई गई। इसके साथ ही दो वर्ष की वारंटी, नि:शुल्क सर्विस और खराबी आने पर मरम्मत का आश्वासन भी दिया गया था, लेकिन इन वादों का पालन नहीं किया गया। होटल संचालक का आरोप था कि स्थापित लिफ्ट में लगातार तकनीकी खराबियां आती रहीं। कई बार शिकायत करने के बावजूद कंपनी ने समस्या का समाधान नहीं किया। अंततः उन्हें अन्य तकनीशियनों की मदद से मरम्मत करानी पड़ी, जिससे अतिरिक्त आर्थिक भार भी उठाना पड़ा। बाद में दूसरी कंपनी से संपर्क कर नया लिफ्ट स्थापित कराया गया। मामले में यह भी सामने आया कि दोनों पक्षों के बीच कोई औपचारिक लिखित अनुबंध नहीं हुआ था। हालांकि लिफ्ट के हैंडओवर के समय 24 माह की वारंटी और फ्री सर्विस का उल्लेख किया गया था। शिकायतकर्ता ने पुलिस में आवेदन देने के साथ ही विधिक नोटिस भी भेजा, लेकिन कथित तौर पर कंपनी की ओर से कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। सुनवाई के दौरान आयोग ने माना कि उपभोक्ता से राशि प्राप्त करने के बाद सेवा और वारंटी संबंधी दायित्वों का निर्वहन नहीं करना सेवा में कमी की श्रेणी में आता है। आयोग ने यह भी कहा कि केवल लिखित अनुबंध का हवाला देकर गारंटी और वारंटी संबंधी जिम्मेदारियों से बचना उपभोक्ता के साथ अनुचित व्यवहार माना जाएगा। सभी तथ्यों और प्रस्तुत साक्ष्यों पर विचार करने के बाद जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने परिवाद को आंशिक रूप से स्वीकार किया। आयोग ने विरोधी पक्षकार को निर्देश दिया है कि वह 45 दिनों के भीतर शिकायतकर्ता को 4 लाख 72 हजार रुपये की राशि लौटाए। इसके अलावा मानसिक प्रताड़ना के लिए 20 हजार रुपये तथा वाद व्यय के रूप में 5 हजार रुपये का भुगतान भी किया जाए। आयोग ने यह भी आदेश दिया कि परिवाद प्रस्तुत किए जाने की तिथि से भुगतान होने तक उक्त राशि पर 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी अदा किया जाए। सत्यप्रकाश(ईएमएस)05 जून 2026