क्षेत्रीय
08-Jun-2026
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बिलासपुर (ईएमएस)। टिकरापारा स्थित प्रभु दर्शन भवन में रविवार को आयोजित विशेष अव्यक्त महावाक्य क्लास में ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी ने कहा कि वर्तमान समय में आत्मिक सुख और शांति का आधार सरलता, सहनशीलता तथा पर-उपकार की भावना है। जो व्यक्ति व्यर्थ बातों पर तुरंत फुलस्टॉप लगाना सीख लेता है और सभी के प्रति शुभभावना रखता है, वह सहज रूप से नकारात्मकताओं पर विजय प्राप्त कर सदैव प्रसन्न रहता है। उन्होंने कहा कि माया कोई बाहरी शक्ति नहीं, बल्कि वे नकारात्मक विचार और परिस्थितियां हैं जो व्यक्ति को श्रेष्ठ कर्म करने से रोकती हैं। यदि मनुष्य स्वयं को विश्व मंच का खिलाड़ी समझकर साक्षी भाव से जीवन को देखे तो बड़ी से बड़ी समस्या भी छोटी प्रतीत होने लगती है। मंजू दीदी ने कहा कि हम सभी आत्माएं सृष्टि रूपी विश्व-वृक्ष के पूर्वज हैं। जिस प्रकार वृक्ष की जड़ें पूरे वृक्ष का पोषण करती हैं, उसी प्रकार श्रेष्ठ आत्माओं का कर्तव्य है कि वे अपने सकारात्मक संकल्पों और शुभ भावनाओं से विश्व को सुख, शांति और शक्ति का अनुभव कराएं। वर्तमान समय में विश्व अशांति और तनाव से जूझ रहा है, ऐसे में पर-उपकार की भावना ही सच्ची सेवा है। उन्होंने कहा कि स्वभाव की सरलता व्यक्ति को माया के आकर्षण से सुरक्षित रखने वाला आध्यात्मिक कवच है। सरल और सहनशील व्यक्ति पुरानी बातों को मन में नहीं रखता, बल्कि तुरंत फुलस्टॉप लगाकर आगे बढ़ जाता है। इससे मन व्यर्थ संकल्पों से मुक्त रहता है और जीवन में खुशी बनी रहती है। कार्यक्रम में उपस्थित श्रद्धालुओं को प्रतिदिन अपने कर्मों का आत्मचिंतन करने तथा मन को हल्का और सकारात्मक बनाए रखने की प्रेरणा भी दी गई। क्या है माया की वास्तविक परिभाषा? मंजू दीदी ने कहा कि माया का अर्थ केवल बाहरी आकर्षण नहीं है। क्रोध, अहंकार, ईष्र्या, नकारात्मक सोच और व्यर्थ चिंतन भी माया के ही स्वरूप हैं, जो व्यक्ति को श्रेष्ठ कर्मों से दूर ले जाते हैं। विश्व-वृक्ष की जड़ों जैसी बनें आत्माएं उन्होंने बताया कि जैसे जड़ें पूरे वृक्ष को जीवन देती हैं, वैसे ही श्रेष्ठ आत्माएं अपने शुभ संकल्पों और सकारात्मक ऊर्जा से समाज और विश्व में शांति का वातावरण बना सकती हैं। प्रतिदिन करें कर्मों का पोतामेल बीके मंजू दीदी ने कहा कि दिन समाप्त होने से पहले अपने कर्मों और विचारों का आत्ममंथन करना चाहिए। इससे मन हल्का रहता है, गलतियों में सुधार होता है और जीवन में सकारात्मकता बढ़ती है। मनोज राज 08 जून 2026