- अब 30 दिन में समाधान की बड़ी चुनौती रायपुर (ईएमएस)। प्रदेशभर में एक मई से शुरू हुआ सुशासन तिहार-2026 अब समाप्त हो गया है। 40 दिनों तक चले इस विशेष अभियान के जरिए राज्य सरकार ने गांव-गांव और शहर-शहर पहुंचकर आम लोगों की समस्याएं सुनीं, योजनाओं की जमीनी स्थिति का आकलन किया और विकास कार्यों की समीक्षा की। अब अभियान खत्म होने के बाद सबसे बड़ी चुनौती इन लाखों आवेदनों का समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित करना है। सुशासन तिहार के दौरान राज्य के सभी 33 जिलों में कुल 1286 जन-समस्या समाधान शिविर आयोजित किए गए। इन शिविरों में नागरिकों से कुल 6 लाख 43 हजार 334 आवेदन प्राप्त हुए। इनमें से 6 लाख 17 हजार 111 आवेदन विभिन्न मांगों और विकास कार्यों से संबंधित रहे, जबकि 26 हजार 223 आवेदन शिकायतों से जुड़े थे। आंकड़े बताते हैं कि कुल आवेदनों में लगभग 96 प्रतिशत आवेदन जनता की मांगों और बुनियादी सुविधाओं से संबंधित हैं। राज्य सरकार ने इन सभी आवेदनों के निराकरण के लिए अधिकतम एक माह की समय-सीमा निर्धारित की है। ऐसे में जिला प्रशासन और संबंधित विभागों के सामने बड़ी जिम्मेदारी आ गई है। यदि निर्धारित अवधि के भीतर सभी आवेदनों का समाधान करना है तो प्रशासन को प्रतिदिन औसतन 20 हजार से अधिक आवेदनों का निपटारा करना होगा। यही वजह है कि सुशासन तिहार की वास्तविक सफलता अब धरातल पर होने वाले कार्यों और समाधान की गति से तय होगी। अभियान का उद्देश्य केवल शिकायतें सुनना नहीं था, बल्कि शासन और जनता के बीच सीधे संवाद की व्यवस्था बनाना, विकास कार्यों में तेजी लाना तथा जनकल्याणकारी योजनाओं की वास्तविक स्थिति का मूल्यांकन करना भी था। ग्रामीण क्षेत्रों में 15 से 20 ग्राम पंचायतों के समूह बनाकर समाधान शिविर लगाए गए, जबकि शहरी क्षेत्रों में वार्ड क्लस्टर के आधार पर कार्यक्रम आयोजित किए गए। शिविरों में मौके पर ही आवेदन स्वीकार किए गए और पात्र हितग्राहियों को विभिन्न योजनाओं का लाभ भी प्रदान किया गया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने स्वयं अभियान के दौरान 33 समाधान शिविरों में भाग लिया और 12 स्थानों पर आकस्मिक निरीक्षण भी किए। उन्होंने कई जिलों में विकास कार्यों का जायजा लिया और अधिकारियों को समयबद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए। सुशासन तिहार के दौरान महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए भी कई पहल की गईं। दंतेवाड़ा जिले में आजीविका ग्रामीण एक्सप्रेस योजना के तहत महिलाओं को टाटा मैजिक वाहन प्रदान किए गए। वहीं आरंग विकासखंड के कोसरंगी गांव में 50 महिलाओं को निशुल्क सिलाई मशीनें वितरित की गईं। इसके अलावा राजनांदगांव, कबीरधाम, गरियाबंद और दंतेवाड़ा सहित कई जिलों में सड़क, सिंचाई, पेयजल और अन्य आधारभूत सुविधाओं से जुड़े करोड़ों रुपये के विकास कार्यों की घोषणाएं और स्वीकृतियां दी गईं। अभियान के समापन पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि सुशासन तिहार को जनता का उम्मीद से अधिक समर्थन मिला है। उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाओं का लाभ अब अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रहा है और इसका प्रभाव गांवों में स्पष्ट दिखाई दे रहा है। मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से बस्तर क्षेत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ कार्रवाई के साथ-साथ विकास कार्यों को भी समान प्राथमिकता दी गई है। सड़क, बिजली, पेयजल, स्कूल, अस्पताल और मोबाइल नेटवर्क जैसी बुनियादी सुविधाएं अब उन गांवों तक पहुंच रही हैं, जहां पहले पहुंचना भी कठिन था। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार द्वारा किए गए वादों को लगातार पूरा किया जा रहा है। किसानों को धान का बेहतर मूल्य मिल रहा है, प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत तेजी से मकानों का निर्माण हो रहा है और तेंदूपत्ता संग्राहकों की आय में भी बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने बताया कि महतारी वंदन योजना महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण का मजबूत माध्यम बन रही है। स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन और अन्य स्वरोजगार गतिविधियों के जरिए अपनी आय बढ़ा रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में लखपति दीदी की संख्या लगातार बढ़ रही है और अब महिलाएं ड्रोन दीदी तथा स्कूटी दीदी जैसी नई भूमिकाओं में भी आगे आ रही हैं। हालांकि सुशासन तिहार का आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हो गया है, लेकिन अब लोगों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि शिविरों में प्राप्त लाखों आवेदनों का समाधान कितनी तेजी और प्रभावशीलता से किया जाता है। यही सुशासन तिहार की वास्तविक परीक्षा और सफलता का पैमाना होगा। - (ईएमएस) 10 जून 2026