राज्य
06-Jun-2026
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:: दशा नीमा समाज के भागवत ज्ञान यज्ञ में धूमधाम से मनाया चुनरी मनोरथ और नौका विहार उत्सव :: इंदौर (ईएमएस)। भक्ति और धर्म एक-दूसरे के पर्याय एवं पूरक हैं। वही भक्ति और सेवा सार्थक होगी जिसमें सबके कल्याण और भलाई का भाव होगा। मन, वचन और कर्म से जीव मात्र के प्रति करुणा, दया और स्नेह का मनोरथ ही हमें धर्म और नीति के रास्ते से मोक्ष की मंजिल तक पहुंचा सकता है। कृष्ण और सुदामा की मित्रता पूरे विश्व के लिए अनुकरणीय है, लेकिन आज के दौर में ऐसे सच्चे मित्र मिलना बहुत मुश्किल है। भागवत कथा केवल एक कान से सुनकर दूसरे से निकालने के लिए नहीं, बल्कि अपने जीवन में उतारने के लिए है। यह दिव्य विचार प्रख्यात भागवतभूषण आचार्य पं. आदित्य मुखिया ने शनिवार को व्यक्त किए। वे श्री दशा नीमा पंचायत ट्रस्ट द्वारा मालगंज चौराहा स्थित नवश्रृंगारित धर्मशाला भवन पर आयोजित भागवत ज्ञान यज्ञ में कृष्ण-सुदामा मैत्री प्रसंग की व्याख्या कर रहे थे। ट्रस्ट के हीरक जयंती महोत्सव एवं पुरुषोत्तम मास के उपलक्ष्य में गत 31 मई से चल रहे इस कथा महोत्सव में शनिवार को श्रद्धा का सैलाब उमड़ पड़ा। :: यमुनाजी को चढ़ाई चुनरी, ठाकुरजी ने किया नौका विहार :: कथा के दौरान शनिवार को चुनरी महोत्सव और नौका विहार का विशेष मनोरथ धूमधाम से मनाया गया। इस दौरान यमुना जी को चुनरी ओढ़ाई गई। साथ ही पंडाल में एक विशेष कुंड बनाकर भगवान को नौका विहार कराने की जीवंत झांकी सजाई गई, जो भक्तों के बीच आकर्षण का मुख्य केंद्र रही। इससे पूर्व व्यास पीठ का पूजन दशा नीमा पंचायत के अध्यक्ष दिलीप नीमा, वल्लभ नीमा, विपिन नीमा, विजय कोटावाला और राजेश नीमा आदि ने किया। कथा के समापन अवसर पर भागवतभूषण आचार्य पं. मुखिया का शहर के वैष्णव एवं नीमा समाज की ओर से शॉल-श्रीफल भेंट कर भव्य अभिनंदन किया गया। यह सम्मान ट्रस्ट के अध्यक्ष सत्यनारायण नीमा, संयोजक सतीश नीमा मालक, मंत्री कमल नीमा, वरिष्ठ ट्रस्टी महेश नीमा गामा और सतीश नीमा आदि ने किया। प्रारंभ में विद्वान वक्ता की अगवानी कमल नीमा, शम्भू कुमार नीमा एवं अजय नीमा अलंकार ने की। :: सेठ और नीमा परिवार को मरणोपरांत सम्मान :: ट्रस्ट के मंत्री कमल नीमा ने बताया कि इस समापन समारोह में समाज में अनुकरणीय सेवाएं देने वाले दिवंगत नारायण सेठ एवं प्रह्लाद नीमा अलंकार को मरणोपरांत समाज गौरव से नवाजा गया। आचार्य पं. मुखिया के हाथों दोनों परिवारों के सदस्यों को प्रशस्ति पत्र भेंटकर सम्मानित किया गया। :: आधुनिक शासकों को कृष्ण-सुदामा से प्रेरणा लेने की जरूरत :: विद्वान वक्ता ने सुदामा चरित्र की व्याख्या करते हुए कहा कि सुदामा की भक्ति नि:स्वार्थ थी। वे द्वारकाधीश से कुछ मांगने नहीं, बल्कि केवल मिलने गए थे। सुख-दुख जीवन के चक्र हैं, लेकिन स्वाभिमानी सुदामा अपने निश्चय से कभी नहीं भटके। कृष्ण-सुदामा की मैत्री राजा और रंक के मिलन का ऐसा अनूठा प्रतीक है, जिससे हमारे आधुनिक शासकों को भी प्रेरणा लेनी चाहिए। जिसके मित्र स्वयं भगवान हों, वह कभी दरिद्र हो ही नहीं सकता। भागवत कथा मनुष्य को सत्य की राह पर लाकर उसकी आंतरिक कमियों से मुक्ति दिलाती है। प्रकाश/06 जून 2026