* 25 दिन की उम्र में कुत्ते के हमले के शिकार बच्चे का 12 वर्ष बाद सफल जननांग पुनर्निर्माण, डॉक्टरों की टीम ने रचा इतिहास अहमदाबाद (ईएमएस)| मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के मार्गदर्शन तथा स्वास्थ्य राज्य मंत्री प्रफुल पानशेरिया के नेतृत्व में गुजरात सरकार की प्रजानोन्मुखी स्वास्थ्य नीति और सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा सेवाओं का एक उत्कृष्ट उदाहरण एक बार फिर अहमदाबाद के सिविल अस्पताल में देखने को मिला है। सिविल अस्पताल के बाल रोग (पीडियाट्रिक सर्जरी) विभाग के विशेषज्ञ चिकित्सकों ने एक अत्यंत जटिल और दुर्लभ सर्जरी कर उत्तर प्रदेश के एक साधारण किसान परिवार के 12 वर्षीय बालक को नया जीवन दिया है। मात्र 25 दिन की नवजात अवस्था की उम्र में कुत्ते के हमले का शिकार बने इस बच्चे के जननांग का 12 वर्ष बाद सफल रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी द्वारा फिर से सामान्य किया गया। स्वास्थ्य राज्य मंत्री प्रफुल पानशेरिया ने भी इस अनूठी उपलब्धि के लिए सिविल की पूरी मेडिकल टीम को बधाई देते हुए कहा कि गुजरात सरकार के आधुनिक इन्फ्रास्ट्रक्चर के कारण ही आज देश और दुनिया भर के मरीजों को ऐसी जटिल चिकित्सा सेवाएं पूरी तरह नि:शुल्क उपलब्ध हो रही हैं। उत्तर प्रदेश के आगरा निवासी सुरेश यादव का पुत्र जब मात्र 25 दिन का था, तब एक कुत्ते ने उस पर हमला कर उसके बाह्य जननांग को गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त कर दिया था। जैसे-जैसे बच्चे की उम्र बढ़ती गई, उसकी परेशानियां भी असहनीय होती गईं। बच्चे को पेशाब करने में अत्यंत कठिनाई होती थी और उसके जननांग का विकास पूरी तरह रुक गया था। कई स्थानों पर उपचार कराने के बावजूद कोई स्थायी समाधान नहीं मिला। अंततः यह परिवार उम्मीद लेकर अहमदाबाद सिविल अस्पताल पहुंचा। बच्चे को 1 मई, 2026 को भर्ती किए जाने के बाद सिविल अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक एवं बाल रोग सर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ. राकेश जोशी ने जांच की। जांच में पता चला कि बच्चे के दोनों वृषण (टेस्टिस) अनुपस्थित थे, लिंग अंदर की ओर दब गया था तथा मूत्रमार्ग का छिद्र अत्यंत संकरा हो गया था। सभी चुनौतियों के बावजूद 6 मई, 2026 को डॉ. राकेश जोशी और प्रोफेसर डॉ. जयश्री रामजी के नेतृत्व में तथा एनेस्थीसिया विभाग की डॉ. मृणालिनी और उनकी टीम की देखरेख में जटिल जननांग पुनर्निर्माण सर्जरी (जेनिटल रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी) के साथ डायग्नोस्टिक लैप्रोस्कोपी सफलतापूर्वक की गई। 14 दिनों की सघन देखरेख के बाद जब कैथेटर (पेशाब की नली) हटाई गई, तब बच्चे ने बिना किसी पीड़ा के सामान्य रूप से पेशाब किया। वर्षों बाद अपने बेटे को सामान्य स्थिति में देखकर पिता की आंखों में खुशी के आंसू आ गए और उन्होंने गुजरात सरकार तथा सिविल अस्पताल के चिकित्सकों का हृदय से आभार व्यक्त किया। सतीश/06 जून