इंदौर (ईएमएस)। मध्य प्रदेश में इंदौर-इच्छापुर हाईवे और ओंकारेश्वर से उज्जैन तक प्रस्तावित कॉरिडोर के किनारे जमीन खरीदने वाले निवेशकों की चिंता बढ़ गई है। हाईवे परियोजना के शुरू होने से पहले जिन लोगों ने बड़े व्यावसायिक मुनाफे की उम्मीद में करोड़ों रुपये निवेश किए थे, अब उनके सामने निवेश डूबने का खतरा मंडराने लगा है। दरअसल, राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे किसी भी व्यावसायिक गतिविधि के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण से प्रवेश अनुमति लेना अनिवार्य है। बिना अनुमति के बनाए गए व्यापारिक प्रतिष्ठानों के लाइसेंस निरस्त किए जा सकते हैं और कार्रवाई भी हो सकती है। नियमों के अनुसार टोल प्लाजा, हाईवे कट, पुल-पुलिया, चौराहे, सर्विस रोड, हाईटेंशन लाइन और बस स्टॉप से निर्धारित दूरी बनाए रखना जरूरी है। इन्हीं नियमों के चलते बलवाड़ा और आसपास के क्षेत्रों की कई जमीनें प्रभावित हो रही हैं। वहीं बलवाड़ा से ओंकारेश्वर की ओर बड़वाह बाईपास क्षेत्र में स्थित कई भूखंड हाईवे जंक्शन, सर्विस रोड और हाईटेंशन लाइन की जद में आ गए हैं। इसके अलावा प्रस्तावित आशापुर-खरगोन हाईवे के चौराहे के कारण भी अनुमति मिलने की संभावना बेहद कम बताई जा रही है। बड़वाह बाईपास स्थित एचपी पेट्रोल पंप और एसोसिएट ब्रेवरीज के आसपास खरीदी गई जमीनों पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि नियमों की अनदेखी कर जमीन खरीदने वाले निवेशकों को अब भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। हाईवे किनारे निवेश से पहले कानूनी और तकनीकी नियमों की जांच जरूरी मानी जा रही है। सुबोध/०६-०६-२०२६