- ममता के वफादारों का पलटवार, कहा- नंबर गेम में फेल है काकोली गुट - दलबदल कानून से बचने के लिए 19 सांसदों के समर्थन की जरूरत - बीजेपी नेता भूपेंद्र यादव के घर गए थे केवल 13 सांसद कोलकाता (ईएमएस)। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन न होने के बाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) अब तक के सबसे बड़े राजनीतिक संकट से घिर गई है। पार्टी की वरिष्ठ सांसद काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में सांसदों के एक बड़े धड़े ने बगावती तेवर अख्तियार कर लिए हैं और उनके बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन के करीब जाने के साफ संकेत मिल रहे हैं। राजनीतिक गलियारों से आ रही खबरों के मुताबिक, काकोली घोष दस्तीदार ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को एक पत्र भी भेजा है। इस पत्र में उन्होंने दावा किया है कि टीएमसी के कुल 28 सांसदों में से 20 सांसद एनडीए में शामिल होने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। इस बड़ी बगावत के बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ पार्टी के कई दिग्गज और वफादार नेता पूरी मजबूती से खड़े नजर आ रहे हैं। इनमें महुआ मोइत्रा, सौगत रॉय और कीर्ति आजाद जैसे बड़े नाम शामिल हैं, जो ममता बनर्जी के समर्थन में लगातार मोर्चेबंदी कर रहे हैं। हालांकि, पार्टी के कई सांसद ऐसे भी हैं जिन्होंने अभी तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं और वे पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं। इस पूरे संकट में सबसे ज्यादा चर्चा आसनसोल के सांसद और बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा की रहस्यमयी चुप्पी को लेकर हो रही है। अपने बेबाक बयानों और मशहूर खामोश डायलॉग के लिए जाने जाने वाले शत्रुघ्न सिन्हा ने अब तक न तो बागी गुट का समर्थन किया है और न ही ममता बनर्जी के पक्ष में कोई बयान जारी किया है, जिससे राजनीतिक हलकों में अटकलों का बाजार बेहद गर्म है। गौरतलब है कि शत्रुघ्न सिन्हा का राजनीतिक सफर काफी हद तक उनके साथी सांसद कीर्ति आजाद जैसा ही रहा है। दोनों नेताओं ने बीजेपी और कांग्रेस का सफर तय करने के बाद आखिरकार टीएमसी का दामन थामा था और ममता बनर्जी के भरोसे व प्रवासी वोटरों के दम पर बंगाल की राजनीति में अपनी नई जमीन तैयार की थी। तकनीकी तौर पर देखें तो दलबदल विरोधी कानून के तहत अपनी लोकसभा सदस्यता बचाए रखने के लिए काकोली घोष दस्तीदार और उनके बागी गुट को कम से कम दो-तिहाई यानी 19 सांसदों के समर्थन की जरूरत है। नियमों के मुताबिक, यदि किसी पार्टी के दो-तिहाई सांसद दूसरी पार्टी में विलय के लिए सहमत होते हैं, तभी वे अयोग्यता से बच सकते हैं। काकोली गुट जहां 20 सांसदों के साथ होने का दावा कर रहा है, वहीं दिल्ली में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के आवास पर बागी सांसदों की एक अहम बैठक भी हुई है। दूसरी तरफ, ममता बनर्जी के वफादार खेमे ने इस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया है। बर्धमान-दुर्गापुर से सांसद कीर्ति आजाद का दावा है कि काकोली गुट के पास जरूरी संख्या बल नहीं है और उनके द्वारा बुलाई गई बैठक में सिर्फ 13 सांसद ही शामिल हुए थे। फिलहाल दोनों गुटों के दावों-प्रतिदावों के बीच बंगाल से लेकर दिल्ली तक सियासी पारा चरम पर है। रामयश/ईएमएस 10 जून 2026