भुगतान संतुलन की स्थिति हो सकती है मजबूत, रुपए को मिल सकता है सहारा नई दिल्ली,(ईएमएस)। भारतीय रिजर्व बैंक और केंद्र सरकार के हालिया कदमों का असर आने वाले महीनों में विदेशी निवेश पर नजर आ सकता है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इन फैसलों से देश में विदेशी पूंजी का फ्लो बढ़ेगा, जिससे भारत के भुगतान संतुलन की स्थिति मजबूत हो सकती है और रुपए को भी सहारा मिल सकता है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक हाल ही में आरबीआई ने विदेशी मुद्रा गैर-निवासी जमा को बढ़ावा देने के लिए कुछ राहतें दी हैं। इसके तहत इन जमाओं पर हेजिंग लागत का बोझ खुद उठाने का फैसला किया है। साथ ही बैंकों को एनआरआई ग्राहकों को आकर्षक ब्याज दरें देने की सुविधा भी दी गई है। इसके अलावा सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को विदेशी बाजारों से कर्ज जुटाने के लिए भी प्रोत्साहित किया गया है। सरकार ने विदेशी डेट निवेशकों के लिए बड़ा कदम उठाते हुए विदहोल्डिंग टैक्स को 20 फीसदी से घटाकर शून्य कर दिया है। इससे विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय डेट बाजार में निवेश करना पहले की तुलना में ज्यादा आकर्षक हो सकता है। ब्रोकरेज हाउस मोतीलाल ओसवाल का अनुमान है कि आरबीआई और सरकार के इन कदमों से वित्त 2027 में भारत में 75 से 80 अरब डॉलर तक का अतिरिक्त विदेशी निवेश आ सकता है। अगर भारत को किसी वैश्विक बॉन्ड इंडेक्स में शामिल किया है तो इसके अलावा 15 से 20 अरब डॉलर तक का अतिरिक्त निवेश भी आ सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक अगर वित्त वर्ष 2027 में कच्चे तेल की औसत कीमत 95 डॉलर प्रति बैरल रहती है तो भारत का चालू खाता घाटा करीब 87 अरब डॉलर या जीडीपी के 2.1 फीसदी के बराबर रह सकता है। हालांकि पूंजी खाते में करीब 80 अरब डॉलर का अधिशेष आने का अनुमान है, जिससे चालू खाते के घाटे की भरपाई काफी हद तक हो सकती है। रिपोर्ट में बताया कि अगर ईरान से जुड़ा मौजूदा तनाव धीरे-धीरे कम हो जाता है तो अगले 3 से 4 महीनों में रुपए में मजबूती आ सकती है। हालांकि अगले एक साल में भारत के चालू खाते और राजकोषीय घाटे को लेकर चिंताएं फिर उभर सकती हैं। इसके अलावा अगर अमेरिकी डॉलर मजबूत रहता है तो रुपए पर दबाव बढ़ सकता है। ऐसी स्थिति में अगले 12 महीनों में रुपया 96 प्रति डॉलर के स्तर तक कमजोर हो सकता है। हालांकि यह पहले के 98-99 प्रति डॉलर के अनुमान से बेहतर स्थिति मानी जा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक आरबीआई और सरकार के हालिया फैसलों ने रुपए के लिए निकट अवधि का माहौल काफी सकारात्मक बना दिया है। विदेशी निवेश बढ़ने की संभावना से भारत के बाहरी वित्तीय मोर्चे को मजबूती मिल सकती है और रुपए की स्थिति पहले की तुलना में बेहतर रह सकती है। सिराज/ईएमएस 10जून26